सपा का केंद्र पर हमला: छात्रों पर लाठीचार्ज अलोकतांत्रिक, अखिलेश ने माँगा शिक्षा मंत्री का इस्तीफा
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) ने 21 जुलाई को केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए संसद परिसर और नई दिल्ली में सीजेपी के विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा की। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित कई सांसदों ने युवाओं की माँगों को जायज ठहराते हुए शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग दोहराई और सरकार से जवाबदेही सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
अखिलेश यादव का केंद्र पर सीधा वार
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपने सहयोगियों पर इस्तीफे का दबाव इसलिए नहीं बना पा रही, क्योंकि उसे डर है कि कहीं दबे हुए राज सामने न आ जाएँ। उन्होंने कहा कि आज़ादी के बाद किसी सरकार ने युवाओं के साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया होगा और लोकतंत्र में छात्रों की आवाज़ दबाना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
डिंपल यादव की माँग — शिक्षा मंत्री हटाए जाएँ
सपा सांसद डिंपल यादव ने कहा कि प्रदर्शन के लिए पहुँचे युवा सरकार को यह संदेश देना चाहते थे कि व्यवस्था उनके हितों की रक्षा करने में विफल हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। डिंपल यादव ने शिक्षा मंत्री को पद से हटाने की माँग दोहराते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार को बदलने का सबसे बड़ा माध्यम वोट है।
राम गोपाल यादव का सवाल — युवा अनशन पर क्यों?
सपा सांसद राम गोपाल यादव ने सवाल उठाया कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वास्तव में युवाओं के साथ हैं, तो फिर युवा अनशन पर क्यों बैठे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों पर पुलिस द्वारा किया गया कथित लाठीचार्ज निंदनीय है और शांतिपूर्ण विरोध एक लोकतांत्रिक अधिकार है, जिस पर बल प्रयोग उचित नहीं है।
अवधेश प्रसाद और वीरेंद्र सिंह की आवाज़
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि देशभर के लाखों बेरोज़गार युवा पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर अपनी आवाज़ उठाने दिल्ली पहुँचे थे, लेकिन उनकी समस्याएँ सुनने के बजाय उन पर लाठीचार्ज किया गया। उन्होंने राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले पर भी चर्चा की माँग करते हुए कहा कि दोषियों को बचाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और महात्मा गांधी ने जन आंदोलनों की अहमियत सिखाई है। उनके अनुसार छात्र इसलिए सड़कों पर उतरे क्योंकि उनकी बात नहीं सुनी जा रही थी। उन्होंने सरकार पर संवेदनशीलता न दिखाने का आरोप लगाते हुए माँग की कि युवाओं की समस्याओं का समाधान संवाद के माध्यम से हो और लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान सुनिश्चित किया जाए।
आगे क्या होगा
सपा के इस सामूहिक हमले के बाद विपक्ष का दबाव और तेज़ होने के संकेत हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पेपर लीक और बेरोज़गारी के मुद्दे पर छात्र आंदोलन देशभर में गति पकड़ रहे हैं। गौरतलब है कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग अब विपक्ष की साझा राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बनती दिख रही है।