राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु: राम मंदिर है हमारी सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक
सारांश
Key Takeaways
- राम मंदिर: सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक।
- अयोध्या: धार्मिक पर्यटन का केंद्र।
- रामराज्य: आर्थिक और सामाजिक समरसता के आदर्श।
- नवरात्र: धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व।
- वसुधैव कुटुंबकम: एकता का भारतीय संदेश।
अयोध्या, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नवरात्र के पहले दिन अयोध्या में स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में आयोजित श्रीराम यंत्र प्रतिष्ठापना कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि राम मंदिर भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का एक पवित्र प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह मंदिर हमें हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के साथ जोड़ता है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने संबोधन में कहा कि उन्हें यह जानकर बहुत खुशी हुई है कि देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु अयोध्या आकर प्रभु श्रीराम के दर्शन कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि अयोध्या धाम अब धार्मिक पर्यटन का एक महत्वपूर्ण वैश्विक केंद्र बन गया है और यह मंदिर परिसर भारत की सनातन चेतना, ऊर्जा और पुनर्जागरण का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि भारत का पुनर्जागरण केवल सांस्कृतिक ही नहीं, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक सभी पहलुओं में हो रहा है। राष्ट्रपति ने जोर देते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम को नमन करना और भारत माता का वंदन करना एक ही भावना है। देवभक्ति और देशभक्ति का मार्ग अलग नहीं होता, बल्कि यह एक ही है। राष्ट्रपति ने रामराज्य की अवधारणा को रेखांकित करते हुए कहा कि यह आर्थिक समृद्धि और सामाजिक समरसता के सर्वोच्च आदर्शों को प्रस्तुत करता है।
उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास के रामायण में बताए गए आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रपति ने भगवान राम के जीवन से जुड़े प्रसंगों, जैसे माता शबरी से भावपूर्ण मिलन, निषादराज से स्नेह, जटायु के प्रति सम्मान, वानर सेना का सहयोग, जामवंत और यहां तक कि गिलहरी के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि ये सभी उदाहरण एक सर्वस्पर्शी और सर्वसमावेशी जीवन दर्शन को दर्शाते हैं।
उन्होंने कहा कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, जो नवरात्र का पहला दिन है, इस पावन अवसर पर अयोध्या आकर वह स्वयं को कृतार्थ अनुभव कर रही हैं। साथ ही उन्होंने देशवासियों को रामनवमी के अवसर पर अग्रिम शुभकामनाएं भी दीं। इस मौके पर आनंदीबेन पटेल ने कहा कि अयोध्या आस्था, संस्कार और विरासत की भूमि है और आज यह वैश्विक चेतना का केंद्र बन चुकी है।
उन्होंने कहा कि ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के भारतीय संदेश के कारण आज विश्व भारत की ओर आशा भरी दृष्टि से देख रहा है। राज्यपाल ने कहा कि भारत वह भूमि है जहां शक्ति का अर्थ सृजन, आस्था का अर्थ करुणा और धर्म का सार समाज को जोड़ना है। उन्होंने इस ऐतिहासिक अवसर को देशवासियों के लिए सदैव स्मरणीय बताया।