अभिषेक बनर्जी पर हमला: भाजपा नेताओं ने कहा — 'न्यूटन का तीसरा नियम' और 'कर्म का फल'
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कई नेताओं ने 30 मई को इस घटना पर बयान देते हुए इसे राज्य में बढ़ते जनाक्रोश का नतीजा बताया — हालाँकि साथ ही उन्होंने हिंसा का समर्थन करने से स्पष्ट इनकार भी किया।
भाजपा विधायकों की प्रतिक्रिया
भाजपा विधायक उमेश राय ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए न्यूटन के तीसरे नियम का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि पिछले 15 वर्षों में विपक्षी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट, काले झंडे दिखाने, अपमान और 'गो बैक' जैसे नारों की घटनाएँ सामने आती रही हैं। उनके अनुसार, इस राजनीतिक संस्कृति को बढ़ावा देने में TMC के वरिष्ठ नेताओं की भूमिका रही है और अब परिस्थितियाँ बदल गई हैं।
भाजपा विधायक संजय सिंह ने कहा कि चाहे इसे हमला कहें या जनता के गुस्से का प्रदर्शन, यह स्थानीय लोगों में मौजूद नाराजगी का परिणाम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी घटनाएँ निंदनीय हैं और BJP किसी भी प्रकार की हिंसा का समर्थन नहीं करती।
सांसद राहुल सिन्हा का बयान
भाजपा सांसद राहुल सिन्हा ने कहा कि TMC नेताओं के खिलाफ जनता में भारी आक्रोश है। उन्होंने दावा किया कि जब पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अदालत पहुँची थीं, तब लोगों और वकीलों द्वारा 'चोर-चोर' के नारे लगाए गए थे। सिन्हा ने कहा कि अभिषेक बनर्जी पर अंडे और चप्पल फेंके जाने की घटनाएँ यह दर्शाती हैं कि जनता के भीतर TMC नेतृत्व को लेकर कितना गुस्सा है।
कीया घोष का 'कर्म का फल' वाला बयान
भाजपा प्रवक्ता कीया घोष ने कहा कि पिछले 15 वर्षों में पश्चिम बंगाल की जनता ने TMC शासन के दौरान कई तरह के अत्याचार झेले हैं और अब उसी का जवाब मिल रहा है — उन्होंने इसे 'कर्म का फल' बताया। घोष ने अभया कांड का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय महिलाओं को लगा था कि राज्य में उनके सम्मान और सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है, इसीलिए वे सड़कों पर उतरी थीं। उन्होंने यह भी कहा कि 26 हज़ार शिक्षक भी अपनी माँगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
लखनऊ से भाजपा सांसद दिनेश शर्मा का रुख
लखनऊ में भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने कहा कि किसी के अत्याचारों के बावजूद कानून को हाथ में लेना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि BJP किसी भी तरह की हिंसा का समर्थन नहीं करती। हालाँकि उन्होंने आरोप लगाया कि TMC शासन के दौरान आम लोगों, माताओं और बहनों पर अत्याचार हुए हैं और कई लोगों की जान भी गई है — इसी वजह से जनता में नाराजगी बढ़ी है, लेकिन इसका समाधान हिंसा नहीं हो सकता।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की स्थिति
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में TMC और BJP के बीच राजनीतिक तनाव पहले से ही चरम पर है। गौरतलब है कि अभिषेक बनर्जी TMC में ममता बनर्जी के बाद सबसे प्रमुख चेहरा माने जाते हैं। इस घटना के बाद राज्य की राजनीति में नया मोड़ आने की संभावना है और आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी और तेज होने के आसार हैं।