ममता पर हमले पर पूर्व TMC नेता रिजु दत्ता बोले — '15 साल का गुस्सा है, कर्म लौटकर आता है'
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पूर्व प्रवक्ता रिजु दत्ता ने 10 अगस्त 2026 को कोलकाता में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हुए हमले को लेकर तीखी और दोधारी प्रतिक्रिया दी — एक ओर उन्होंने घटना की आलोचना की, तो दूसरी ओर इसे TMC के 15 साल के शासनकाल में हुई राजनीतिक हिंसा का प्रतिफल बताया।
मुख्य बयान: 'सभ्य समाज में यह नहीं होना चाहिए'
रिजु दत्ता ने कहा, 'अगर तीन बार की मुख्यमंत्री सड़कों पर निकलती हैं, तो उन्हें सुरक्षा देना सरकार की जिम्मेदारी है। उनके साथ जो घटनाएँ हुई हैं, वैसी घटनाएँ किसी भी सभ्य समाज में नहीं होनी चाहिए।' उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस हमले का समर्थन नहीं करते, लेकिन इसके पीछे की पृष्ठभूमि को नज़रअंदाज़ भी नहीं किया जा सकता।
TMC शासनकाल की हिंसा का संदर्भ
दत्ता ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा पर पथराव, नेता दिलीप घोष पर हमले और कूचबिहार में तत्कालीन विपक्षी नेता सुवेंदु अधिकारी को जिंदा जलाने की कथित साजिश का उल्लेख किया — यह सब, उनके अनुसार, ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री कार्यकाल में हुआ था। उन्होंने कहा, 'हमेशा कर्म लौटकर आता है।'
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद राजनीतिक हिंसा और प्रतिशोध के आरोप दोनों पक्षों की ओर से लगातार सामने आ रहे हैं। गौरतलब है कि बंगाल में राजनीतिक हिंसा का इतिहास दशकों पुराना है।
सुरक्षा चूक पर सवाल
वर्तमान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के हवाले से दत्ता ने कहा कि ममता बनर्जी के पास 'जेड प्लस' सुरक्षा उपलब्ध है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि वे बिना पुलिस को सूचित किए बाहर निकलीं, तो इस सुरक्षा चूक की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि एक पूर्व महिला मुख्यमंत्री को पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
सुमित रॉय और CID जाँच
दत्ता ने अभिषेक बनर्जी के पूर्व पीए सुमित रॉय से CID की पूछताछ पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि सुमित रॉय के खिलाफ कई एफआईआर दर्ज हैं, जिनमें जबरन वसूली, सरकारी ज़मीन बेचने, नौकरी बेचने और डरा-धमकाकर पैसे ऐंठने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह जाँच सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर चल रही है।
दत्ता के अनुसार, सुमित रॉय इसलिए 'बेहद अहम' व्यक्ति हैं क्योंकि उनके पास दार्जिलिंग से लेकर डायमंड हार्बर तक, TMC के 15 साल के शासनकाल में हुए कथित भ्रष्टाचार का पूरा रिकॉर्ड होने की बात कही जा रही है।
आगे क्या
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार जाँच जारी रहेगी और पुलिस के बुलावे पर सुमित रॉय को पेश होना होगा। ममता बनर्जी पर हुए हमले की जाँच और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा भी राजनीतिक तौर पर केंद्र में बनी रहेगी।