नेपाल चुनाव: बालेंद्र शाह ने केपी ओली पर बनाई बढ़त, आरएसपी ने लिया अग्रणी स्थान
सारांश
Key Takeaways
- बालेंद्र शाह ने केपी ओली पर बढ़त बनाई है।
- आरएसपी ने पारंपरिक दलों को चुनौती दी है।
- मतगणना एफपीटीपी प्रणाली के तहत चल रही है।
- नेपाली राजनीति में बदलाव का संकेत है।
- जेन-जी विरोध प्रदर्शनों का असर चुनाव पर पड़ा है।
काठमांडू, 6 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। नेपाल में 5 मार्च को संपन्न संसदीय चुनावों के बाद अब मतगणना का कार्य जारी है। नेपाली समाचार स्रोतों के अनुसार, 43 सीटों की प्रारंभिक गिनती में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी 35 सीटों पर अग्रणी है। इस पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बालेंद्र शाह पूर्वी नेपाल के झापा-5 में पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली पर बड़ी बढ़त बनाए हुए हैं, जबकि आरएसपी ने देश के संसदीय चुनावों में शुरुआती बढ़त हासिल की है।
काठमांडू मेट्रोपॉलिटन सिटी के पूर्व मेयर बालेन शाह, ओली के पारंपरिक राजनीतिक गढ़ में प्रधानमंत्री पद के दो उम्मीदवारों के बीच मुकाबले में हैं। ऑनलाइन पोर्टल एकांतिपुर पर प्रारंभिक मतगणना के अनुसार, शाह को 1,478 वोट मिले हैं, जबकि ओली को 385 वोट प्राप्त हुए हैं।
शाह की बढ़त के साथ-साथ उनकी पार्टी, आरएसपी, भी प्रारंभिक मतगणना में विशाल बढ़त बना रही है। आरएसपी का लक्ष्य देश की राजनीति में पारंपरिक राजनीतिक दलों के दशकों पुराने दबदबे को समाप्त करना है।
हालिया अपडेट के अनुसार, आरसीपी 39 निर्वाचन क्षेत्रों में अग्रणी है, इसके बाद नेपाली कांग्रेस तीन क्षेत्रों में आगे चल रही है। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) केवल दो क्षेत्रों में बढ़त बनाए हुए है, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री ओली की पार्टी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड मार्क्सिस्ट-लेनिनिस्ट) किसी भी क्षेत्र में बढ़त नहीं बना पाई है।
मतगणना फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट (एफपीटीपी) प्रणाली के तहत चल रही है, जिसके माध्यम से संसद के निचले सदन के 165 सदस्यों का चुनाव किया जाएगा। 275 सदस्यों वाले निचले सदन का गठन प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन प्रणाली द्वारा किया जाएगा, जिसके तहत 110 सदस्य चुने जाएंगे।
प्रारंभिक नतीजों के अनुसार, तीन प्रमुख राजनीतिक दलों—नेपाली कांग्रेस, सीपीएन-यूएमएल और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी—का दशकों पुराना दबदबा समाप्त हो सकता है।
देश में पिछले साल सितंबर में जेन-जी विरोध प्रदर्शनों के बाद पहली बार चुनाव हो रहे हैं, जिसने उस समय के प्रधानमंत्री के पी ओली की गठबंधन सरकार को गिरा दिया था। नेपाल के लोगों में यह धारणा बढ़ रही थी कि परंपरागत दलों और उनके नेतृत्व के कारण देश पीछे चल रहा है। यही कारण है कि नेपाल में जेन-जी का कड़ा विरोध शुरू हुआ।
जेन-जी प्रदर्शनों के लगभग छह महीने बाद नेपाल में आम चुनाव हुए हैं, जिसके कारण प्रारंभिक नतीजों में पुरानी परंपरागत राजनीतिक दलों का प्रदर्शन खराब दिख रहा है। वहीं, राजनीतिक दल आरएसपी का प्रदर्शन अच्छा है, जिसका नेतृत्व पूर्व मीडिया पर्सनैलिटी रबी लामिछाने कर रहे हैं।