सीजेपी मार्च पर संजय निषाद का तीखा हमला: 'बिना दिशा की मिसाइल, शादी में बिन बुलाए मेहमान'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री संजय निषाद ने 20 जुलाई 2026 को लखनऊ में जंतर-मंतर से संसद तक निकाले गए सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) के मार्च पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता युवाओं को भ्रमित करने का काम कर रहे हैं और यह पूरा आंदोलन 'बिना दिशा की मिसाइल' जैसा है।
मार्च पर निषाद का कटाक्ष
मंत्री निषाद ने सीजेपी मार्च में शामिल प्रतिभागियों पर तंज कसते हुए कहा, 'वे सभी बिना दिशा वाली मिसाइल की तरह हैं, जैसे शादी में बिन बुलाए मेहमान।' उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी नेता युवाओं को केवल भ्रमित और गुमराह कर रहे हैं और उन्हें सत्ता में आने के लिए पहले राजनीतिक प्रशिक्षण लेना चाहिए।
सोनम वांगचुक पर बयान
पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तीन शर्तों के संदर्भ में निषाद ने कहा कि वांगचुक एक बुद्धिजीवी हैं, परंतु ऐसे लोगों के साथ जुड़कर वे अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार उनकी जान बचाने की कोशिश कर रही है। निषाद ने यह भी कहा कि विपक्ष पहले ही गांधी और अंबेडकर के आदर्शों के साथ धोखा कर चुका है और कोई भी विरोध लोकतांत्रिक तरीके से किया जाना चाहिए।
राजनीति के उद्देश्य पर विचार
मंत्री ने कहा कि राजनीति का मूल उद्देश्य जनता के हितों की रक्षा करना और उनके लिए बेहतर कानून बनाना है। उनके अनुसार, 'राजनीति एक अभिभावक की तरह होती है — जनता के पैसे और हितों की रक्षा ही इसका असली लक्ष्य है। जब स्वस्थ विचार और स्वस्थ सरकार होगी, तभी जनता के हित में अच्छे कानून बन सकेंगे।'
ऊर्जा क्षेत्र और युवा उद्यमिता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के युवाओं और स्टार्टअप से जुड़े बयान का समर्थन करते हुए निषाद ने कहा कि देश ऊर्जा के क्षेत्र में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने हाइड्रोजन ऊर्जा जैसी उभरती तकनीकों को देश के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया और कहा, 'जिस देश के पास ऊर्जा होगी, वही देश आगे बढ़ेगा। भारत ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है।'
वंदे मातरम विधेयक और राम मंदिर मामला
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा वंदे मातरम से जुड़े विधेयक पेश किए जाने का निषाद ने स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रवाद से जुड़ा विषय है और देश की आज़ादी में योगदान देने वाले सभी वर्गों का सम्मान होना चाहिए। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सर्वोच्च न्यायालय को एसआईटी रिपोर्ट सौंपे जाने पर उन्होंने कहा कि यह संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सराहना करते हुए कहा कि रिपोर्ट को सार्वजनिक करने या न करने का निर्णय न्यायालय करेगा और सभी को उसके आदेश का सम्मान करना चाहिए। आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर राजनीतिक बहस और तेज़ होने की संभावना है।