बिहार में बड़ा निवेश: मुजफ्फरपुर-किशनगंज में सीमेंट फैक्ट्री, हाजीपुर में देश का तीसरा NIFTEM

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बिहार में बड़ा निवेश: मुजफ्फरपुर-किशनगंज में सीमेंट फैक्ट्री, हाजीपुर में देश का तीसरा NIFTEM

सारांश

बिहार में पलायन रोकने की दिशा में बड़ा कदम — मुजफ्फरपुर और किशनगंज में डालमिया-अंबुजा सीमेंट की फैक्ट्रियाँ और हाजीपुर में 100 एकड़ में देश का तीसरा NIFTEM। CM सम्राट चौधरी ने कहा, उद्योग अब युवाओं के द्वार तक आ रहे हैं।

मुख्य बातें

SIPB की 67वीं बैठक में मुजफ्फरपुर और किशनगंज में डालमिया व अंबुजा सीमेंट की बड़ी इकाइयों को स्वीकृति मिली।
हाजीपुर (वैशाली जिला) में देश के तीसरे NIFTEM की स्थापना को मंजूरी; संस्थान 100 एकड़ में बनेगा।
कुल 16 परियोजनाओं को स्टेज-1 क्लीयरेंस और 4 परियोजनाओं को वित्तीय मंजूरी दी गई।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा — 'बिहार में औद्योगिक निवेश का नया अध्याय शुरू हो चुका है।' सरकार का लक्ष्य सीमांचल सहित पूरे बिहार में युवाओं के पलायन को रोकना और स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन करना है।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार, 16 मई को घोषणा की कि राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड (SIPB) की 67वीं बैठक में मुजफ्फरपुर और किशनगंज में डालमिया और अंबुजा सीमेंट की बड़ी इकाइयों को स्वीकृति दी गई है। साथ ही वैशाली जिले के हाजीपुर में देश के तीसरे राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी, उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (NIFTEM) की स्थापना को भी मंजूरी मिली है।

मुख्य घटनाक्रम

SIPB की 67वीं बैठक में कुल 16 परियोजनाओं को स्टेज-1 क्लीयरेंस और 4 परियोजनाओं को वित्तीय मंजूरी प्रदान की गई। मुजफ्फरपुर और किशनगंज में डालमिया और अंबुजा सीमेंट की इकाइयाँ सीमांचल क्षेत्र में औद्योगिक विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं।

मुख्यमंत्री चौधरी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'बिहार में औद्योगिक निवेश का नया अध्याय शुरू हो चुका है।' उन्होंने यह भी कहा, 'सीमांचल के युवाओं को अब रोजगार के लिए घर छोड़ने की जरूरत नहीं, उद्योग खुद उनके द्वार तक आ रहे हैं।'

हाजीपुर में NIFTEM की स्थापना

हाजीपुर में स्थापित होने वाला NIFTEM देश का तीसरा ऐसा संस्थान होगा। यह संस्थान 100 एकड़ भूमि पर विकसित किया जाएगा। सरकार के अनुसार यह संस्थान खाद्य प्रसंस्करण, अनुसंधान, तकनीकी शिक्षा और उद्यमिता के क्षेत्र में नए अवसर सृजित करेगा।

यह ऐसे समय में आया है जब बिहार को परंपरागत रूप से श्रम-निर्यातक राज्य माना जाता रहा है, जहाँ से बड़ी संख्या में युवा रोजगार की तलाश में दिल्ली, मुंबई और अन्य राज्यों की ओर पलायन करते हैं।

आम जनता और युवाओं पर असर

सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के साकार होने पर हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर स्थानीय स्तर पर ही मिलेंगे। गौरतलब है कि बिहार में पलायन की समस्या दशकों से एक बड़ी सामाजिक-आर्थिक चुनौती रही है।

किसानों के लिए भी NIFTEM से लाभ की उम्मीद जताई जा रही है, क्योंकि फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र में निवेश से कृषि उत्पादों की मूल्य श्रृंखला मजबूत होती है और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकता है।

सरकार का रुख और भविष्य की योजना

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, 'बिहार बदल रहा है, क्योंकि हमारा संकल्प अटल है — विकसित बिहार, समृद्ध बिहार।' राज्य सरकार का लक्ष्य बिहार को फूड प्रोसेसिंग का राष्ट्रीय केंद्र बनाना है।

एनडीए सरकार के इस औद्योगिक एजेंडे की असली परीक्षा परियोजनाओं के क्रियान्वयन और वास्तविक रोजगार सृजन के आँकड़ों में होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी — राज्य में पिछले कई वर्षों में निवेश की घोषणाएँ और ज़मीनी हकीकत के बीच अक्सर बड़ा अंतर देखा गया है। सीमेंट उद्योग पूंजी-गहन है और प्रत्यक्ष रोजगार सीमित होता है, इसलिए 'हजारों नौकरियों' के दावों को अप्रत्यक्ष रोजगार के संदर्भ में परखना जरूरी होगा। NIFTEM जैसे संस्थान दीर्घकालिक क्षमता-निर्माण के लिए महत्वपूर्ण हैं, पर उनका लाभ तत्काल नहीं, बल्कि वर्षों बाद दिखता है। बिहार के पलायन संकट का स्थायी समाधान घोषणाओं से नहीं, बल्कि निवेश की निरंतरता और पारदर्शी रोजगार लेखांकन से आएगा।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार में किन जिलों में सीमेंट फैक्ट्री खुलेगी और कौन सी कंपनियाँ हैं?
मुजफ्फरपुर में डालमिया सीमेंट और किशनगंज में अंबुजा सीमेंट की बड़ी इकाइयों को SIPB की 67वीं बैठक में मंजूरी दी गई है। ये दोनों देश की प्रमुख सीमेंट कंपनियाँ हैं।
हाजीपुर में बनने वाला NIFTEM क्या है?
NIFTEM यानी राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी, उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान एक केंद्रीय स्तर का शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थान है। हाजीपुर में बनने वाला NIFTEM देश का तीसरा ऐसा संस्थान होगा और यह 100 एकड़ भूमि पर विकसित किया जाएगा।
इन परियोजनाओं से बिहार के युवाओं को क्या फायदा होगा?
सरकार के अनुसार इन परियोजनाओं से हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर स्थानीय स्तर पर मिलेंगे, जिससे दिल्ली-मुंबई जैसे शहरों की ओर पलायन में कमी आ सकती है। NIFTEM किसानों, उद्यमियों और तकनीकी शिक्षा के इच्छुक युवाओं के लिए भी नए अवसर खोलेगा।
SIPB की 67वीं बैठक में कितनी परियोजनाओं को मंजूरी मिली?
इस बैठक में कुल 16 परियोजनाओं को स्टेज-1 क्लीयरेंस और 4 परियोजनाओं को वित्तीय मंजूरी प्रदान की गई, इसके अलावा मुजफ्फरपुर-किशनगंज सीमेंट इकाइयाँ और हाजीपुर NIFTEM भी स्वीकृत किए गए।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस घोषणा पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि 'बिहार में औद्योगिक निवेश का नया अध्याय शुरू हो चुका है' और 'सीमांचल के युवाओं को अब रोजगार के लिए घर छोड़ने की जरूरत नहीं, उद्योग खुद उनके द्वार तक आ रहे हैं।' उन्होंने 'विकसित बिहार, समृद्ध बिहार' के संकल्प को दोहराया।
राष्ट्र प्रेस
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