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AAP में बड़ी टूट: राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल का इस्तीफा, तीनों भाजपा में शामिल

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AAP में बड़ी टूट: राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल का इस्तीफा, तीनों भाजपा में शामिल

सारांश

AAP को 24 अप्रैल को बड़ा झटका — राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने पार्टी छोड़ी और भाजपा में शामिल हुए। चड्ढा का दावा — राज्यसभा में AAP के दो-तिहाई सांसद उनके साथ। हरभजन सिंह और स्वाति मालीवाल भी इस समूह में शामिल बताए जा रहे हैं।

मुख्य बातें

राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने 24 अप्रैल 2025 को AAP से इस्तीफा दिया।
तीनों नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की घोषणा की।
राघव चड्ढा का दावा — AAP के राज्यसभा के 10 सांसदों में से दो-तिहाई से अधिक उनके साथ हैं।
इस समूह में हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल के भी शामिल होने का दावा।
सभी हस्ताक्षरित दस्तावेज राज्यसभा के सभापति को सौंपे गए।
यह टूट फरवरी 2025 में दिल्ली विधानसभा चुनाव में AAP की हार के बाद बढ़ते आंतरिक संकट की परिणति है।

नई दिल्ली, 24 अप्रैल: आम आदमी पार्टी (AAP) को शुक्रवार को उस वक्त बड़ा राजनीतिक झटका लगा जब राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने संदीप पाठक और अशोक मित्तल के साथ मिलकर पार्टी से इस्तीफे का ऐलान किया। तीनों नेताओं ने एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की घोषणा भी की। यह टूट ऐसे समय में आई है जब AAP पहले से ही दिल्ली विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद कमजोर स्थिति में है।

राघव चड्ढा ने क्यों छोड़ी पार्टी?

राघव चड्ढा ने पार्टी छोड़ने के फैसले को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि AAP अपने मूल सिद्धांतों से पूरी तरह भटक गई है। उनके शब्दों में, "जिस पार्टी को मैंने 15 वर्षों तक अपने खून-पसीने से सींचा, वह अब देशहित के बजाय निजी स्वार्थों के लिए काम कर रही है।"

चड्ढा ने यह भी स्वीकार किया कि पिछले कुछ समय से उन्हें महसूस हो रहा था कि वे "गलत पार्टी में सही व्यक्ति" हैं। दिल्ली और पंजाब में पार्टी को मजबूत करने के लिए नेताओं ने जो कठिन परिश्रम किया, उसका अब कोई मूल्य नहीं रहा — यही उनकी पीड़ा का केंद्र था।

भाजपा में शामिल होने की वजह

राघव चड्ढा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में केंद्र सरकार ने वे निर्णय लिए जिन्हें लेने से पहले कई नेता डरते थे। उन्होंने कहा, "जनता ने इस नेतृत्व पर तीन बार मुहर लगाई है और अब हम भी उसी नेतृत्व में देश के लिए काम करेंगे।"

यह बयान राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है क्योंकि चड्ढा कभी AAP के सबसे मुखर प्रवक्ताओं में से एक माने जाते थे और अरविंद केजरीवाल के करीबी सहयोगी रहे हैं।

राज्यसभा में AAP की ताकत पर असर

राघव चड्ढा ने दावा किया कि राज्यसभा में AAP के 10 सांसदों में से दो-तिहाई से अधिक इस मुहिम में उनके साथ हैं। उन्होंने बताया कि सभी आवश्यक दस्तावेज और हस्ताक्षरित पत्र राज्यसभा के सभापति को सौंप दिए गए हैं।

इस समूह में विश्व-स्तरीय क्रिकेटर हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल के भी शामिल होने की बात कही गई है। यदि यह दावा सच साबित होता है, तो दल-बदल विरोधी कानून के तहत इन सांसदों की सदस्यता सुरक्षित रह सकती है, क्योंकि दो-तिहाई बहुमत की शर्त पूरी होती है।

संदीप पाठक का भावुक बयान

संदीप पाठक ने इस मौके पर भावुक होते हुए कहा, "मैंने कभी नहीं सोचा था कि ऐसा दिन आएगा। मैं एक किसान परिवार से आता हूं, कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई की और हमेशा देश के लिए सार्थक योगदान देने की चाहत रही।" उन्होंने AAP से अपने सभी संबंध समाप्त करने की औपचारिक घोषणा की।

राजनीतिक संदर्भ और व्यापक असर

गौरतलब है कि AAP ने फरवरी 2025 में दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा के हाथों बुरी तरह हार का सामना किया था। इसके बाद से पार्टी में आंतरिक असंतोष की खबरें लगातार आती रही हैं। स्वाति मालीवाल पहले ही केजरीवाल के खिलाफ सार्वजनिक रूप से मोर्चा खोल चुकी हैं।

यह टूट AAP के लिए सिर्फ संख्यात्मक नहीं बल्कि नैतिक संकट भी है। राघव चड्ढा जैसे वरिष्ठ और मीडिया-सक्रिय नेता का जाना पार्टी की राष्ट्रीय छवि को गहरी चोट पहुंचाएगा। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अरविंद केजरीवाल इस संकट का जवाब किस रणनीति से देते हैं और क्या AAP राज्यसभा में अपनी शेष उपस्थिति बचा पाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वे आज उसी 'व्यवस्था' की सबसे बड़ी पार्टी में शामिल हो रहे हैं। दल-बदल विरोधी कानून की तकनीकी शर्त पूरी करने के लिए दो-तिहाई बहुमत का दावा यह भी बताता है कि यह टूट सुनियोजित और रणनीतिक है, आकस्मिक नहीं। AAP के लिए असली खतरा संख्या का नहीं, विश्वसनीयता का है — और वह पहले से ही गहरे संकट में है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राघव चड्ढा ने AAP क्यों छोड़ी?
राघव चड्ढा ने कहा कि AAP अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है और अब देशहित की बजाय निजी स्वार्थों के लिए काम कर रही है। उन्होंने 15 वर्षों की मेहनत का हवाला देते हुए पार्टी से अलग होने का फैसला लिया।
AAP छोड़कर कौन-कौन से नेता भाजपा में शामिल हुए?
24 अप्रैल को राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने AAP छोड़कर भाजपा में शामिल होने की घोषणा की। इसके अलावा हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल का भी नाम इस समूह में बताया गया है।
क्या AAP के राज्यसभा सांसदों की सदस्यता खतरे में है?
दल-बदल विरोधी कानून के तहत यदि किसी दल के दो-तिहाई सांसद एक साथ अलग होते हैं तो उनकी सदस्यता सुरक्षित रहती है। राघव चड्ढा का दावा है कि AAP के 10 में से दो-तिहाई से अधिक सांसद उनके साथ हैं, जिससे उनकी सदस्यता बचने की संभावना है।
AAP में यह टूट क्यों हुई?
फरवरी 2025 में दिल्ली विधानसभा चुनाव में AAP की करारी हार के बाद से पार्टी में आंतरिक असंतोष बढ़ता रहा। स्वाति मालीवाल पहले ही केजरीवाल के खिलाफ मोर्चा खोल चुकी थीं और अब राघव चड्ढा जैसे वरिष्ठ नेताओं के जाने से यह संकट चरम पर पहुंच गया।
संदीप पाठक कौन हैं और उन्होंने क्या कहा?
संदीप पाठक AAP के राज्यसभा सांसद और पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि एक किसान परिवार से आने के बाद कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई की और हमेशा देश के लिए काम करने की चाहत रही, इसीलिए उन्होंने AAP से सभी संबंध समाप्त करने का निर्णय लिया।
राष्ट्र प्रेस
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