रिजु दत्ता का ममता पर तंज: 'खुद काला कोट पहनकर सुप्रीम कोर्ट जातीं', नौशाद सिद्दीकी पर भी निशाना
सारांश
मुख्य बातें
डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस के नेता रिजु दत्ता ने 21 सितंबर 2026 को कोलकाता में एक के बाद एक कई राजनीतिक दलों और नेताओं पर तीखे प्रहार किए — जिनमें तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी, नौशाद सिद्दीकी, हुमायूं कबीर और भारतीय जनता पार्टी (BJP) शामिल रहीं। उन्होंने चुनाव चिह्न विवाद से लेकर एसआईआर प्रक्रिया, सड़कों के नाम बदले जाने और बिहार में महिला सुरक्षा तक कई मुद्दों पर सरकारों को कठघरे में खड़ा किया।
चुनाव चिह्न विवाद और नौशाद सिद्दीकी पर निशाना
नौशाद सिद्दीकी से जुड़े चुनाव चिह्न विवाद पर दत्ता ने स्पष्ट किया कि जब किसी पार्टी में केवल एक विधायक हो, तो चुनाव आयोग (ECI) की ओर से फ्री सिंबल आवंटित किया जाता है। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी को भी इसी नियम के अंतर्गत चुनाव चिह्न प्राप्त हुआ है। दत्ता ने कहा कि सिद्दीकी के पत्र लिखने के बाद उन्हें अलग चुनाव चिह्न दिया गया, और किसी भी टिप्पणी से पहले उन्हें आयोग के नियम-कायदे ठीक से पढ़ने चाहिए।
ममता बनर्जी पर 'फासीवादी एटीट्यूड' का आरोप
ममता बनर्जी के सर्वोच्च न्यायालय जाने के निर्णय पर दत्ता ने कहा कि उनके कानूनी प्रतिनिधि और स्थायी विधिक सलाहकार कल्याण बनर्जी चुनाव आयोग के प्रतिनिधिमंडल में दो बार शामिल हो चुके हैं। उन्होंने ममता बनर्जी के रवैये को 'फासीवादी एटीट्यूड' करार देते हुए कहा कि अदालत जाना उनका संवैधानिक अधिकार है। तंज कसते हुए दत्ता ने कहा, 'मुझे लगा था कि ममता बनर्जी खुद काला कोट पहनकर सुप्रीम कोर्ट जाएंगी।'
दत्ता ने यह भी दावा किया कि उपचुनाव संपन्न होने के पश्चात उनकी पार्टी पुनः चुनाव आयोग के समक्ष जाएगी और 'घास और जोड़ा फूल' चुनाव चिह्न की माँग करेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में यह चिह्न उन्हें मिल सकता है।
एसआईआर प्रक्रिया में खामियों पर सवाल
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया पर दत्ता ने गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश में बड़ी संख्या में लोगों के नाम 'डिस्प्यूट लिस्ट' में हैं और उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय से अपील की कि जब तक यह प्रक्रिया पूरी न हो जाए, ऐसे नागरिकों को मतदान के अधिकार और सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न किया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी विवादित स्थिति के चलते गरीब लोगों को सरकारी सुविधाओं से बाहर करना न्यायसंगत नहीं होगा।
हुमायूं कबीर और कांग्रेस पर प्रहार
दत्ता ने हुमायूं कबीर पर सवाल उठाया कि वे अपने बेटे के लिए चुनाव प्रचार क्यों नहीं कर रहे। उन्होंने कबीर पर रेजीनगर के लोगों को गुमराह करने और मस्जिद के नाम पर प्राप्त चंदे के कथित दुरुपयोग का भी गंभीर आरोप लगाया। दत्ता ने कहा कि दूसरों पर उंगली उठाने से पहले कबीर को अपने बेटे के लिए खुलकर प्रचार करना चाहिए।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी पर दत्ता ने कहा कि जिस प्रत्याशी के खिलाफ हत्या का मामला लंबित हो और जिसे जमानत न मिली हो, उसे चुनावी मैदान में उतारने से पहले पार्टी को सोच-विचार करना चाहिए था। उन्होंने चेताया कि जब विपक्ष स्वयं ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न करता है, तो BJP को राजनीतिक लाभ उठाने का अवसर मिल जाता है।
सड़कों के नाम और बिहार की घटना पर टिप्पणी
कोलकाता में सड़कों के नाम बदले जाने के विषय पर दत्ता ने कहा कि नई सरकार को पहले बंगाल की जनता से किए गए वादे पूरे करने चाहिए। उन्होंने कहा कि सड़कों और स्टेशनों का नामकरण बदलना प्राथमिकता की सूची में नहीं है। लेनिन सरनी के नाम पर बहस संभव है, लेकिन विश्व बांग्ला सरनी का नाम बदलकर श्री चैतन्य महाप्रभु सरनी करने की जल्दबाज़ी उन्हें समझ में नहीं आती।
बिहार से सामने आए वायरल वीडियो को दत्ता ने जघन्य बताया और BJP तथा बिहार सरकार को महिला सुरक्षा के मुद्दे पर घेरा। उन्होंने कहा कि किसी भी सभ्य समाज में ऐसी घटना स्वीकार्य नहीं है। दत्ता ने माँग की कि इस घटना से जुड़े सभी दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।
आने वाले दिनों में उपचुनाव के संदर्भ में दत्ता के ये बयान पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल पैदा करने वाले हैं।