राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अयोध्या में ‘श्रीराम यंत्र’ की स्थापना में लिया भाग
सारांश
Key Takeaways
- राष्ट्रपति मुर्मू ने ‘श्रीराम यंत्र’ की स्थापना में भाग लिया।
- रामनगरी में भक्ति और परंपरा का अद्भुत संगम।
- सुरक्षा व्यवस्था में विशेष बदलाव किए गए।
- दर्शन के लिए सभी पास रद्द किए गए।
- माता अमृतानंदमयी भी इस अवसर पर उपस्थित थीं।
अयोध्या, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। वासंतिक नवरात्र और हिंदी नववर्ष के पहले दिन अयोध्या धाम में आध्यात्मिक और ऐतिहासिक मिलन का दृश्य देखने को मिला, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राम मंदिर में ‘श्रीराम यंत्र’ की स्थापना के विशेष अनुष्ठान में भाग लिया। इस मौके पर रामनगरी का हर कोना भक्ति, सुरक्षा और परंपरा के रंग में रंगा हुआ नजर आया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सेना के विशेष विमान से अयोध्या में कदम रखा। यहाँ से वे कड़ी सुरक्षा के बीच सड़क मार्ग से राम मंदिर पहुंचीं, जहाँ उनका पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक भी मौजूद थे।
राष्ट्रपति ने ‘जगतगुरु आद्य शंकराचार्य द्वार’ से अयोध्या में प्रवेश किया और मंदिर परिसर का अवलोकन किया। इसके पश्चात उन्होंने परिसर में स्थित दुर्गा माता मंदिर में विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की। इस दौरान, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सुरक्षा और दर्शन की व्यवस्था में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए। ट्रस्ट के अनुसार, सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक सभी वीआईपी, सुगम और विशिष्ट दर्शन पास पूरी तरह से रद्द कर दिए गए।
19 मार्च के लिए ऑनलाइन जारी सभी पास भी रद्द कर दिए गए, जिससे श्रद्धालु केवल सामान्य व्यवस्था के तहत ही दर्शन कर सके। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि राष्ट्रपति मुर्मू ने मंदिर के द्वितीय तल पर स्थित गर्भगृह में ‘श्रीराम यंत्र’ की स्थापना के अनुष्ठान में भाग लिया। उन्होंने कहा कि यह यंत्र भगवान श्रीराम की दिव्य शक्ति, मर्यादा और धर्म की स्थापना का प्रतीक है, जिससे मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा और भी सुदृढ़ होगी।
यह मान्यता है कि ‘श्रीराम यंत्र’ की स्थापना से मंदिर की पवित्रता और प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। इससे अयोध्या धाम से धर्म, शांति और मर्यादा का संदेश और अधिक व्यापक रूप से फैलने में सहायता मिलेगी। इस विशेष अवसर पर केरल की आध्यात्मिक गुरु माता अमृतानंदमयी भी अपने लगभग एक हजार भक्तों के साथ अयोध्या पहुंचीं। कार्यक्रम में राम मंदिर निर्माण से जुड़े लगभग 2000 लोग और 1984 से राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे।