पेपर लीक और बंद स्कूलों पर अखिलेश यादव का BJP पर हमला, बोले — युवाओं का भविष्य दांव पर
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 29 जून 2026 को प्रयागराज में आयोजित 'विजन इंडिया' कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को ध्वस्त करने का सीधा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लगातार पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में धांधली, सरकारी स्कूलों के बंद होने और बढ़ती बेरोज़गारी ने देश के युवाओं के भविष्य को अंधकार में धकेल दिया है।
कार्यक्रम की पृष्ठभूमि
'विजन इंडिया' कार्यक्रम में 'शिक्षा-परीक्षा: क्यों ध्वस्त हुई व्यवस्था' विषय पर आयोजित संवाद को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि शिक्षा किसी भी देश की बुनियाद होती है। उनके अनुसार, जब परीक्षा प्रणाली और शिक्षा व्यवस्था कमज़ोर पड़ती है, तो सबसे बड़ा नुकसान युवाओं और देश के भविष्य को उठाना पड़ता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शिक्षा और रोज़गार की स्थिति नहीं सुधरी, तो देश का जनसांख्यिकीय लाभ (डेमोग्राफिक डिविडेंड) एक बड़ी चुनौती में तब्दील हो जाएगा।
मुख्य आरोप: स्कूल बंद, बजट कटौती, राजनीतिक हस्तक्षेप
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि BJP सरकार ने केजी से लेकर पीजी तक की पूरी शिक्षा श्रृंखला को कमज़ोर किया है। उनके अनुसार, उत्तर प्रदेश में 20 हजार से अधिक प्राथमिक विद्यालय बंद किए जा चुके हैं — मुख्यतः 'मर्जर' के नाम पर — जिससे छोटे बच्चों, विशेषकर बालिकाओं की पढ़ाई बाधित हो रही है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय राजनीतिक हस्तक्षेप का शिकार हैं और शिक्षा का बजट लगातार घटाया जा रहा है, जबकि सरकार शोध के बजाय विज्ञापनों पर अधिक धन खर्च कर रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षकों को पढ़ाने के बजाय गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जा रहा है और स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। उच्च शिक्षा संस्थानों में रिक्त पदों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि योग्य अभ्यर्थियों को 'नॉट फाउंड सूटेबल' बताकर नियुक्तियाँ रोकी जा रही हैं।
पेपर लीक और भर्ती धांधली पर तीखा प्रहार
सपा अध्यक्ष ने कहा कि BJP के कार्यकाल में शिक्षा और परीक्षा प्रणाली भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। उनके अनुसार, पेपर लीक से लेकर भर्ती प्रक्रिया तक पूरा तंत्र प्रभावित है और सरकार अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने से बच रही है। उन्होंने कहा, 'यदि सरकार की प्राथमिकता रोज़गार होती, तो लगातार भर्ती परीक्षाएँ रद्द नहीं होतीं।' उन्होंने यह भी कहा कि लगातार परीक्षाएँ निरस्त होने और बेरोज़गारी बढ़ने से युवाओं में मानसिक तनाव बढ़ा है और कई अभ्यर्थियों ने निराशा में आत्महत्या तक कर ली।
आरक्षण और सामाजिक न्याय पर सवाल
अखिलेश यादव ने संविदा भर्ती व्यवस्था को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि स्थायी नौकरियों के बजाय संविदा प्रणाली लागू कर आरक्षण व्यवस्था को कमज़ोर किया जा रहा है। 69 हजार शिक्षक भर्ती का उल्लेख करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें आरक्षण के साथ अन्याय हुआ और संविदा व्यवस्था के ज़रिए सामाजिक न्याय पर चोट पहुँचाई जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि भर्ती प्रक्रियाओं में आरक्षण की अनदेखी, छात्रवृत्ति में देरी और बढ़ती फीस के कारण गरीब परिवारों के बच्चे पढ़ाई बीच में छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं।
सपा का संकल्प और आगे की राह
अखिलेश यादव ने कहा कि नौकरी न मिलने का सबसे अधिक असर बेटियों पर पड़ता है — सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बड़ी संख्या में छात्राओं की पढ़ाई बीच में छूट जाती है। उन्होंने घोषणा की कि समाजवादी पार्टी शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी एवं मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उनके शब्दों में: 'शिक्षा अच्छी होगी, परीक्षा अच्छी होगी, तो तरक्की पक्की होगी।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोप पूरे देश में राजनीतिक बहस का केंद्र बने हुए हैं।