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दिल्ली में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी: मई 2025 से 6,115 ई-जीरो एफआईआर दर्ज, संसद में खुलासा

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दिल्ली में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी: मई 2025 से 6,115 ई-जीरो एफआईआर दर्ज, संसद में खुलासा

सारांश

दिल्ली में मई 2025 से साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के सबसे ज़्यादा — 6,115 — ई-जीरो एफआईआर दर्ज हुए हैं। 18 राज्यों ने यह प्रणाली अपनाई है, लेकिन असली सवाल यह है कि इनमें से कितने मामलों में पीड़ितों को न्याय और रकम वापस मिली।

मुख्य बातें

नई दिल्ली में मई 2025 से साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के 6,115 ई-जीरो एफआईआर दर्ज — देश में सर्वाधिक।
चंडीगढ़ दूसरे स्थान पर, 4,174 ई-जीरो एफआईआर के साथ।
18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने साइबर अपराध के लिए ई-जीरो एफआईआर प्रणाली अपनाई।
शिकायत एनसीआरपी पोर्टल या हेल्पलाइन 1930 पर दर्ज होने पर स्वतः ई-जीरो एफआईआर बनती है।
ई-जीरो एफआईआर को नियमित एफआईआर में बदलने के लिए पीड़ित को 3 दिनों के भीतर पुलिस स्टेशन जाना अनिवार्य।
गृह राज्य मंत्री बी.
संजय कुमार ने 28 जुलाई 2026 को लोकसभा में यह जानकारी दी।

केंद्र सरकार ने 28 जुलाई 2026 को लोकसभा में बताया कि मई 2025 से साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में नई दिल्ली सबसे आगे है — यहाँ 6,115 ई-जीरो एफआईआर दर्ज की गई हैं, जबकि चंडीगढ़ में यह संख्या 4,174 रही। गृह राज्य मंत्री बी. संजय कुमार ने एक सांसद के सवाल के जवाब में ये आँकड़े सदन के सामने रखे।

ई-जीरो एफआईआर प्रणाली क्या है

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 173(1) के तहत किसी भी संज्ञेय अपराध की सूचना मौखिक रूप से या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी को दी जा सकती है। इसी प्रावधान के आधार पर केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को साइबर अपराध मामलों में ई-जीरो एफआईआर दर्ज करने का एक समर्पित प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया है।

इस व्यवस्था के अंतर्गत नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) या हेल्पलाइन नंबर '1930' पर दर्ज शिकायतें — जिनमें संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश द्वारा निर्धारित वित्तीय नुकसान की सीमा पार हो — स्वतः ही ई-क्राइम पुलिस स्टेशन में ई-जीरो एफआईआर के रूप में दर्ज हो जाती हैं और तत्काल संबंधित साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन को हस्तांतरित कर दी जाती हैं।

राज्यवार आँकड़े

राज्य मंत्री द्वारा साझा किए गए आँकड़ों के अनुसार, अब तक 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने यह प्रणाली अपनाई है। उत्तराखंड में मार्च 2026 से 552 और गोवा में जनवरी 2026 से 446 ई-जीरो एफआईआर दर्ज हुई हैं। राजस्थान में जनवरी 2026 से 251, असम में जून 2026 से 223, और हरियाणा में जून 2026 से 165 मामले दर्ज किए गए हैं। महाराष्ट्र में 131, तमिलनाडु में 39 और बिहार में जुलाई 2026 से 12 मामले दर्ज हुए हैं।

शिकायतकर्ता को क्या करना होगा

मंत्री ने स्पष्ट किया कि ई-जीरो एफआईआर को नियमित एफआईआर में बदलवाने के लिए शिकायतकर्ता को तीन दिनों के भीतर संबंधित पुलिस स्टेशन में उपस्थित होना अनिवार्य है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के अंतर्गत 'पुलिस' और 'सार्वजनिक व्यवस्था' राज्य के विषय हैं, इसलिए एफआईआर को आगे बढ़ाना, चार्जशीट दाखिल करना, गिरफ्तारी और मामलों का निपटारा — ये सभी कार्य संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की कानून प्रवर्तन एजेंसियाँ ही करती हैं।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामले देशभर में तेज़ी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ई-जीरो एफआईआर प्रणाली से पीड़ितों की शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया सरल हुई है, परंतु प्रणाली की वास्तविक परीक्षा मामलों के समाधान दर और वसूली की गई राशि के आँकड़ों से होगी। अधिक राज्यों द्वारा इस प्लेटफॉर्म को अपनाने के साथ आने वाले महीनों में यह तस्वीर और स्पष्ट होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

115 ई-जीरो एफआईआर का आँकड़ा यह तो बताता है कि साइबर धोखाधड़ी की रिपोर्टिंग बढ़ी है, लेकिन यह नहीं बताता कि इनमें से कितने मामलों में पीड़ितों की रकम वापस मिली या आरोपी पकड़े गए। 18 में से शेष राज्यों का अभी तक इस प्रणाली से बाहर रहना एक बड़ी खामी है — साइबर अपराधी राज्य की सीमाओं को नहीं मानते, पर हमारी जाँच एजेंसियाँ अभी भी उसी दायरे में बंधी हैं। तीन दिनों में पुलिस स्टेशन जाने की शर्त डिजिटल-फर्स्ट प्रणाली की भावना के विपरीत भी जान पड़ती है, खासकर उन पीड़ितों के लिए जो दूरदराज़ के इलाकों में रहते हैं।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ई-जीरो एफआईआर क्या होती है और यह सामान्य एफआईआर से कैसे अलग है?
ई-जीरो एफआईआर एक ऑनलाइन दर्ज प्राथमिकी है जो एनसीआरपी पोर्टल या हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करने पर स्वतः दर्ज हो जाती है। इसे बाद में तीन दिनों के भीतर संबंधित पुलिस स्टेशन में जाकर नियमित एफआईआर में बदलवाना होता है।
दिल्ली में कितनी ई-जीरो एफआईआर दर्ज हुई हैं और कब से?
दिल्ली में मई 2025 से साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के 6,115 ई-जीरो एफआईआर दर्ज की गई हैं, जो देशभर में सर्वाधिक है। यह जानकारी गृह राज्य मंत्री बी. संजय कुमार ने 28 जुलाई 2026 को लोकसभा में दी।
साइबर धोखाधड़ी की शिकायत कैसे दर्ज कराएँ?
पीड़ित नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं या हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर सकते हैं। निर्धारित वित्तीय सीमा पार होने पर शिकायत स्वतः ई-जीरो एफआईआर में बदल जाती है।
किन राज्यों ने ई-जीरो एफआईआर प्रणाली अपनाई है?
अब तक 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने यह प्रणाली लागू की है। इनमें दिल्ली, चंडीगढ़, उत्तराखंड, गोवा, राजस्थान, असम, हरियाणा, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और बिहार शामिल हैं।
ई-जीरो एफआईआर दर्ज होने के बाद आगे की प्रक्रिया क्या है?
ई-जीरो एफआईआर दर्ज होने के बाद इसे संबंधित साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन को स्थानांतरित किया जाता है। शिकायतकर्ता को तीन दिनों के भीतर पुलिस स्टेशन जाकर इसे नियमित एफआईआर में बदलवाना होता है; इसके बाद चार्जशीट, गिरफ्तारी और मामले का निपटारा राज्य की कानून प्रवर्तन एजेंसियाँ करती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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