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औरंगाबाद में मिट्टी का मकान ढहा: 12 वर्षीय बबली कुमारी की मौत, माँ समेत 4 घायल

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औरंगाबाद में मिट्टी का मकान ढहा: 12 वर्षीय बबली कुमारी की मौत, माँ समेत 4 घायल

सारांश

बिहार के औरंगाबाद में भारी बारिश के बाद एक पुराना मिट्टी का मकान रात को ढह गया। 12 वर्षीय बबली कुमारी की मौत हो गई, जबकि माँ और तीन भाई-बहन घायल हैं। पूर्व विधायक ने परिवार को स्थायी घर और मुआवजे की माँग की है।

मुख्य बातें

औरंगाबाद के सिन्हुदी गाँव में 4 सितंबर की रात पुराना कच्चा मकान ढहा।
12 वर्षीय बबली कुमारी की मलबे में दबने से मौत; सदर अस्पताल में डॉक्टरों ने मृत घोषित किया।
माँ पूनम देवी और तीन बच्चे — नंदानी कुमारी , रिमी कुमारी , कुंदन कुमार — गंभीर रूप से घायल, अस्पताल में भर्ती।
क्षेत्र में भारी बारिश के कारण मकान की मिट्टी की दीवारें कमज़ोर होने की आशंका।
पूर्व विधायक ऋषि यादव ने जिला प्रशासन से स्थायी आवास और मुआवजे की माँग की।
एसएचओ नीतीश कुमार ने बताया — पोस्टमार्टम पूरा, मुआवजे के लिए मामला जिला मजिस्ट्रेट को भेजा गया।

बिहार के औरंगाबाद जिले के सिन्हुदी गाँव में 4 सितंबर की रात एक पुराना कच्चा मकान अचानक ढह गया, जिसमें 12 वर्षीय बबली कुमारी की मौत हो गई और उसकी माँ पूनम देवी सहित तीन अन्य बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए। ओबरा पुलिस थाना क्षेत्र में घटी इस दुखद घटना ने पूरे गाँव को शोक में डुबो दिया है।

घटनाक्रम: रात को सोते वक्त ढही छत

ग्रामीणों के अनुसार, पूनम देवी अपने चार बच्चों के साथ हर रात की तरह उसी पुराने मिट्टी के मकान में सो रही थीं, तभी अचानक दीवारें और छत भरभराकर गिर पड़ीं और पूरा कमरा मलबे में तब्दील हो गया। चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण सतर्क हुए और तुरंत मौके पर पहुँचे, जहाँ उन्होंने पाँचों परिजनों को मलबे के नीचे दबा पाया।

ग्रामीणों ने बिना देर किए बचाव अभियान शुरू किया और काफी मशक्कत के बाद परिवार के सभी पाँच सदस्यों को मलबे से बाहर निकाला। हालाँकि, बबली कुमारी को बचाया नहीं जा सका।

घायलों की स्थिति और अस्पताल में इलाज

घायलों में बबली की माँ पूनम देवी और तीन अन्य बच्चे — नंदानी कुमारी, रिमी कुमारी और कुंदन कुमार — शामिल हैं। चारों को तत्काल औरंगाबाद सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ चिकित्सकों ने बबली कुमारी को मृत घोषित कर दिया। घायल परिजन अभी भी अस्पताल में उपचाराधीन हैं।

पुलिस की कार्रवाई और जाँच

ओबरा थाना के एसएचओ नीतीश कुमार ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची। उन्होंने कहा, 'हमने शव का पोस्टमार्टम करा लिया है और अंतिम संस्कार के लिए इसे परिवार को सौंप दिया है।' एसएचओ ने यह भी जानकारी दी कि मुआवजे के लिए मामले को जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय को भेजने की सिफारिश की गई है और घटना की आगे की जाँच जारी है।

भारी बारिश बनी हादसे की वजह

पिछले कुछ दिनों से इस क्षेत्र में भारी बारिश हो रही है, जिससे कथित तौर पर मिट्टी के मकान की संरचना कमज़ोर पड़ गई होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बारिश से भीगी मिट्टी की दीवारें अपना भार वहन करने में असमर्थ हो जाती हैं, जो इस तरह की दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण बनती हैं।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और मुआवजे की माँग

पूर्व विधायक ऋषि यादव ने इस त्रासदी पर गहरा दुख व्यक्त किया और जिला प्रशासन से पीड़ित परिवार को स्थायी आवास तथा पर्याप्त मुआवजा उपलब्ध कराने का आग्रह किया। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब बिहार में कच्चे मकानों की जर्जर स्थिति और मानसून के दौरान उनसे जुड़े खतरे एक बार फिर चर्चा में हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि बिहार के ग्रामीण इलाकों में लाखों कच्चे मकानों की जर्जर हकीकत का आईना है। मानसून हर साल इन संरचनाओं को और कमज़ोर करता है, फिर भी राज्य में पक्के आवास की योजनाएँ ज़मीन पर उतनी तेज़ी से नहीं पहुँचतीं जितनी ज़रूरत है। पूर्व विधायक का मुआवजे का आग्रह स्वागतयोग्य है, लेकिन असली सवाल यह है कि आपदा के बाद की राहत से आगे बढ़कर इन परिवारों को मानसून से पहले सुरक्षित छत कब मिलेगी।
RashtraPress
19 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

औरंगाबाद में मकान कैसे गिरा और हादसा कब हुआ?
4 सितंबर की रात ओबरा थाना क्षेत्र के सिन्हुदी गाँव में एक पुराना मिट्टी का मकान अचानक ढह गया। पिछले कुछ दिनों से हो रही भारी बारिश के कारण दीवारें कमज़ोर हो गई थीं, जिससे छत और दीवारें एक साथ गिर पड़ीं।
बबली कुमारी कौन थी और उसके परिवार की क्या स्थिति है?
बबली कुमारी 12 वर्षीय बच्ची थी जो अपनी माँ पूनम देवी और तीन भाई-बहनों के साथ उसी मकान में सो रही थी। मलबे से निकालने के बाद उसे सदर अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। माँ और तीनों बच्चे अभी भी अस्पताल में उपचाराधीन हैं।
पुलिस ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
ओबरा थाने के एसएचओ नीतीश कुमार के अनुसार पुलिस सूचना मिलते ही मौके पर पहुँची। शव का पोस्टमार्टम करा लिया गया है और अंतिम संस्कार के लिए परिवार को सौंप दिया गया है। मुआवजे के लिए मामला जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय को भेजने की सिफारिश की गई है।
पीड़ित परिवार को मुआवजा मिलेगा?
एसएचओ ने बताया कि मुआवजे के लिए मामला जिला मजिस्ट्रेट के कार्यालय को भेजा गया है। पूर्व विधायक ऋषि यादव ने भी जिला प्रशासन से परिवार को स्थायी आवास और पर्याप्त मुआवजा दिलाने की माँग की है।
बिहार में मानसून के दौरान कच्चे मकान क्यों खतरनाक हो जाते हैं?
भारी बारिश से मिट्टी की दीवारें पानी सोखकर नरम और कमज़ोर हो जाती हैं, जिससे उनकी भार वहन क्षमता घट जाती है। औरंगाबाद में भी लगातार बारिश के बाद यही हुआ। बिहार के ग्रामीण इलाकों में अभी भी बड़ी संख्या में परिवार ऐसे पुराने कच्चे मकानों में रहते हैं जो मानसून में जोखिम भरे हो जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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