5 अक्टूबर 2026
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केरल भाजपा का सवाल: पाँचवें प्रशासनिक सुधार आयोग की ज़रूरत क्यों, पिछले पर ₹10.79 करोड़ खर्च के बाद क्या बदला?

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केरल भाजपा का सवाल: पाँचवें प्रशासनिक सुधार आयोग की ज़रूरत क्यों, पिछले पर ₹10.79 करोड़ खर्च के बाद क्या बदला?

सारांश

केरल भाजपा ने पूछा — जब ₹10.79 करोड़ खर्च के बाद चौथे आयोग की 8 सिफारिशें अब भी ठंडे बस्ते में हैं, तो पाँचवाँ आयोग बनाने का क्या औचित्य है? IUML नेता एमके मुनीर को कैबिनेट दर्जे से UDF के भीतर भी बगावत के स्वर उठे हैं।

मुख्य बातें

केरल सरकार ने 1 अक्टूबर 2026 को पाँचवें प्रशासनिक सुधार आयोग का गठन किया; अध्यक्ष एमके मुनीर (IUML) को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया।
भाजपा नेता कुम्मनम राजशेखरन ने माँग की कि नए आयोग के औचित्य और अनुमानित खर्च का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक किया जाए।
चौथे आयोग पर 30 अप्रैल 2021 तक ₹10.79 करोड़ खर्च हुए; 13 रिपोर्टों में से केवल 5 लागू , 8 विचाराधीन ।
UDF संयोजक अदूर प्रकाश ने नाराज़गी जताई कि मुनीर की नियुक्ति से पहले उनसे परामर्श नहीं लिया गया।
चौथे आयोग का गठन अगस्त 2016 में हुआ था; अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन थे।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) की केरल इकाई ने 5 अक्टूबर 2026 को राज्य सरकार से तीखे सवाल पूछे हैं कि पाँचवें प्रशासनिक सुधार आयोग के गठन की ज़रूरत क्या है, जबकि चौथे आयोग की 13 में से 8 सिफारिशें अब भी विचाराधीन हैं और उस पर ₹10.79 करोड़ से अधिक सार्वजनिक धन खर्च हो चुका है। पार्टी ने मुख्यमंत्री वीडी सतीशन के नेतृत्व वाली सरकार से माँग की है कि नए आयोग पर व्यय का ब्यौरा सार्वजनिक किया जाए।

नए आयोग का गठन और विवाद

केरल सरकार ने 1 अक्टूबर 2026 को सरकारी आदेश के ज़रिए पाँचवें प्रशासनिक सुधार आयोग का औपचारिक गठन किया। इस आयोग की अध्यक्षता इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के नेता एमके मुनीर को सौंपी गई है, जिन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है। यह नियुक्ति सत्तारूढ़ यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के भीतर भी विवाद का कारण बन गई है।

UDF संयोजक अदूर प्रकाश ने सार्वजनिक रूप से नाराज़गी जताई है कि यह फैसला लेने से पहले उनसे परामर्श नहीं किया गया। यह ऐसे समय में आया है जब गठबंधन की आंतरिक एकजुटता पर पहले से सवाल उठ रहे हैं।

चौथे आयोग पर कितना खर्च, क्या मिला

भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य कुम्मनम राजशेखरन ने सोमवार को याद दिलाया कि चौथे प्रशासनिक सुधार आयोग का गठन अगस्त 2016 में पहले पिनाराई विजयन सरकार के दौरान हुआ था और इसके अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन थे।

तत्कालीन मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत आँकड़ों के अनुसार, 30 अप्रैल 2021 तक इस आयोग पर राज्य कोष से ₹10.79 करोड़ व्यय हो चुके थे। आयोग ने अपना कार्यकाल समाप्त होने से पहले 13 रिपोर्टें सरकार को सौंपीं।

केरल डेवलपमेंट रिपोर्ट 2026 के अनुसार, इन 13 रिपोर्टों में से केवल पाँच को मंजूरी देकर लागू किया जा सका है, जबकि शेष 8 सिफारिशें अभी भी विचाराधीन हैं। सिफारिशों की जाँच के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति भी गठित की गई थी।

भाजपा की मुख्य माँगें

कुम्मनम ने सरकार से माँग की कि प्रत्येक सिफारिश की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक की जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि पिछले आयोग पर व्यय से शासन व्यवस्था में ठोस क्या परिवर्तन आया। उन्होंने यह भी पूछा कि जब प्रशासनिक सुधार विभाग के पास पहले से ही सुधार प्रस्तावों की जाँच की व्यवस्था है, तो नए आयोग की आवश्यकता क्यों?

उन्होंने नए आयोग के अनुमानित खर्च — अध्यक्ष का वेतन और भत्ते, निजी कर्मचारी, कार्यालय सुविधाएँ, वाहन और यात्रा व्यय — का पूर्ण ब्यौरा सार्वजनिक करने की माँग भी रखी।

कुम्मनम ने कहा, 'फिर एक अध्यक्ष, फिर कैबिनेट रैंक, फिर स्टाफ, फिर ऑफिस, फिर गाड़ी, फिर यात्रा भत्ते और फिर जनता का पैसा।' उनका तर्क था कि असली प्रश्न यह नहीं कि कितने आयोग बने, बल्कि यह कि इन आयोगों से शासन में वास्तविक बदलाव क्या आया।

राजनीतिक संदर्भ

गौरतलब है कि एमके मुनीर को कैबिनेट मंत्री स्तर का दर्जा देने का निर्णय UDF के भीतर असमन्वय को उजागर करता है। यह पहली बार नहीं है जब गठबंधन सरकार में नियुक्तियों पर आंतरिक मतभेद सामने आए हों। आलोचकों का कहना है कि ऐसे आयोगों का गठन अक्सर राजनीतिक संतुलन साधने के लिए किया जाता है, न कि ठोस प्रशासनिक सुधार के लिए।

भाजपा की यह माँग केरल विधानसभा के आगामी सत्र से पहले आई है, जिससे यह मुद्दा विधानसभा में भी गूँज सकता है। राज्य सरकार ने अब तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

राजनीतिक नियुक्तियों का माध्यम अधिक बनते हैं। एमके मुनीर को कैबिनेट दर्जा देने पर UDF के भीतर से ही आपत्ति यह संकेत देती है कि यह निर्णय गठबंधन-प्रबंधन की ज़रूरत से प्रेरित है। असली जवाबदेही तब होती जब चौथे आयोग की 8 लंबित सिफारिशों पर कार्रवाई रिपोर्ट पहले सार्वजनिक की जाती — जो नहीं हुई। बिना इस पारदर्शिता के, नए आयोग पर होने वाला व्यय महज एक और खर्चीला इशारा बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल का पाँचवाँ प्रशासनिक सुधार आयोग क्या है?
यह 1 अक्टूबर 2026 को सरकारी आदेश के ज़रिए गठित नया आयोग है, जिसकी अध्यक्षता IUML नेता एमके मुनीर को सौंपी गई है और उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है। यह केरल का पाँचवाँ ऐसा आयोग है, जिसे राज्य प्रशासन में सुधार की सिफारिशें देने का काम सौंपा गया है।
चौथे प्रशासनिक सुधार आयोग पर कितना पैसा खर्च हुआ और क्या हासिल हुआ?
तत्कालीन मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत आँकड़ों के अनुसार, 30 अप्रैल 2021 तक चौथे आयोग पर ₹10.79 करोड़ खर्च हुए। आयोग ने 13 रिपोर्टें सौंपीं, जिनमें से केवल 5 लागू हो सकीं और 8 अभी भी विचाराधीन हैं।
भाजपा ने नए आयोग पर क्या माँगें रखी हैं?
भाजपा के कुम्मनम राजशेखरन ने माँग की है कि सरकार प्रत्येक पुरानी सिफारिश की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक करे और नए आयोग पर होने वाले संभावित खर्च — वेतन, भत्ते, वाहन, कार्यालय — का पूरा ब्यौरा दे। उन्होंने यह भी पूछा कि जब प्रशासनिक सुधार विभाग पहले से इस काम के लिए सक्षम है, तो अलग आयोग की ज़रूरत क्यों?
UDF के भीतर इस आयोग को लेकर विवाद क्यों है?
UDF संयोजक अदूर प्रकाश ने सार्वजनिक रूप से नाराज़गी जताई है कि एमके मुनीर को कैबिनेट दर्जा देने का निर्णय उनसे परामर्श किए बिना लिया गया। यह मतभेद सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर समन्वय की कमी को उजागर करता है।
चौथे आयोग का गठन कब और किसकी अध्यक्षता में हुआ था?
चौथे प्रशासनिक सुधार आयोग का गठन अगस्त 2016 में पहली पिनाराई विजयन सरकार के कार्यकाल में हुआ था। इसके अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन थे और आयोग ने अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले 13 रिपोर्टें सौंपी थीं।
राष्ट्र प्रेस
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