भारत से एनआईएसटी: इंजीनियरिंग विद्वान् अरविंद रमन ने साझा किया नवाचार का एजेंडा
सारांश
Key Takeaways
- अरविंद रमन ने अमेरिका में तकनीकी नवाचार को बढ़ाने पर जोर दिया।
- उन्होंने एनआईएसटी के महत्व और भूमिका को स्पष्ट किया।
- रमन का अनुभव अमेरिका के इंजीनियरिंग क्षेत्र में महत्वपूर्ण है।
- उन्होंने ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के महत्व पर चर्चा की।
- रमन ने कांग्रेस के साथ सहयोग का वादा किया।
वॉशिंगटन, 6 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय मूल के इंजीनियरिंग विद्वान् अरविंद रमन को अमेरिकी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्टैंडर्ड्स एंड टेक्नोलॉजी (एनआईएसटी) का नेतृत्व करने के लिए नामांकित किया गया है। उन्होंने यूएस के सीनेटरों से कहा कि यह एजेंसी अमेरिका में नवाचार को प्रोत्साहित करने और वैश्विक तकनीकी मानकों को स्थापित करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उनके अनुसार, अमेरिका को चीन के साथ नई तकनीक के क्षेत्र में मुकाबला करने के लिए अपने नवाचार को तेज करने की आवश्यकता है।
अरविंद रमन ने अपने भारत से अमेरिका तक के सफर को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करते हुए बताया कि वे पहली बार 35 वर्ष पूर्व पर्ड्यू यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए आए थे। उस समय उनके पास केवल कुछ डॉलर थे।
उन्होंने याद किया कि शोध सहायक के तौर पर उन्हें मिलने वाली पहली सैलरी में कुछ हफ्तों की देरी थी। इस दौरान उन्होंने बिना क्रेडिट हिस्ट्री वाले छात्रों के लिए उपलब्ध विश्वविद्यालय लोन और स्थानीय गुडविल स्टोर की मदद से अपने दिन बिताए।
अरविंद ने पर्ड्यू यूनिवर्सिटी का जिक्र करते हुए कहा, “आज मैं इस प्रतिष्ठित संस्थान में इंजीनियरिंग विभाग का प्रमुख हूं।” उन्होंने दो दशकों से अधिक समय तक फैकल्टी सदस्य के रूप में कार्य किया है और अब वे अमेरिका के एक प्रमुख इंजीनियरिंग कॉलेज का नेतृत्व कर रहे हैं।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा स्टैंडर्ड्स और तकनीक के लिए वाणिज्य के अवर सचिव और एनआईएसटी के निदेशक के रूप में नामांकित किए गए रमन ने कहा कि यह एजेंसी अमेरिकी उद्योग और तकनीकी नेतृत्व को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
उन्होंने कहा, “एनआईएसटी अमेरिकी औद्योगिक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने में सहायक रहा है।” एक शताब्दी से अधिक समय से, यह संस्थान यह सुनिश्चित करने में मदद कर रहा है कि अमेरिकी उद्योग और तकनीक भरोसेमंद मानकों पर आधारित हों।
रमन ने कहा, “यदि एनआईएसटी के नेतृत्व की पुष्टि होती है, तो मैं सभी के साथ मिलकर एनआईएसटी का अगला अध्याय लिखने के लिए उत्सुक हूं, जिसमें उद्योग, उद्यमियों और स्टेकहोल्डरों के साथ साझेदारी में तकनीकी नवाचार को गति देना शामिल होगा।”
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय तकनीकी मानकों के महत्व पर भी ज़ोर देते हुए कहा कि ये वैश्विक वाणिज्य को नियंत्रित करने वाले नियम निर्धारित करने में मदद करते हैं।
रमन ने सीनेटरों से कहा, “जब अमेरिका वैश्विक तकनीकी मानकों को निर्धारित करता है, तो इसका मतलब है कि ये नियम अमेरिकी मूल्यों, मुक्त बाजार, निजी क्षेत्र के नवाचार, गोपनीयता और बोलने की आज़ादी पर आधारित होते हैं।”
कई सीनेटरों ने उनसे एनआईएसटी द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमों के बारे में पूछा, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग एक्सटेंशन साझेदारी भी शामिल है, जो पूरे अमेरिका में छोटे और मध्यम आकार के निर्माताओं का समर्थन करती है।
रमन ने बार-बार कहा कि वे अभी इस पद पर नहीं हैं और नीति से जुड़े निर्णय लेने से पहले विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी की समीक्षा करनी होगी। हालांकि, उन्होंने सीनेटरों को आश्वासन दिया कि वे कांग्रेस के निर्देशों का पालन करेंगे।
उन्होंने कहा, “अगर मुझे एनआईएसटी के निदेशक के रूप में पुष्टि मिलती है, तो मैं कानून का पालन करूंगा। मैं एआई टेक स्टैक में नवाचार को बढ़ावा देने और एनआईएसटी को राष्ट्रपति के एआई एक्शन प्लान को पूरा करने में मदद करने के लिए उत्साहित हूं।” उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और उन्नत मैन्युफैक्चरिंग जैसी नई तकनीकों में अमेरिकी नेतृत्व को मजबूत करने के लिए कांग्रेस के साथ सहयोग करने का भी वादा किया।
उन्होंने आगे कहा कि इस प्रयास में चिप्स, जैव प्रौद्योगिकी, क्वांटम तकनीक और मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम में अमेरिकी नेतृत्व को आगे बढ़ाना शामिल होगा।
रमन ने इस बात पर जोर दिया कि एनआईएसटी को उद्योग और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ मिलकर काम करना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अमेरिकी तकनीक वैश्विक मानकों को आकार दे सके।