8 अगस्त 2026
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नेपाल PM बालेंद्र शाह के फेसबुक पोस्ट से RSP में फूट के संकेत, संसद में अपनी ही पार्टी ने उठाए गवर्नेंस पर सवाल

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नेपाल PM बालेंद्र शाह के फेसबुक पोस्ट से RSP में फूट के संकेत, संसद में अपनी ही पार्टी ने उठाए गवर्नेंस पर सवाल

सारांश

नेपाल के पीएम बालेंद्र शाह का आधी रात का फेसबुक पोस्ट — 'कभी-कभी अकेले ही लड़ना पड़ता है' — उनकी अपनी पार्टी RSP के संसदीय आलोचना के बाद आया। जेन-जी आंदोलन की उम्मीदों पर खरा न उतर पाने का आरोप और भीतर से उठती जवाबदेही की माँग — शाह सरकार दोहरे मोर्चे पर घिरती दिख रही है।

मुख्य बातें

नेपाल के PM बालेंद्र शाह ने 8 अगस्त को आधी रात फेसबुक पर 'अकेले लड़ने' का संकेत देने वाला पोस्ट साझा किया।
RSP नेता मनीष झा ने संसद में सरकार की प्रशासनिक दक्षता पर सवाल उठाए, हालांकि इरादों पर भरोसा जताया।
झा ने कहा — 'गवर्नेंस कौशल को बेहतर बनाना होगा' और 'काला चश्मा उतारने का समय आ गया है।' जेन-जी आंदोलन के बाद सत्ता में आई शाह सरकार के खिलाफ आम जनता सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर रही है।
RSP के भीतर आंतरिक असंतोष और बाहर जन आक्रोश — सरकार दोहरे दबाव में है।

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (उर्फ बालेन शाह) की सरकार इस समय दोहरे दबाव में है — एक तरफ सड़कों पर जन आक्रोश और दूसरी तरफ उनकी अपनी पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के भीतर से उठती आलोचना। 8 अगस्त को आधी रात किए गए एक फेसबुक पोस्ट ने इस आंतरिक तनाव को सार्वजनिक मंच पर ला खड़ा किया है।

पीएम का फेसबुक पोस्ट और उसका संदेश

प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने आधी रात को फेसबुक पर लिखा: 'सही समय आने में समय लगता है। इसमें देरी हो सकती है, लेकिन यह गलत नहीं होगा। चिंता न करें। कभी-कभी जो देखा और सुना जाता है, असलियत उससे अलग हो सकती है। कभी-कभी अकेले ही लड़ना पड़ता है। यह पहली बार नहीं है।' यह पोस्ट नेपाली संसद में RSP सांसदों द्वारा सरकार की कार्यशैली पर की गई कड़ी आलोचना के ठीक बाद सामने आया, जिससे राजनीतिक हलकों में इसके निहितार्थ को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई।

संसद में RSP नेता की आलोचना

RSP के वरिष्ठ नेता मनीष झा ने नेपाली संसद में सरकार के प्रशासनिक प्रबंधन पर खुलकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'सरकार को लेकर कोई शक या सवाल नहीं है। हालांकि, ऐसा लगता है कि प्रशासनिक दक्षता में कहीं कमी है और इसे स्वीकार करना होगा। नेतृत्व को यह समझना होगा कि उसे क्या नहीं पता और गवर्नेंस कौशल को बेहतर बनाना होगा।'

झा ने यह भी जोर दिया कि लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को जनता से जुड़े रहना चाहिए और सुझाव दिया कि अब 'काला चश्मा उतारने' का समय आ गया है — जो कि सरकार की कथित एकांगी सोच पर सीधा कटाक्ष माना जा रहा है।

पार्टी एकजुटता का दावा, लेकिन चेतावनी भी

मनीष झा ने पीएम के 'अकेलेपन' वाले संदेश का प्रत्यक्ष जवाब देते हुए कहा, 'हम सब आपके साथ हैं। बदलाव के लिए बड़े जनादेश वाली सरकार में कोई भी अकेला नहीं खड़ा होता।' उन्होंने आगे कहा, 'इरादे या मकसद पर कोई शक नहीं है, लेकिन कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जिनमें सुधार होना चाहिए। इस महान ऐतिहासिक मौके को बर्बाद न होने देने के लिए सतर्क रहने और सरकार को अलर्ट रखने की हमारी कोशिश जारी रहेगी।'

यह बयान एकजुटता का संदेश तो देता है, लेकिन साथ ही सत्तारूढ़ दल के भीतर जवाबदेही की माँग को भी रेखांकित करता है।

जन आक्रोश की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि बालेंद्र शाह की सरकार जेन-जी आंदोलन की लहर पर सत्ता में आई थी — एक ऐसा जन-आंदोलन जिसने नेपाल की पारंपरिक राजनीतिक पार्टियों को चुनौती दी थी। किंतु सत्ता में आने के बाद सरकार की कार्यशैली को लेकर आम जनता में असंतोष बढ़ता दिख रहा है। लोग सड़कों पर उतरकर सरकार के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं, जो दर्शाता है कि बदलाव की उम्मीद और व्यावहारिक शासन के बीच की खाई चौड़ी होती जा रही है।

आगे क्या होगा

RSP के भीतर इस आंतरिक असंतोष और सड़कों पर जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच बालेंद्र शाह सरकार के लिए आने वाले हफ्ते निर्णायक साबित हो सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि सरकार ने प्रशासनिक सुधारों की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए, तो पार्टी के भीतर का यह असंतोष और गहरा हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक शासक की उस असहजता का प्रतिबिंब है जो जनादेश और जमीनी हकीकत के बीच की खाई को महसूस कर रहा है। जेन-जी आंदोलन ने नेपाल में परंपरागत राजनीति को चुनौती देकर शाह को सत्ता दिलाई थी, लेकिन सत्ता की जटिलताओं ने उसी आंदोलन की उम्मीदों को कुंद करना शुरू कर दिया है। RSP के भीतर से उठती आलोचना यह संकेत देती है कि पार्टी अनुशासन और जवाबदेही के बीच संतुलन बनाना अभी बाकी है। यदि सरकार ने प्रशासनिक सुधारों को ठोस कार्रवाई में नहीं बदला, तो 'बदलाव की राजनीति' का यह प्रयोग नेपाल में एक और अधूरी क्रांति की कहानी बन सकता है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेपाल के PM बालेंद्र शाह ने फेसबुक पर क्या लिखा?
PM बालेंद्र शाह ने 8 अगस्त को आधी रात फेसबुक पर लिखा कि 'सही समय आने में देरी हो सकती है, लेकिन यह गलत नहीं होगा' और 'कभी-कभी अकेले ही लड़ना पड़ता है।' यह पोस्ट संसद में उनकी अपनी पार्टी RSP के सांसदों द्वारा सरकार की कार्यशैली पर आलोचना के बाद आया।
RSP नेता मनीष झा ने सरकार की किस बात की आलोचना की?
RSP नेता मनीष झा ने नेपाली संसद में कहा कि सरकार की प्रशासनिक दक्षता में कमी है और नेतृत्व को अपनी गवर्नेंस स्किल्स सुधारनी होंगी। उन्होंने इरादों पर भरोसा जताते हुए भी 'काला चश्मा उतारने' की जरूरत पर जोर दिया।
नेपाल में बालेंद्र शाह सरकार के खिलाफ जन आक्रोश क्यों है?
बालेंद्र शाह जेन-जी आंदोलन की लहर पर सत्ता में आए थे, जिसने नेपाल की परंपरागत राजनीति को चुनौती दी थी। सत्ता में आने के बाद सरकार की कार्यशैली से जनता में असंतोष बढ़ा है और लोग सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
क्या RSP में आंतरिक विभाजन हो रहा है?
RSP के भीतर खुलेआम आलोचना के संकेत मिल रहे हैं — पार्टी नेता मनीष झा ने संसद में सरकार की प्रशासनिक कमियाँ गिनाईं। हालांकि उन्होंने एकजुटता का भरोसा दिलाया, लेकिन PM का 'अकेले लड़ने' वाला पोस्ट पार्टी के भीतर तनाव की ओर इशारा करता है।
नेपाल की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) क्या है?
राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) नेपाल की वह पार्टी है जिसके नेतृत्व में बालेंद्र शाह प्रधानमंत्री बने। यह पार्टी जेन-जी आंदोलन के राजनीतिक उभार का प्रतिनिधित्व करती है और परंपरागत दलों के विकल्प के रूप में उभरी थी।
राष्ट्र प्रेस
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