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अखिलेश यादव से सीजेपी नेताओं की मुलाकात पर सियासत गरमाई, विपक्ष बोला — शिष्टाचार भेंट थी

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अखिलेश यादव से सीजेपी नेताओं की मुलाकात पर सियासत गरमाई, विपक्ष बोला — शिष्टाचार भेंट थी

सारांश

अखिलेश यादव से सीजेपी नेताओं की मुलाकात ने सियासी बहस छेड़ दी है। सपा ने इसे शिष्टाचार भेंट बताया, जबकि सीपीआई(एम) ने इसे जंतर-मंतर आंदोलन की व्यापक जीत से जोड़ा। पृष्ठभूमि में छात्रों पर दर्ज मामले और सर्वोच्च न्यायालय का हस्तक्षेप है।

मुख्य बातें

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव से सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका की मुलाकात 4 सितंबर को हुई।
सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने कहा — यह केवल आभार भेंट थी, कोई राजनीतिक चर्चा नहीं हुई।
जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन में अखिलेश यादव और डिंपल यादव ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया था।
सीपीआई(एम) महासचिव एम.
बेबी के अनुसार, छात्रों पर मामले वापस लेने के वादे से सरकार पीछे हटी, जिसके बाद 5 तारीख को प्रदर्शन की घोषणा हुई।
सरकार को सर्वोच्च न्यायालय जाना पड़ा और सभी मामले वापस लेने का अनुरोध करना पड़ा।

नई दिल्ली, 4 सितंबर को समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव से सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका की मुलाकात को लेकर राजनीतिक हलकों में तीखी बहस छिड़ गई है। जहाँ सत्तारूढ़ दल ने इसे राजनीतिक दृष्टि से देखा, वहीं विपक्षी दलों ने इसे महज एक शिष्टाचार भेंट करार दिया।

भाजपा की प्रतिक्रिया

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री मनोज पांडेय ने कहा, 'भाजपा सेवा, सम्मान और सुशासन पर विश्वास करती है। देश में पीएम के नेतृत्व और उत्तर प्रदेश में सीएम के नेतृत्व में एक-एक कार्यकर्ता को ध्यान रहता है कि हम जनता की अपेक्षाओं में खरे कैसे उतरें और जनता की आवश्यकताओं की पूर्ति कैसे कर सकते हैं। सरकार की लाभकारी योजनाओं को जनता तक कैसे पहुँचाएँ? भाजपा का हर एक कार्यकर्ता इसी के साथ काम करता है और हम ऐसे ही काम करते रहेंगे।' पांडेय ने इस मुलाकात पर सीधी टिप्पणी करने से परहेज़ किया, लेकिन उनका संदेश स्पष्ट था।

सपा का पक्ष — आभार, राजनीति नहीं

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने स्पष्ट किया कि सीजेपी के नेता और प्रवक्ता अखिलेश यादव से केवल आभार व्यक्त करने आए थे। उन्होंने कहा, 'जंतर-मंतर पर जिस तरह से विरोध-प्रदर्शन हुआ और देशभर में युवाओं ने जिस तरह से विरोध किया, समाजवादी पार्टी ने सड़कों से लेकर विधानसभा तक युवाओं की माँगों का समर्थन किया और सदन में उनकी आवाज़ उठाई। अखिलेश यादव भी सड़कों से लेकर सदन तक प्रदर्शनकारियों के साथ खड़े रहे और लगातार उनका समर्थन और मदद करते रहे।'

चांद ने यह भी जोड़ा कि डिंपल यादव भी प्रदर्शनकारियों के साथ खड़ी रहीं। उनके अनुसार, 'कोई राजनीतिक चर्चा नहीं हुई। राजनीति का कोई विषय नहीं था। जेन-जी और जेन-अल्फा और देश की शिक्षा व्यवस्था का विषय था।'

कांग्रेस और वामपंथ की राय

कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने कहा, 'ऐसी बैठकें होती रहती हैं और बैठक करने में कुछ भी गैरकानूनी नहीं है। अगर जेन-जी के नेताओं के साथ बैठकें होती हैं तो यह और भी अच्छी बात है।'

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के महासचिव एम. ए. बेबी ने इस घटनाक्रम को व्यापक संदर्भ में रखते हुए कहा कि भाजपा को इस आंदोलन से झटका लगा है। उन्होंने कहा, 'जंतर-मंतर संघर्ष की जीत हुई, फिर सरकार इससे बचने की कोशिश कर रही है, क्योंकि एक समझौता यह था कि जो छात्र शांतिपूर्ण तरीके से अपना आंदोलन कर रहे थे, उन पर सभी मनगढ़ंत मामले वापस ले लिए जाएंगे। फिर सरकार उस प्रस्ताव से पीछे हट गई।'

सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा मामला

बेबी के अनुसार, जब सीजेपी और अन्य छात्र संगठनों ने 5 तारीख को प्रदर्शन की घोषणा की, तो सरकार को तुरंत सर्वोच्च न्यायालय का रुख करना पड़ा और सभी मामलों को वापस लेने का अनुरोध करना पड़ा। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में युवा वर्ग की राजनीतिक सक्रियता तेज़ी से बढ़ रही है और परंपरागत दलों के साथ उनका जुड़ाव नई राजनीतिक समीकरणों को जन्म दे रहा है।

आगे क्या

गौरतलब है कि यह मुलाकात ऐसे समय में हुई जब छात्र आंदोलन और उससे जुड़े मामलों पर सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई जारी है। सभी पक्षों की नज़र अब अदालत के अगले निर्देशों पर टिकी है, जो इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह दर्शाता है कि छात्र दबाव ने सरकार को रक्षात्मक स्थिति में ला दिया। मुख्यधारा की कवरेज मुलाकात की 'सियासत' पर अटकी है, जबकि असली खबर यह है कि छात्र आंदोलन ने संसदीय और न्यायिक — दोनों मोर्चों पर प्रतिक्रिया खींच ली।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अखिलेश यादव से सीजेपी नेताओं की मुलाकात क्यों हुई?
सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका और अन्य नेता अखिलेश यादव से जंतर-मंतर प्रदर्शन में समर्थन के लिए आभार व्यक्त करने आए थे। सपा के अनुसार कोई राजनीतिक चर्चा नहीं हुई और विषय जेन-जी, जेन-अल्फा और देश की शिक्षा व्यवस्था था।
जंतर-मंतर छात्र आंदोलन क्या था?
जंतर-मंतर पर छात्रों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया था, जिसमें सपा ने सड़कों से लेकर विधानसभा तक युवाओं की माँगों का समर्थन किया। इस आंदोलन से जुड़े छात्रों पर कथित तौर पर मामले दर्ज किए गए थे।
सरकार को सुप्रीम कोर्ट क्यों जाना पड़ा?
सीपीआई(एम) महासचिव एम. ए. बेबी के अनुसार, छात्रों पर दर्ज मामले वापस लेने के समझौते से सरकार पीछे हट गई, जिसके बाद सीजेपी ने 5 तारीख को प्रदर्शन की घोषणा की। इसके बाद सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय से सभी मामले वापस लेने का अनुरोध किया।
भाजपा ने इस मुलाकात पर क्या कहा?
उत्तर प्रदेश के मंत्री मनोज पांडेय ने मुलाकात पर सीधी टिप्पणी से परहेज़ किया और भाजपा की सेवा, सम्मान और सुशासन की नीति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पार्टी का हर कार्यकर्ता जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए काम करता है।
कांग्रेस और वामपंथी दलों ने इस मुलाकात को कैसे देखा?
कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि ऐसी बैठकें होती रहती हैं और इसमें कुछ भी गैरकानूनी नहीं है। सीपीआई(एम) ने इसे जंतर-मंतर आंदोलन की व्यापक जीत के संदर्भ में देखा और कहा कि इससे भाजपा को झटका लगा है।
राष्ट्र प्रेस
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