नेपाल PM बालेंद्र शाह के फेसबुक पोस्ट से RSP में फूट के संकेत, संसद में अपनी ही पार्टी ने उठाए गवर्नेंस पर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (उर्फ बालेन शाह) की सरकार इस समय दोहरे दबाव में है — एक तरफ सड़कों पर जन आक्रोश और दूसरी तरफ उनकी अपनी पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के भीतर से उठती आलोचना। 8 अगस्त को आधी रात किए गए एक फेसबुक पोस्ट ने इस आंतरिक तनाव को सार्वजनिक मंच पर ला खड़ा किया है।
पीएम का फेसबुक पोस्ट और उसका संदेश
प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने आधी रात को फेसबुक पर लिखा: 'सही समय आने में समय लगता है। इसमें देरी हो सकती है, लेकिन यह गलत नहीं होगा। चिंता न करें। कभी-कभी जो देखा और सुना जाता है, असलियत उससे अलग हो सकती है। कभी-कभी अकेले ही लड़ना पड़ता है। यह पहली बार नहीं है।' यह पोस्ट नेपाली संसद में RSP सांसदों द्वारा सरकार की कार्यशैली पर की गई कड़ी आलोचना के ठीक बाद सामने आया, जिससे राजनीतिक हलकों में इसके निहितार्थ को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई।
संसद में RSP नेता की आलोचना
RSP के वरिष्ठ नेता मनीष झा ने नेपाली संसद में सरकार के प्रशासनिक प्रबंधन पर खुलकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'सरकार को लेकर कोई शक या सवाल नहीं है। हालांकि, ऐसा लगता है कि प्रशासनिक दक्षता में कहीं कमी है और इसे स्वीकार करना होगा। नेतृत्व को यह समझना होगा कि उसे क्या नहीं पता और गवर्नेंस कौशल को बेहतर बनाना होगा।'
झा ने यह भी जोर दिया कि लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को जनता से जुड़े रहना चाहिए और सुझाव दिया कि अब 'काला चश्मा उतारने' का समय आ गया है — जो कि सरकार की कथित एकांगी सोच पर सीधा कटाक्ष माना जा रहा है।
पार्टी एकजुटता का दावा, लेकिन चेतावनी भी
मनीष झा ने पीएम के 'अकेलेपन' वाले संदेश का प्रत्यक्ष जवाब देते हुए कहा, 'हम सब आपके साथ हैं। बदलाव के लिए बड़े जनादेश वाली सरकार में कोई भी अकेला नहीं खड़ा होता।' उन्होंने आगे कहा, 'इरादे या मकसद पर कोई शक नहीं है, लेकिन कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जिनमें सुधार होना चाहिए। इस महान ऐतिहासिक मौके को बर्बाद न होने देने के लिए सतर्क रहने और सरकार को अलर्ट रखने की हमारी कोशिश जारी रहेगी।'
यह बयान एकजुटता का संदेश तो देता है, लेकिन साथ ही सत्तारूढ़ दल के भीतर जवाबदेही की माँग को भी रेखांकित करता है।
जन आक्रोश की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि बालेंद्र शाह की सरकार जेन-जी आंदोलन की लहर पर सत्ता में आई थी — एक ऐसा जन-आंदोलन जिसने नेपाल की पारंपरिक राजनीतिक पार्टियों को चुनौती दी थी। किंतु सत्ता में आने के बाद सरकार की कार्यशैली को लेकर आम जनता में असंतोष बढ़ता दिख रहा है। लोग सड़कों पर उतरकर सरकार के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं, जो दर्शाता है कि बदलाव की उम्मीद और व्यावहारिक शासन के बीच की खाई चौड़ी होती जा रही है।
आगे क्या होगा
RSP के भीतर इस आंतरिक असंतोष और सड़कों पर जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच बालेंद्र शाह सरकार के लिए आने वाले हफ्ते निर्णायक साबित हो सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि सरकार ने प्रशासनिक सुधारों की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए, तो पार्टी के भीतर का यह असंतोष और गहरा हो सकता है।