क्या आदिवासी नेता की हत्या के विरोध में झारखंड बंद का असर मिला-जुला रहा?
सारांश
Key Takeaways
- आदिवासी नेता सोमा मुंडा की हत्या ने गंभीर जन आक्रोश पैदा किया।
- झारखंड बंद का असर खूंटी, चाईबासा और रांची में अधिक था।
- प्रदर्शनकारियों ने सरकारी नौकरी और मुआवजे की मांग की।
- प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रयास किए।
- इस मामले में सात आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है।
रांची/खूंटी, 17 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आदिवासी नेता पड़हा राजा सोमा मुंडा की हत्या के खिलाफ आदिवासी संगठनों द्वारा आयोजित झारखंड बंद का शनिवार को राज्य भर में मिलाजुला असर देखने को मिला। सुबह से ही खूंटी, चाईबासा, रांची और आस-पास के क्षेत्रों में बंद के समर्थन में लोग सड़कों पर उतर आए, जिससे यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई।
कई प्रमुख मार्गों पर जाम की स्थिति बनी रही, जिससे आम यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सबसे अधिक असर जमशेदपुर-रांची राष्ट्रीय राजमार्ग पर देखा गया, जहां बुंडू टोल प्लाजा के पास प्रदर्शनकारियों के पहुंचने पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया। सुबह करीब 11 बजे बंद समर्थक वहां पहुंचे और धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिससे टोल प्लाजा के दोनों ओर हजारों वाहन जाम में फंस गए। यह जाम करीब पांच घंटे तक चला। जाम के दौरान एंबुलेंस और सेना के वाहनों को छोड़कर किसी भी वाहन को आगे नहीं बढ़ने दिया गया।
जाम की वजह से फंसे यात्रियों को पानी और भोजन के लिए काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, क्योंकि बुंडू नगर पंचायत क्षेत्र में अधिकांश दुकानें बंद रहीं। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार यात्रियों को विशेष परेशानी झेलनी पड़ी। दोपहर करीब 3.20 बजे प्रदर्शनकारियों के हटने के बाद यातायात सामान्य हो सका। बुंडू टोल प्लाजा पर स्थिति बिगड़ते ही प्रशासन हरकत में आया। बुंडू के एसडीएम क्रिस्टोफर कुमार बेसरा, डीएसपी ओमप्रकाश, थाना प्रभारी रामकुमार वर्मा और अंचल अधिकारी हंस हेंब्रम पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को लगातार समझाने का प्रयास किया।
करीब पांच घंटे की मशक्कत के बाद प्रदर्शनकारी जाम हटाने को राजी हुए। खूंटी जिला मुख्यालय में सुबह से ही बंद समर्थक सड़कों पर उतर आए और बाजार को बंद करा दिया। रांची में करमटोली चौक, रातू रोड और कई अन्य इलाकों में भी बंद समर्थकों ने जाम लगाया। प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन में प्रदर्शनकारियों ने सोमा मुंडा के परिजनों को सरकारी नौकरी, फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए दोषियों को सजा, और पांच करोड़ रुपए मुआवजा देने की मांग की।
एसडीएम ने बताया कि ज्ञापन में उठाई गई मांगों से राज्य सरकार को अवगत कराया जाएगा।
ज्ञातव्य है कि 7 जनवरी को खूंटी जिले के जमुवादाग इलाके में आदिवासी नेता सोमा मुंडा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना के विरोध में पहले भी 8 जनवरी को खूंटी बंद बुलाया गया था, जिसका व्यापक असर देखने को मिला था। पुलिस अब तक इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है और हत्या के पीछे भूमि विवाद को कारण बताया है।
हालांकि, आदिवासी संगठनों का आरोप है कि अब तक मुख्य शूटर और साजिशकर्ता की गिरफ्तारी न होना गंभीर सवाल खड़े करता है। आदिवासी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। वहीं, प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि मामले की जांच जारी है और दोषियों को जल्द न्याय के कटघरे में लाया जाएगा।