पीयूष गोयल के जापान दौरे में 30+ कंपनियों से चर्चा, सेमीकंडक्टर-इंफ्रा निवेश पर बड़ा जोर
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जापान की आधिकारिक यात्रा के दौरान टोक्यो, नागोया और ओसाका में उच्चस्तरीय बैठकों की एक श्रृंखला आयोजित की, जिसमें 30 से अधिक प्रमुख जापानी कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के शीर्ष अधिकारियों के साथ निवेश विस्तार और औद्योगिक साझेदारी पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। 27 अगस्त 2026 को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इस यात्रा ने भारत-जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी को नई दिशा देने का काम किया है।
यात्रा के मुख्य उद्देश्य
इस दौरे का केंद्रीय लक्ष्य जापानी दीर्घकालिक संस्थागत पूंजी को भारत की ओर आकर्षित करना था। गोयल ने MUFG, मिजुहो, नोमुरा, निप्पॉन लाइफ, डेवलपमेंट बैंक ऑफ जापान और मॉर्गन स्टेनली MUFG सिक्योरिटीज जैसे प्रमुख वित्तीय संस्थानों के प्रमुखों से मुलाकात की। इन बैठकों में भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी और वित्तीय क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर गहन चर्चा हुई।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की महत्वाकांक्षा
गोयल ने जापानी निवेशकों के समक्ष भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र की संभावनाओं को प्रमुखता से रखा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2032 तक भारत में सेमीकंडक्टर की माँग 150 अरब डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है। सरकार की छह स्तंभों वाली रणनीति — जिसमें चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर मशीनरी एवं सामग्री, चिप निर्माण, ATMP/OSAT, अनुसंधान एवं विकास, और प्रतिभा विकास शामिल हैं — को इस क्षेत्र में जापानी भागीदारी के लिए एक ठोस रोडमैप के रूप में प्रस्तुत किया गया। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखला के विविधीकरण को लेकर दुनियाभर में चर्चा तेज है।
टियर-2, टियर-3 और MSME एकीकरण पर जोर
विभिन्न क्षेत्रों पर केंद्रित गोलमेज बैठकों में भारतीय और जापानी उद्योग प्रतिनिधियों ने मिलकर ठोस निवेश परियोजनाओं और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के अवसर तलाशे। खासतौर पर भारत के टियर-2 और टियर-3 आपूर्तिकर्ता नेटवर्क तथा MSME क्षेत्र को जापानी उद्योगों के साथ जोड़ने पर विशेष बल दिया गया — जो भारतीय विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को गहराई से मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
सरकारी और व्यापारिक संगठनों से बैठकें
गोयल ने जापान के अर्थव्यवस्था, व्यापार एवं उद्योग मंत्री अकाजावा रयोसेई से भी द्विपक्षीय वार्ता की। इसके अतिरिक्त, उन्होंने जापान एक्सटर्नल ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (JETRO), जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन (JBIC) और जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। इन चर्चाओं में व्यापार, आपूर्ति शृंखलाओं की लचीलापन, अवसंरचना विकास और भारत की विकास यात्रा में जापानी कंपनियों की भूमिका विस्तार पर विचार-विमर्श हुआ।
नागोया रोडशो: अगली पीढ़ी की साझेदारी का खाका
नागोया में गोयल ने 'भारत-जापान नेक्स्ट जेनरेशन इकोनॉमिक पार्टनरशिप' रोडशो को संबोधित किया, जिसे चुकिरेन और अन्य प्रमुख व्यापारिक संगठनों के सहयोग से आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में जापान के चूबू क्षेत्र की 80 से अधिक कंपनियों ने भाग लिया। चर्चा के प्रमुख विषयों में ऑटोमोबाइल, एयरोस्पेस, मशीन टूल्स, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो कंपोनेंट्स और MSME क्षेत्र शामिल रहे। गौरतलब है कि चूबू क्षेत्र जापान का औद्योगिक हृदय माना जाता है, जहाँ टोयोटा सहित कई वैश्विक विनिर्माण दिग्गजों का मुख्यालय है। आने वाले महीनों में इन बैठकों के ठोस परिणाम सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है।