8 अगस्त 2026
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मुंबई: वॉचमैन मनोज यादव की हत्या में 5 गिरफ्तार, ढाई साल पुरानी लूट की साजिश का खुलासा

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मुंबई: वॉचमैन मनोज यादव की हत्या में 5 गिरफ्तार, ढाई साल पुरानी लूट की साजिश का खुलासा

सारांश

ढाई साल की सुनियोजित साजिश, डुप्लिकेट चाबी, और शराब में नशीला पदार्थ — मुंबई के विले पार्ले में एक कारोबारी परिवार को लूटने की कोशिश में वॉचमैन मनोज यादव की जान चली गई। जुहू पुलिस ने रसोइये से लेकर बॉलीवुड फिल्म निर्देशक के ड्राइवर तक 5 आरोपियों को दबोचा।

मुख्य बातें

जुहू पुलिस ने मुंबई के विले पार्ले स्थित अभिजीत रेजिडेंशियल बिल्डिंग में वॉचमैन मनोज यादव की हत्या में 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
साजिश के मास्टरमाइंड जोगेश्वर मलिक (रसोइया, बिहार के मधुबनी निवासी) ने ढाई साल पहले कारोबारी की अलमारी में कैश देखकर लूट की योजना बनाई।
सह-आरोपी विजय गोंजारे एक प्रसिद्ध बॉलीवुड फिल्म निर्देशक का ड्राइवर है।
1 अगस्त की रात वॉचमैन की शराब में नशीला पदार्थ मिलाकर पहले बेहोश किया, फिर गला दबाकर हत्या कर शव पानी की टंकी में छुपाया।
2 अगस्त सुबह 4.30 बजे डुप्लिकेट चाबी से फ्लैट खोलने की कोशिश नाकाम रही और आरोपी फरार हो गए।
लूट का 50% मलिक को और शेष 50% अन्य 4 आरोपियों में बाँटने की योजना थी।

मुंबई के विले पार्ले स्थित अभिजीत रेजिडेंशियल बिल्डिंग में नाइट ड्यूटी पर तैनात वॉचमैन मनोज यादव की हत्या के सिलसिले में जुहू पुलिस ने 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, यह महज एक चोरी की वारदात नहीं थी — बल्कि ढाई साल तक बुनी गई एक सुनियोजित साजिश थी, जिसमें एक कारोबारी परिवार की हत्या और लूट की योजना थी।

साजिश की जड़ें: रसोइये ने देखा था कैश, तभी रची थी योजना

साजिश का मास्टरमाइंड जोगेश्वर मलिक है, जो बिहार के मधुबनी का रहने वाला है और पिछले 10 वर्षों से उस कारोबारी के यहाँ रसोइये के रूप में काम कर रहा था। पुलिस के अनुसार, मलिक ने कारोबारी की अलमारी में रखा नकद और कीमती सामान देखा था और तभी से उसे हड़पने की योजना बनाने लगा था।

मलिक ने विजय गोंजारे को अपना साथी बनाया, जो एक प्रसिद्ध बॉलीवुड फिल्म निर्देशक का ड्राइवर है। दोनों पहले से एक-दूसरे को जानते थे — गोंजारे पहले जुहू की उसी बिल्डिंग में काम करता था जहाँ फिल्म निर्देशक और मलिक के नियोक्ता रहते थे, बाद में वह विले पार्ले (पश्चिम) शिफ्ट हो गया।

पकड़े जाने के डर से बंद की मोबाइल पर बात

पुलिस ने बताया कि दोनों आरोपियों ने पकड़े जाने के भय से 6 महीने पहले ही मोबाइल फोन पर बातचीत बंद कर दी थी। इसके बजाय वे हर रात करीब 9.30 बजे ड्यूटी खत्म होने के बाद जुहू में अलग-अलग स्थानों पर आमने-सामने मिलते थे। मलिक ने कारोबारी के फ्लैट की डुप्लिकेट चाबी भी बनवाई थी।

योजना के तहत मलिक ने गोंजारे को 3 और साथी जुटाने को कहा। यह तय हुआ था कि लूट का 50 प्रतिशत मलिक को मिलेगा और शेष 50 प्रतिशत बाकी चारों में बाँटा जाएगा।

वारदात की रात: शराब में मिलाया नशीला पदार्थ, फिर गला दबाया

वारदात से एक दिन पहले गोंजारे ने तीनों साथियों का परिचय वॉचमैन मनोज यादव से कराया और उनका भरोसा जीतने के लिए उन्हें ₹500 दिए। यह भी कहा कि वे अगले दिन पार्टी के लिए आएंगे।

1 अगस्त की रात चारों आरोपी बिल्डिंग में इकट्ठा हुए और मनोज यादव के साथ शराब पी। उनकी शराब में नशीला पदार्थ मिला दिया गया था, लेकिन जब उसका असर कम हुआ तो आरोपियों ने गला दबाकर मनोज यादव की हत्या कर दी। उनके हाथ पीछे बाँधकर शव को पानी की टंकी में डालकर ढक्कन बंद कर दिया गया।

2 अगस्त को सुबह 4.30 बजे गोंजारे और तीनों साथी छठी मंजिल पर पहुँचे और डुप्लिकेट चाबी से कारोबारी के फ्लैट का ताला खोलने की कोशिश की। ताला न खुलने पर सभी मौके से फरार हो गए। पुलिस के अनुसार, आरोपियों के पास हथौड़े भी थे, ताकि जरूरत पड़ने पर उनका इस्तेमाल किया जा सके।

हत्या का भंडाफोड़: रिलीव करने आए गार्ड ने देखा शव

2 अगस्त को जब रिलीव करने आए सिक्योरिटी गार्ड ने मनोज यादव का शव देखा, तब पुलिस को सूचना दी गई और हत्या का मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने बताया कि आरोपियों को लगा था कि वे बिना पकड़े वारदात को अंजाम दे देंगे, क्योंकि 10 मंजिला बिल्डिंग में केवल 3 परिवार रहते थे — पहली दो मंजिलों पर व्यावसायिक प्रतिष्ठान थे और अधिकांश आवासीय फ्लैट रीडेवलपमेंट परियोजना के चलते खाली थे।

जब पुलिस ने मलिक को हिरासत में लिया, तो उसके नियोक्ता उसके बचाव में आ गए। पुलिस के अनुसार, नियोक्ता को यह जानकारी ही नहीं थी कि साजिश असल में उनके पूरे परिवार की हत्या और लूट की थी।

आरोपियों का कबूलनामा और आगे की कार्रवाई

पुलिस के अनुसार, मलिक और गोंजारे दोनों ने ढाई साल से इस अपराध की योजना बनाने की बात कबूल की है। जुहू पुलिस ने सभी 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और आगे की जाँच जारी है। यह मामला इस बात की गंभीर चेतावनी है कि घरेलू कर्मचारियों की पृष्ठभूमि की जाँच और आवासीय सुरक्षा व्यवस्था को कितना मजबूत बनाने की आवश्यकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि घरेलू कर्मचारियों की पृष्ठभूमि जाँच की खामियों का आईना है — एक रसोइया 10 साल नौकरी करता रहा और ढाई साल तक नियोक्ता के पूरे परिवार की हत्या की योजना बनाता रहा। चौंकाने वाली बात यह है कि नियोक्ता खुद अंत तक उसके बचाव में खड़े थे। मुंबई जैसे महानगर में रीडेवलपमेंट के कारण खाली पड़ी बिल्डिंगों में सुरक्षा की कमी ने आरोपियों को यह भरोसा दिया कि वे बिना पकड़े निकल जाएंगे। यह घटना आवासीय सोसाइटियों को यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या एकल वॉचमैन की रात्रि ड्यूटी और पुरानी पड़ चुकी ताला-प्रणाली पर्याप्त सुरक्षा दे सकती है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुंबई विले पार्ले वॉचमैन हत्याकांड क्या है?
मुंबई के विले पार्ले स्थित अभिजीत रेजिडेंशियल बिल्डिंग में 1 अगस्त की रात नाइट ड्यूटी पर तैनात वॉचमैन मनोज यादव की हत्या कर दी गई। आरोपियों ने उनकी शराब में नशीला पदार्थ मिलाया और बाद में गला दबाकर जान ले ली, शव को पानी की टंकी में छुपा दिया।
इस हत्याकांड में कौन-कौन गिरफ्तार हुए हैं?
जुहू पुलिस ने कुल 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें साजिश का मास्टरमाइंड और कारोबारी का रसोइया जोगेश्वर मलिक (बिहार के मधुबनी का निवासी) और एक बॉलीवुड फिल्म निर्देशक का ड्राइवर विजय गोंजारे शामिल हैं।
साजिश कितने समय से चल रही थी?
पुलिस के अनुसार जोगेश्वर मलिक और विजय गोंजारे ने करीब ढाई साल पहले से इस लूट की योजना बनाई थी। मलिक ने कारोबारी की अलमारी में नकद और कीमती सामान देखकर साजिश रची और डुप्लिकेट चाबी भी बनवाई।
आरोपियों ने पकड़े जाने से बचने के लिए क्या तरीके अपनाए?
दोनों मुख्य आरोपियों ने 6 महीने पहले ही मोबाइल पर बात करना बंद कर दिया था। वे हर रात करीब 9.30 बजे जुहू में अलग-अलग जगहों पर आमने-सामने मिलते थे। वारदात से एक दिन पहले वॉचमैन को ₹500 देकर उनका भरोसा जीता गया।
क्या लूट की वारदात सफल हो पाई?
नहीं। 2 अगस्त को सुबह 4.30 बजे आरोपियों ने डुप्लिकेट चाबी से छठी मंजिल पर कारोबारी का फ्लैट खोलने की कोशिश की, लेकिन ताला नहीं खुला और सभी मौके से भाग गए। उसी सुबह रिलीव करने आए गार्ड ने शव देखकर पुलिस को सूचित किया।
राष्ट्र प्रेस
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