नेपाल बाढ़: भारतीय सुरंग बचाव दल ने चिलिमे-लांगटांग में नेपाली सेना संग तलाशी अभियान चलाया, एक शव बरामद
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय सुरंग बचाव दल ने रविवार, 30 अगस्त को नेपाली सेना के साथ मिलकर चिलिमे और लांगटांग क्षेत्र के हाइड्रोपावर सुरंग स्थलों पर संयुक्त तलाशी एवं बचाव अभियान चलाया। खराब मौसम की चुनौतियों के बावजूद, दल लांगटांग हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के निकट एक सुरंग में प्रवेश करने और एक व्यक्ति का शव बाहर निकालने में सफल रहा।
अभियान का विवरण
नेपाल में भारतीय दूतावास ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर जानकारी दी कि भारतीय टीम नेपाली सेना के साथ 'घनिष्ठ समन्वय' में तलाशी और बचाव अभियान जारी रखेगी। दल ने चिलिमे और लांगटांग — दोनों हाइड्रोपावर स्थलों पर एक साथ काम किया और नेपाली सेना के बचाव प्रयासों में सक्रिय सहयोग दिया।
फोरेंसिक टीम की तैनाती
इसके साथ ही, भारत की 19 सदस्यीय विशेष फोरेंसिक टीम ने रविवार को काठमांडू में कार्य आरंभ कर दिया। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह टीम बाढ़ पीड़ितों के शवों की पहचान के लिए नेपाल में डीएनए सैंपल के विश्लेषण में सहायता करेगी।
नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने फोरेंसिक टीम से मुलाकात कर उन्हें अभियान की जानकारी दी। इसके बाद टीम ने नेपाल पुलिस की सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी और त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल के फोरेंसिक विभाग में अपने नेपाली समकक्षों के साथ विचार-विमर्श किया।
चीन की ओर से भारतीय नागरिकों की वापसी
विदेश मंत्रालय ने बताया कि रविवार रात 9:30 बजे IST तक, चीनी पक्ष के स्थानीय सरकारी सूत्रों के हवाले से 403 भारतीय नागरिक सुरक्षित रूप से चीन से नेपाल में प्रवेश कर चुके हैं। मंत्रालय के अनुसार, अभी भी 500 भारतीय नागरिक चीन की तरफ हैं, और वे सुरक्षित बताए जा रहे हैं।
राहत सामग्री की चौथी खेप पहुंची
नेपाल में विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए भारत की ओर से 11 टन राहत सामग्री लेकर चौथी उड़ान रविवार को काठमांडू पहुंची। सामग्री संबंधित नेपाली अधिकारियों को सौंप दी गई।
इस खेप में कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, प्लास्टिक शीट और हाइजीन किट शामिल थीं। इसके साथ ही खोज एवं बचाव उपकरणों से लैस एक सुरंग तकनीकी टीम और डीएनए विश्लेषण के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञों का दल भी इस उड़ान में आया।
आगे की राह
भारतीय दल लांगटांग हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के पास अपना सहयोग अभियान जारी रखे हुए है। गौरतलब है कि यह भारत-नेपाल के बीच आपदा प्रबंधन सहयोग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है, जो दोनों देशों के बीच पड़ोसी-प्रथम नीति को व्यावहारिक रूप देता है।