29 जून 2026
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सिद्धार्थ नाथ सिंह का अखिलेश पर पलटवार: पेपर लीक, राम मंदिर चढ़ावा और जाति राजनीति पर सीधे सवाल

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सिद्धार्थ नाथ सिंह का अखिलेश पर पलटवार: पेपर लीक, राम मंदिर चढ़ावा और जाति राजनीति पर सीधे सवाल

सारांश

BJP नेता सिद्धार्थ नाथ सिंह ने प्रयागराज में अखिलेश यादव पर चौतरफा हमला बोला — 2014-15 के पेपर लीक में सपा सरकार की निष्क्रियता, राम मंदिर एसआईटी पर विरोधाभासी रुख और पीडीए को 'एक जाति की राजनीति' बताते हुए सीधे सवाल दागे।

मुख्य बातें

BJP नेता सिद्धार्थ नाथ सिंह ने 28 जून 2026 को प्रयागराज में अखिलेश यादव के बयानों पर कड़ा पलटवार किया।
उन्होंने 2014 के यूपी प्री मेडिकल परीक्षा घोटाले और 2015 के यूपी पीसीएस पेपर लीक में सपा सरकार द्वारा एसआईटी न बनाने का आरोप लगाया।
राम मंदिर चढ़ावा मामले में 8 गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं और 2 लोगों ने इस्तीफा दिया है; कार्रवाई ट्रस्ट की शिकायत पर आधारित है।
सिंह ने पीडीए को 'एक विशेष जाति तक सीमित वोट बैंक राजनीति' बताया और सपा पर सवर्ण व अन्य पिछड़े वर्गों की अनदेखी का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि 2014 से सपा की 'साइकिल का टायर फुस्स' हो चुका है और पार्टी राजनीतिक ठहराव में है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता सिद्धार्थ नाथ सिंह ने 28 जून 2026 को प्रयागराज में समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के हालिया बयानों पर कड़ा पलटवार किया। सिंह ने अखिलेश यादव पर जाति-आधारित राजनीति करने और अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल की विफलताओं को नज़रअंदाज़ करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि जिन मुद्दों पर आज सपा BJP को घेर रही है, उन्हीं पर अखिलेश यादव की सरकार खुद निष्क्रिय रही थी।

पेपर लीक पर पलटवार

पेपर लीक के मुद्दे पर अखिलेश यादव के बयान का जवाब देते हुए सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि किसी भी नेता की विश्वसनीयता उसके कार्यों से तय होती है, बयानों से नहीं। उन्होंने अखिलेश यादव को याद दिलाया कि वर्ष 2014 में हुए यूपी प्री मेडिकल परीक्षा घोटाले और 2015 के यूपी पीसीएस पेपर लीक मामले में उनकी सरकार ने कोई एसआईटी नहीं बनाई। सिंह के अनुसार, केवल हाई-लेवल कमेटियाँ गठित की गईं और उनकी रिपोर्टें आज तक सार्वजनिक नहीं हुईं।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब पूरा प्रशासनिक तंत्र अखिलेश यादव के नियंत्रण में था, तब दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। सिंह ने दावा किया कि उन मामलों में समाजवादी पार्टी से जुड़े लोग और एक विशेष वर्ग के लाभार्थी शामिल थे — हालाँकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर BJP का रुख

राम मंदिर चंदा चोरी मामले पर अखिलेश यादव के बयान को लेकर सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि यह विरोधाभासी स्थिति है — सपा ने पहले एसआईटी जाँच की माँग की, और अब जब एसआईटी गठित हो गई और कार्रवाई शुरू हुई, तो उसी पर सवाल उठाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और दो लोगों ने नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए इस्तीफा दिया है।

सिंह ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई ट्रस्ट की शिकायत के आधार पर हो रही है, न कि सरकारी हस्तक्षेप से। उन्होंने कहा कि तथ्यों की जानकारी लिए बिना दिए गए बयान अंततः बयान देने वाले पर ही भारी पड़ते हैं।

जाति राजनीति और पीडीए पर निशाना

BJP पर 'डोनेशन फर्स्ट' की राजनीति के आरोप पर पलटवार करते हुए सिंह ने कहा कि सपा की राजनीति वास्तव में पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के नाम पर एक विशेष जाति और वोट बैंक तक सिमटी हुई है। उनका दावा था कि सपा के शीर्ष पदों और उसके सांसदों-विधायकों में एक ही समुदाय का वर्चस्व है, जबकि अन्य पिछड़े वर्गों को अनदेखा किया गया है।

अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यदि अखिलेश यादव वास्तव में सभी अल्पसंख्यकों की बात करते हैं, तो उन्हें केवल एक समुदाय तक सीमित नहीं रहना चाहिए। आलोचकों का कहना है कि सपा की राजनीति समाज को जातियों में विभाजित करती है और सवर्ण समाज को हाशिये पर रखती है।

साइकिल का टायर फुस्स — BJP का तंज

अखिलेश यादव द्वारा BJP का नाम बदलने की टिप्पणी पर सिंह ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि नाम बदलने से राजनीतिक हकीकत नहीं बदलती। उन्होंने दावा किया कि 2014 से समाजवादी पार्टी की 'साइकिल का टायर फुस्स हो चुका है' और अब उसमें हवा भरने वाला कोई नहीं बचा। सिंह के अनुसार, पार्टी जिस राजनीतिक ठहराव में है, उसका इलाज अब किसी के पास नहीं है।

आगे क्या

यह बयानबाज़ी ऐसे समय में आई है जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ पृष्ठभूमि में शुरू हो चुकी हैं और दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज़ हो रहा है। राम मंदिर चढ़ावा विवाद में एसआईटी की जाँच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में नए घटनाक्रम सामने आ सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह दोनों दलों की एक साझा कमज़ोरी उजागर करता है — दोनों ही पक्ष जवाबदेही से ज़्यादा आरोपों की राजनीति में व्यस्त हैं। 2014-15 के पेपर लीक पर सपा की निष्क्रियता का सवाल वैध है, लेकिन इससे मौजूदा पेपर लीक मामलों पर BJP की जवाबदेही कम नहीं होती। राम मंदिर चढ़ावा विवाद में एसआईटी गठन सकारात्मक कदम है, पर यह सवाल बना रहता है कि ट्रस्ट प्रशासन में पारदर्शिता की व्यवस्था पहले क्यों नहीं बनाई गई। जाति राजनीति पर BJP का तंज तब तक अधूरा है जब तक वह खुद अपने प्रतिनिधित्व के आँकड़े सार्वजनिक न करे।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिद्धार्थ नाथ सिंह ने अखिलेश यादव पर पेपर लीक को लेकर क्या आरोप लगाए?
सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री कार्यकाल में 2014 के यूपी प्री मेडिकल परीक्षा घोटाले और 2015 के यूपी पीसीएस पेपर लीक में कोई एसआईटी नहीं बनाई गई। केवल हाई-लेवल कमेटियाँ बनाई गईं जिनकी रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक नहीं हुई।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद में अब तक क्या कार्रवाई हुई है?
इस मामले में अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और 2 लोगों ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया है। BJP नेता सिद्धार्थ नाथ सिंह के अनुसार यह कार्रवाई ट्रस्ट की शिकायत के आधार पर हो रही है, न कि सरकारी दबाव से।
BJP ने सपा की पीडीए राजनीति पर क्या सवाल उठाए?
सिद्धार्थ नाथ सिंह ने दावा किया कि सपा की पीडीए राजनीति वास्तव में एक विशेष जाति और वोट बैंक तक सीमित है। उन्होंने कहा कि सपा के शीर्ष पदों और जनप्रतिनिधियों में एक ही समुदाय का वर्चस्व है, जबकि अन्य पिछड़े वर्गों और सवर्ण समाज को अनदेखा किया गया है।
अखिलेश यादव की BJP का नाम बदलने वाली टिप्पणी पर BJP ने क्या कहा?
सिद्धार्थ नाथ सिंह ने व्यंग्यात्मक अंदाज़ में कहा कि नाम बदलने से राजनीतिक हकीकत नहीं बदलती। उन्होंने दावा किया कि 2014 से सपा की 'साइकिल का टायर फुस्स हो चुका है' और पार्टी गहरे राजनीतिक ठहराव में है।
यह विवाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में क्यों अहम है?
यह बयानबाज़ी ऐसे समय में हो रही है जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि तैयार हो रही है। पेपर लीक, राम मंदिर और जाति प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे यूपी की राजनीति में संवेदनशील हैं और दोनों दल इन्हें चुनावी आख्यान में केंद्रीय बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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