अखिलेश यादव का भाजपा पर प्रहार: 'चार दिन का सत्र, चार दिन बची सरकार'
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 2 अगस्त को लखनऊ में आयोजित प्रेसवार्ता में उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर तीखा हमला बोला। उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र से ठीक एक दिन पहले यादव ने दावा किया कि सत्र का केवल चार दिन का होना इस बात का प्रमाण है कि सरकार का कार्यकाल 'गिनती के दिनों' में आ चुका है।
मानसून सत्र पर सपा का रुख
अखिलेश यादव ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि सत्र के चारों दिन पहले से तय हैं — पहला दिन श्रद्धांजलि में, दूसरा दिन अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की जिम्मेदारी से बचने में, तीसरा दिन प्रयागराज समेत प्रदेश में छात्र आंदोलनों से निपटने में और चौथा दिन हालिया विवादों से पल्ला झाड़ते हुए सत्र समाप्त करने में बीत जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार इस छोटे सत्र के ज़रिए केवल संवैधानिक औपचारिकता निभा रही है।
सदन में उठाए जाने वाले मुद्दे
सपा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी के विधायक सदन में बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, बिजली दरों में बढ़ोतरी, एक्सप्रेस-वे की गुणवत्ता, किसानों की बदहाली, शिक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था जैसे अहम मुद्दों पर सरकार से जवाब माँगेंगे। राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और जौहर विश्वविद्यालय का मामला भी सपा प्रमुखता से उठाएगी।
स्कूल विलय और शिक्षा व्यवस्था पर आरोप
यादव ने सरकार के स्कूल विलय अभियान को विशेष रूप से निशाने पर लिया। उनके अनुसार प्रदेश में 26 हजार से अधिक सरकारी स्कूल बंद किए जा चुके हैं, जिससे पिछड़े, दलित और आदिवासी समाज के लाखों बच्चे प्रभावित हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि स्कूलों के विलय से 28 लाख विद्यार्थियों का नामांकन घटा है, 62 हजार से अधिक शिक्षकों की संख्या कम हुई है और 81 हजार से ज्यादा पद खाली पड़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नई भर्तियाँ नहीं हो रहीं और शिक्षा व्यवस्था लगातार कमज़ोर हो रही है।
किसान और रोजगार के मुद्दे
किसानों के संदर्भ में अखिलेश यादव ने कहा कि आय दोगुनी करने का वादा पूरा नहीं हुआ, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी गारंटी नहीं मिली और आलू उत्पादक किसान संकट में हैं। रोजगार पर उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी नौकरियों में आरक्षित पद भी खाली पड़े हैं और अवसर लगातार सिकुड़ रहे हैं।
सहयोगी दलों और राजनीतिक समीकरण पर टिप्पणी
सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर और सपा नेता ओम प्रकाश सिंह की हालिया मुलाकात पर पूछे गए सवाल पर यादव ने कहा, 'हमारे ओमप्रकाश, उनके ओमप्रकाश से मिल आए हैं। अब निगेटिव-निगेटिव मिला या पॉजिटिव, यह तो भगवान ही जाने।' राजभर के पंचायत चुनाव संबंधी बयान पर उन्होंने कहा कि भाजपा किसी की स्थायी सहयोगी नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ अभी से तेज़ होने लगी हैं। सपा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि मानसून सत्र सरकार की जवाबदेही तय करने का मंच बनेगा।