चीन के 51 विश्व भू-उद्यान: यूनेस्को ने बताया वैश्विक नेटवर्क में सबसे आगे
सारांश
Key Takeaways
- यूनेस्को ने 24 अप्रैल 2025 को 12 नए विश्व भू-उद्यानों को वैश्विक नेटवर्क में शामिल किया।
- चीन के चच्यांग प्रांत का छांगशान और सछ्वान प्रांत का सिगुनियांगशान भूवैज्ञानिक पार्क नए सदस्य बने।
- चीन में अब कुल 51 यूनेस्को विश्व भू-उद्यान हैं — जो दुनिया में सर्वाधिक है।
- यूनेस्को निदेशक क्रिस्टॉफ वैनडेनबर्गे ने चीन को वैश्विक भू-उद्यान नेटवर्क का प्रमुख और परिपक्व देश बताया।
- चीन के भू-उद्यान मॉडल को लैटिन अमेरिका, यूरोप और एशिया के देश अपना रहे हैं।
- चीन भू-उद्यानों को ग्रामीण विकास और पर्यटन से जोड़कर स्थानीय समुदायों को आर्थिक और सामाजिक लाभ दे रहा है।
बीजिंग, 24 अप्रैल 2025: यूनेस्को ने गुरुवार को 12 नए विश्व भू-उद्यानों को अपने वैश्विक नेटवर्क में शामिल करने की आधिकारिक घोषणा की, जिसमें चीन के दो प्रमुख भूवैज्ञानिक पार्क भी शामिल हैं। इस घोषणा के साथ ही चीन में विश्व भू-उद्यानों की कुल संख्या 51 हो गई है — जो पूरी दुनिया में किसी भी देश से सबसे अधिक है। यूनेस्को के शीर्ष अधिकारी ने स्पष्ट कहा कि चीन वैश्विक भू-उद्यान नेटवर्क में एक प्रमुख और अग्रणी देश के रूप में उभरा है।
यूनेस्को अधिकारी का बयान और चीन की तारीफ
यूनेस्को के पृथ्वी विज्ञान एवं भू-उद्यान प्रभाग के निदेशक क्रिस्टॉफ वैनडेनबर्गे ने सिन्हुआ समाचार एजेंसी को दिए एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि चीन ने एक अपेक्षाकृत परिपक्व और सुव्यवस्थित भू-उद्यान प्रणाली विकसित कर ली है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दुनिया के कई देश अब इस क्षेत्र में चीन के मॉडल से प्रेरणा ले रहे हैं।
वैनडेनबर्गे ने यह भी कहा कि चीन भू-उद्यानों को ग्रामीण विकास के एक प्रभावी साधन के रूप में उपयोग करता है। दूरदराज और पिछड़े क्षेत्रों में इन पार्कों के माध्यम से पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे स्थानीय समुदायों में आत्मगर्व, जिम्मेदारी की भावना और ठोस आर्थिक लाभ दोनों उत्पन्न हुए हैं।
चीनी विशेषज्ञों की वैश्विक भूमिका
यूनेस्को नियमित रूप से विश्व भू-उद्यानों के पुनर्मूल्यांकन के लिए विशेषज्ञ दल भेजता है। वैनडेनबर्गे ने बताया कि इन दलों में बड़ी संख्या में चीनी विशेषज्ञ शामिल होते हैं, जो लैटिन अमेरिका, यूरोप और एशिया के देशों में अपने मॉडल, अवधारणाएं और व्यावसायिक अनुभव साझा कर रहे हैं। इस प्रकार चीन न केवल भू-उद्यानों की संख्या में बल्कि वैश्विक ज्ञान-प्रसार में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
नए शामिल भू-उद्यान और कुल संख्या
यूनेस्को द्वारा इस बार स्वीकृत 12 नए भू-उद्यानों में चीन के दो पार्क विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं — चच्यांग प्रांत का छांगशान भूवैज्ञानिक पार्क और सछ्वान प्रांत का सिगुनियांगशान भूवैज्ञानिक पार्क। इन दोनों के शामिल होने के बाद चीन में कुल 51 यूनेस्को विश्व भू-उद्यान हो गए हैं।
तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो यह संख्या किसी भी अन्य देश से कहीं अधिक है। यूरोप और एशिया के कई देश मिलकर भी इस आंकड़े के करीब नहीं पहुंचते। यह उपलब्धि चीन की दीर्घकालिक भू-विरासत संरक्षण नीति और सरकारी निवेश का प्रत्यक्ष परिणाम है।
भू-उद्यान मॉडल का महत्व और वैश्विक प्रभाव
विश्व भू-उद्यान कार्यक्रम यूनेस्को की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य भूवैज्ञानिक विरासत का संरक्षण करते हुए स्थानीय समुदायों का सतत विकास सुनिश्चित करना है। चीन ने इस अवधारणा को न केवल अपनाया बल्कि इसे ग्रामीण पुनरुद्धार के एक व्यापक उपकरण में बदल दिया।
गौरतलब है कि जब दुनिया के कई देश पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाने में संघर्ष कर रहे हैं, तब चीन का यह मॉडल एक व्यावहारिक विकल्प के रूप में उभरकर सामने आया है। भारत सहित कई विकासशील देश इस मॉडल से सबक ले सकते हैं, जहां भूवैज्ञानिक पर्यटन अभी भी अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुंचा है।
आने वाले वर्षों में यूनेस्को के अगले मूल्यांकन चक्र में चीन की संख्या और बढ़ने की संभावना है, साथ ही अन्य देशों पर भी चीनी भू-उद्यान विशेषज्ञों का प्रभाव और गहरा होने का अनुमान है।
(साभार: चाइना मीडिया ग्रुप, बीजिंग)