मां की हत्या कर लूट का नाटक रचा, पूर्वी चंपारण में बेटा 12 घंटे में गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
पूर्वी चंपारण जिले के हरसिद्धि थाना क्षेत्र में 20 अगस्त 2026 को पुलिस ने एक सनसनीखेज मातृहत्या मामले का महज 12 घंटे के भीतर पर्दाफाश करते हुए आरोपी बेटे आलम हुसैन को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने अपनी माँ नजमा खातून की डैगर से हत्या कर ₹45,000 लूटे और घटना को चार अज्ञात अपराधियों द्वारा अपहरण-लूट की झूठी कहानी से ढकने की कोशिश की।
घटनाक्रम: कैसे रची गई झूठी कहानी
पुलिस के मुताबिक, 18 अगस्त को नजमा खातून अपने बेटे आलम हुसैन के साथ अरेराज बैंक से ₹45,000 निकालकर मोटरसाइकिल से घर लौट रही थीं। 19 अगस्त को मृतका के पति झुमन मियां ने हरसिद्धि थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई कि खोरी-पाकर चिमनी के पास चार अपराधियों ने उन्हें रोककर मारपीट की और नजमा को रुपयों सहित उठाकर ले गए। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर तत्काल विशेष जाँच टीम गठित की।
जाँच में कैसे खुली पोल
पुलिस अधीक्षक, मोतिहारी के निर्देश पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO), अरेराज के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने आलम हुसैन के बयानों में लगातार विरोधाभास पाए। इसके बाद घटनास्थल की ओर जाने वाले मार्गों पर लगे सीसीटीवी कैमरों का फुटेज खंगाला गया। फुटेज में माँ-बेटे सेवराहा की ओर से आते दिखे, परंतु उनके पीछे किसी संदिग्ध की मौजूदगी नहीं मिली। इसके अलावा आलम हुसैन के शरीर पर गन्ने के पत्ते से कटने के निशान और उस दिन पहने कपड़ों पर खून के धब्बे मिले।
आरोपी का कबूलनामा
पुलिस के अनुसार, कड़ी पूछताछ में आलम हुसैन ने अपराध स्वीकार किया। उसने बताया कि उसने पहले से हत्या की योजना बनाई थी — अरेराज जाकर एक डैगर खरीदा और माँ के सेवराहा पहुँचने का इंतजार किया। इसके बाद उसने माँ को मोटरसाइकिल पर बैठाकर खोरी-पाकर चिमनी के पास गन्ने के खेत में ले जाकर डैगर से हत्या कर दी। हत्या के बाद उसने रुपये लिए, डैगर खेत में फेंका और सड़क पर लेटकर रोते हुए ग्रामीणों को चार अपराधियों की झूठी कहानी सुनाई।
बरामदगी और कानूनी कार्रवाई
पुलिस ने आरोपी के घर से छिपाकर रखे गए रुपयों सहित कुल ₹89,650, खून लगा डैगर, माँ-बेटे के दो जोड़ी चप्पल, खून एवं मिट्टी लगे कपड़े तथा एक मोबाइल फोन बरामद किया। SDPO अरेराज रवि कुमार ने बताया कि वैज्ञानिक और तकनीकी तरीकों से जाँच करते हुए महज 12 घंटे में मामले का उद्भेदन किया गया। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि अपराध को छिपाने के लिए रचे गए झूठ अक्सर तकनीकी जाँच और सीसीटीवी फुटेज के सामने टिक नहीं पाते।