नेपाल बाढ़ 2015 भूकंप के बाद दूसरी सबसे बड़ी तबाही — कोरस इंटरनेशनल ने अंतरराष्ट्रीय मदद की अपील की
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल में आई भीषण बाढ़ को 2015 के विनाशकारी भूकंप के बाद देश की दूसरी सबसे बड़ी प्राकृतिक त्रासदी करार दिया जा रहा है। कोरस इंटरनेशनल की मानवीय मामलों की प्रमुख अधिकारी तमारा डेमुरिया ने 28 अगस्त को प्रभावित इलाकों का दौरा करने के बाद गहरी चिंता व्यक्त की और भारत, अमेरिका समेत समूचे अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल राहत के लिए एकजुट होने की अपील की।
मुख्य घटनाक्रम
डेमुरिया ने बताया कि उन्होंने नदी के किनारे-किनारे उत्तर तक का दौरा कर नुकसान का जायजा लिया। उनके अनुसार, घर पूरी तरह बह गए हैं, सोलर पैनल पानी में डूब गए हैं और अनगिनत परिवारों की आजीविकाएं समाप्त हो गई हैं। फिलहाल हालात सामान्य होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे।
डेमुरिया ने कहा, 'यह शायद 2015 के बाद से दूसरी सबसे बड़ी तबाही है। इसका असर किसी भी मुमकिन संख्या से कहीं ज्यादा है। इस समय, जवाब देना और जिस भी तरह से हो सके मदद करना — चाहे वे पड़ोसी देश हों, अंतरराष्ट्रीय समुदाय हो या विदेश से सामान मंगाया जा रहा हो — इन समुदायों के लिए सबसे अच्छा यही है। कुछ परिवारों ने सब कुछ खो दिया है।'
प्रभावित इलाका और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की घटती उपस्थिति
गौरतलब है कि यह वही क्षेत्र है जहाँ 2015 के भूकंप के बाद कोरस इंटरनेशनल ने कमजोर समुदायों के पुनर्वास के लिए कार्यक्रम चलाए थे। डेमुरिया ने चिंता जताई कि उस दौर के बाद से इस इलाके में अंतरराष्ट्रीय संगठनों की मौजूदगी और सक्रियता में उल्लेखनीय कमी आई है, जिससे मौजूदा संकट में राहत कार्य और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है।
उन्होंने कहा, 'ऐतिहासिक रूप से यह वह इलाका है जहाँ हमने 2015 के भूकंप के बाद कमजोर समुदायों के लिए कार्यक्रम चलाए और उन्हें समर्थन दिया था। जाहिर है, उसके बाद से इस इलाके में अंतरराष्ट्रीय संगठनों की मौजूदगी या किसी तरह के काम में कमी आती गई है।'
अंतरराष्ट्रीय मदद की अपील
डेमुरिया ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह वह समय है जब भारत, अमेरिका और अन्य देशों को एक मानवीय समुदाय के तौर पर आगे आना चाहिए। उन्होंने दानदाताओं और सरकारों दोनों से तत्काल सहायता का आग्रह किया। यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल अभी भी 2015 के भूकंप से उबरने की प्रक्रिया में है और वहाँ की बुनियादी संरचना पहले से ही कमजोर बनी हुई है।
आम जनता पर असर
बाढ़ से प्रभावित परिवारों ने न केवल अपने घर, बल्कि अपनी आजीविका के साधन भी खो दिए हैं। सोलर पैनल जैसी वैकल्पिक ऊर्जा संरचनाएँ भी पानी में बह गई हैं, जो दर्शाता है कि नुकसान केवल भौतिक नहीं, बल्कि दीर्घकालिक आर्थिक भी है। राहत विशेषज्ञों के अनुसार, हालात सामान्य होने में लंबा वक्त लग सकता है।
क्या होगा आगे
कोरस इंटरनेशनल और अन्य मानवीय संगठन प्रभावित इलाकों में राहत कार्य तेज करने की कोशिश में हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया और नेपाल सरकार के राहत प्रयासों पर आने वाले दिनों में सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।