28 अगस्त 2026
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नेपाल बाढ़ 2015 भूकंप के बाद दूसरी सबसे बड़ी तबाही — कोरस इंटरनेशनल ने अंतरराष्ट्रीय मदद की अपील की

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नेपाल बाढ़ 2015 भूकंप के बाद दूसरी सबसे बड़ी तबाही — कोरस इंटरनेशनल ने अंतरराष्ट्रीय मदद की अपील की

सारांश

नेपाल में भीषण बाढ़ ने 2015 के भूकंप के बाद की सबसे बड़ी त्रासदी का रूप ले लिया है। कोरस इंटरनेशनल की तमारा डेमुरिया ने प्रभावित इलाकों का दौरा कर घरों, सोलर पैनलों और आजीविकाओं के विनाश का प्रत्यक्ष गवाह होने के बाद भारत और अमेरिका समेत पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल एकजुट होने की अपील की है।

मुख्य बातें

नेपाल बाढ़ को 2015 के भूकंप के बाद देश की दूसरी सबसे बड़ी प्राकृतिक त्रासदी बताया जा रहा है।
कोरस इंटरनेशनल की मानवीय मामलों की प्रमुख अधिकारी तमारा डेमुरिया ने 28 अगस्त को प्रभावित इलाकों का स्थलीय दौरा किया।
बाढ़ में घर, सोलर पैनल और आजीविकाएं तबाह; हालात सामान्य होने के कोई संकेत नहीं।
डेमुरिया ने भारत, अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय दानदाताओं से तत्काल राहत के लिए एकजुट होने की अपील की।
प्रभावित क्षेत्र में 2015 भूकंप के बाद से अंतरराष्ट्रीय संगठनों की उपस्थिति में उल्लेखनीय कमी आई है।

नेपाल में आई भीषण बाढ़ को 2015 के विनाशकारी भूकंप के बाद देश की दूसरी सबसे बड़ी प्राकृतिक त्रासदी करार दिया जा रहा है। कोरस इंटरनेशनल की मानवीय मामलों की प्रमुख अधिकारी तमारा डेमुरिया ने 28 अगस्त को प्रभावित इलाकों का दौरा करने के बाद गहरी चिंता व्यक्त की और भारत, अमेरिका समेत समूचे अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल राहत के लिए एकजुट होने की अपील की।

मुख्य घटनाक्रम

डेमुरिया ने बताया कि उन्होंने नदी के किनारे-किनारे उत्तर तक का दौरा कर नुकसान का जायजा लिया। उनके अनुसार, घर पूरी तरह बह गए हैं, सोलर पैनल पानी में डूब गए हैं और अनगिनत परिवारों की आजीविकाएं समाप्त हो गई हैं। फिलहाल हालात सामान्य होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे।

डेमुरिया ने कहा, 'यह शायद 2015 के बाद से दूसरी सबसे बड़ी तबाही है। इसका असर किसी भी मुमकिन संख्या से कहीं ज्यादा है। इस समय, जवाब देना और जिस भी तरह से हो सके मदद करना — चाहे वे पड़ोसी देश हों, अंतरराष्ट्रीय समुदाय हो या विदेश से सामान मंगाया जा रहा हो — इन समुदायों के लिए सबसे अच्छा यही है। कुछ परिवारों ने सब कुछ खो दिया है।'

प्रभावित इलाका और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की घटती उपस्थिति

गौरतलब है कि यह वही क्षेत्र है जहाँ 2015 के भूकंप के बाद कोरस इंटरनेशनल ने कमजोर समुदायों के पुनर्वास के लिए कार्यक्रम चलाए थे। डेमुरिया ने चिंता जताई कि उस दौर के बाद से इस इलाके में अंतरराष्ट्रीय संगठनों की मौजूदगी और सक्रियता में उल्लेखनीय कमी आई है, जिससे मौजूदा संकट में राहत कार्य और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है।

उन्होंने कहा, 'ऐतिहासिक रूप से यह वह इलाका है जहाँ हमने 2015 के भूकंप के बाद कमजोर समुदायों के लिए कार्यक्रम चलाए और उन्हें समर्थन दिया था। जाहिर है, उसके बाद से इस इलाके में अंतरराष्ट्रीय संगठनों की मौजूदगी या किसी तरह के काम में कमी आती गई है।'

अंतरराष्ट्रीय मदद की अपील

डेमुरिया ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह वह समय है जब भारत, अमेरिका और अन्य देशों को एक मानवीय समुदाय के तौर पर आगे आना चाहिए। उन्होंने दानदाताओं और सरकारों दोनों से तत्काल सहायता का आग्रह किया। यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल अभी भी 2015 के भूकंप से उबरने की प्रक्रिया में है और वहाँ की बुनियादी संरचना पहले से ही कमजोर बनी हुई है।

आम जनता पर असर

बाढ़ से प्रभावित परिवारों ने न केवल अपने घर, बल्कि अपनी आजीविका के साधन भी खो दिए हैं। सोलर पैनल जैसी वैकल्पिक ऊर्जा संरचनाएँ भी पानी में बह गई हैं, जो दर्शाता है कि नुकसान केवल भौतिक नहीं, बल्कि दीर्घकालिक आर्थिक भी है। राहत विशेषज्ञों के अनुसार, हालात सामान्य होने में लंबा वक्त लग सकता है।

क्या होगा आगे

कोरस इंटरनेशनल और अन्य मानवीय संगठन प्रभावित इलाकों में राहत कार्य तेज करने की कोशिश में हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया और नेपाल सरकार के राहत प्रयासों पर आने वाले दिनों में सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

वे आज दोहरी मार झेल रहे हैं। यह सवाल उठना लाजमी है कि अंतरराष्ट्रीय संगठनों की घटती उपस्थिति के पीछे क्या कारण हैं — फंडिंग की कमी, प्राथमिकताओं में बदलाव, या दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का अभाव। बिना स्थायी तंत्र के हर आपदा में नई अपीलें करना राहत को प्रतिक्रियात्मक बनाए रखता है, निवारक नहीं।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेपाल बाढ़ को 2015 के भूकंप के बाद दूसरी सबसे बड़ी त्रासदी क्यों कहा जा रहा है?
कोरस इंटरनेशनल की अधिकारी तमारा डेमुरिया ने प्रभावित इलाकों का दौरा करने के बाद इसे 2015 के भूकंप के बाद नेपाल की दूसरी सबसे बड़ी तबाही बताया है। उनके अनुसार, नुकसान का पैमाना किसी भी अनुमान से कहीं बड़ा है और कई परिवारों ने सब कुछ खो दिया है।
कोरस इंटरनेशनल कौन है और नेपाल में उसकी क्या भूमिका है?
कोरस इंटरनेशनल एक मानवीय सहायता संगठन है जिसने 2015 के भूकंप के बाद नेपाल के कमजोर समुदायों के लिए पुनर्वास कार्यक्रम चलाए थे। संगठन की मानवीय मामलों की प्रमुख अधिकारी तमारा डेमुरिया ने मौजूदा बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया और राहत की अपील की है।
नेपाल बाढ़ से कौन-कौन से नुकसान हुए हैं?
तमारा डेमुरिया के अनुसार, बाढ़ में घर बह गए हैं, सोलर पैनल पानी में डूब गए हैं और बड़ी संख्या में परिवारों की आजीविकाएं समाप्त हो गई हैं। फिलहाल हालात सामान्य होने के कोई आसार नहीं दिख रहे।
नेपाल बाढ़ राहत के लिए किन देशों से मदद माँगी गई है?
कोरस इंटरनेशनल की अधिकारी ने भारत, अमेरिका समेत पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय और दानदाताओं से तत्काल एकजुट होकर मदद करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों और विदेशी सहायता दोनों की इस समय सख्त जरूरत है।
नेपाल में अंतरराष्ट्रीय राहत संगठनों की उपस्थिति कम क्यों हुई?
तमारा डेमुरिया के अनुसार, 2015 के भूकंप के बाद से प्रभावित क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय संगठनों की सक्रियता धीरे-धीरे कम होती गई है। इससे मौजूदा बाढ़ आपदा में राहत कार्य और भी जटिल हो गया है।
राष्ट्र प्रेस
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