अयोध्या में 19 मार्च को श्रीराम यंत्र की प्रतिष्ठापन, राष्ट्रपति मुर्मु होंगी मुख्य अतिथि
सारांश
Key Takeaways
- श्रीराम यंत्र की स्थापना 19 मार्च को होगी।
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मुख्य अतिथि होंगी।
- यह कार्यक्रम चैत्र नवरात्र के पहले दिन हो रहा है।
- लगभग 7000 लोग इस समारोह में उपस्थित रहेंगे।
- सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं।
अयोध्या, १६ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। रामनगरी अयोध्या एक बार फिर ऐतिहासिक और आध्यात्मिक उत्सव का गवाह बनने जा रही है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में १९ मार्च को श्रीराम यंत्र की औपचारिक स्थापना की जाएगी, जिसमें भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगी।
यह कार्यक्रम चैत्र नवरात्र के पहले दिन, अर्थात् वर्ष प्रतिपदा के पावन अवसर पर आयोजित किया जा रहा है, जो हिंदू नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक है। उत्तर प्रदेश सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इस आयोजन को भव्य बनाने की पूरी योजना तैयार की है।
ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय ने बताया कि श्रीराम यंत्र दो वर्ष पूर्व जगद्गुरु शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वती महाराज द्वारा शोभायात्रा के माध्यम से अयोध्या भेजा गया था। यह यंत्र वैदिक गणित और ज्यामितीय आकृतियों पर आधारित है और इसे देवताओं का निवास मानते हैं, जो सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने की क्षमता रखता है। वर्तमान में इस यंत्र की राजा राम के समक्ष नियमित पूजा-अर्चना चल रही है।
१९ मार्च को यह यंत्र श्रीराम मंदिर के दूसरे तल पर स्थापित किया जाएगा। नौ दिवसीय वैदिक अनुष्ठान पहले से ही आरंभ हो चुके हैं, जिसमें दक्षिण भारत, काशी और अयोध्या के विद्वान आचार्य शामिल हैं। इस ऐतिहासिक समारोह में लगभग ७۰۰० लोग उपस्थित रहेंगे, जिनमें उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से ऐसे प्रमुख लोग भी शामिल होंगे जिन्होंने निर्माण कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु सुबह लगभग ११ बजे अयोध्या पहुंचेंगी। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उनका स्वागत करेंगे। राष्ट्रपति श्रीराम मंदिर परिसर में प्रवेश कर श्रीराम यंत्र की पूजा-अर्चना करेंगी। अभिजित मुहूर्त में ठीक ११:५५ बजे यंत्र की स्थापना का मुख्य अनुष्ठान संपन्न होगा। राष्ट्रपति इस पवित्र कार्य में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भाग लेंगी।
पूजन के बाद राष्ट्रपति प्रसाद ग्रहण करेंगी और भोजन के पश्चात वापस रवाना होंगी। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के लगभग ३०० संत और विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे। केरल की पूज्य माता अमृतानंदनमयी अपने एक हजार भक्तों के साथ ट्रेन से अयोध्या पहुंचेंगी। मंदिर निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले कई संभ्रांत व्यक्तियों को विशेष निमंत्रण भेजा गया है।
इनमें एलएंडटी, टाटा कंपनी के प्रतिनिधि, गुजरात के आर्किटेक्ट चंद्रकांत भाई का परिवार और परिसर के विकास में भूमिका निभाने वाले अन्य विशेषज्ञ शामिल हैं। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के अनुसार, पत्थर-लकड़ी-संगमरमर की नक्काशी करने वाले, स्तंभों पर मूर्तियां उकेरने वाले, भगवान की प्रतिमा बनाने वाले और वस्त्र तैयार करने वाली फर्मों के लगभग १८०० कार्यकर्ता भी आमंत्रित हैं।
आयोजन को सुचारु और सुरक्षित बनाने के लिए कड़े इंतजाम किए गए हैं। सभी अतिथियों को विशेष पास जारी किए जाएंगे, जिन पर क्यूआर कोड अंकित होगा। मंदिर परिसर में मोबाइल फोन, हथियार या कोई सुरक्षाकर्मी साथ ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। केवल सिख धर्म के अनुयायी ही कृपाण लेकर प्रवेश कर सकेंगे।
चूंकि यह चैत्र नवरात्र का पहला दिन है, अतः अतिथियों के लिए फलाहारी भोजन की विशेष व्यवस्था की गई है। सामान्य श्रद्धालुओं के लिए रामलला के दर्शन सामान्य रूप से जारी रहेंगे, यद्यपि कुछ समय के लिए समय-सारिणी में बदलाव संभव है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने इस कार्यक्रम को भव्य बनाने के लिए व्यापक रूपरेखा तैयार की है।
मंदिर परिसर की सफाई, सजावट और व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि राम मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले हजारों कार्यकर्ताओं को सम्मानित करने का भी अवसर प्रदान करेगा। अयोध्या में यह आयोजन पूरे देश के लिए आस्था और गौरव का क्षण साबित होगा।