दिल्ली में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी: मई 2025 से 6,115 ई-जीरो एफआईआर दर्ज, संसद में खुलासा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 28 जुलाई 2026 को लोकसभा में बताया कि मई 2025 से साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में नई दिल्ली सबसे आगे है — यहाँ 6,115 ई-जीरो एफआईआर दर्ज की गई हैं, जबकि चंडीगढ़ में यह संख्या 4,174 रही। गृह राज्य मंत्री बी. संजय कुमार ने एक सांसद के सवाल के जवाब में ये आँकड़े सदन के सामने रखे।
ई-जीरो एफआईआर प्रणाली क्या है
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 173(1) के तहत किसी भी संज्ञेय अपराध की सूचना मौखिक रूप से या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी को दी जा सकती है। इसी प्रावधान के आधार पर केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को साइबर अपराध मामलों में ई-जीरो एफआईआर दर्ज करने का एक समर्पित प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया है।
इस व्यवस्था के अंतर्गत नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) या हेल्पलाइन नंबर '1930' पर दर्ज शिकायतें — जिनमें संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश द्वारा निर्धारित वित्तीय नुकसान की सीमा पार हो — स्वतः ही ई-क्राइम पुलिस स्टेशन में ई-जीरो एफआईआर के रूप में दर्ज हो जाती हैं और तत्काल संबंधित साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन को हस्तांतरित कर दी जाती हैं।
राज्यवार आँकड़े
राज्य मंत्री द्वारा साझा किए गए आँकड़ों के अनुसार, अब तक 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने यह प्रणाली अपनाई है। उत्तराखंड में मार्च 2026 से 552 और गोवा में जनवरी 2026 से 446 ई-जीरो एफआईआर दर्ज हुई हैं। राजस्थान में जनवरी 2026 से 251, असम में जून 2026 से 223, और हरियाणा में जून 2026 से 165 मामले दर्ज किए गए हैं। महाराष्ट्र में 131, तमिलनाडु में 39 और बिहार में जुलाई 2026 से 12 मामले दर्ज हुए हैं।
शिकायतकर्ता को क्या करना होगा
मंत्री ने स्पष्ट किया कि ई-जीरो एफआईआर को नियमित एफआईआर में बदलवाने के लिए शिकायतकर्ता को तीन दिनों के भीतर संबंधित पुलिस स्टेशन में उपस्थित होना अनिवार्य है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के अंतर्गत 'पुलिस' और 'सार्वजनिक व्यवस्था' राज्य के विषय हैं, इसलिए एफआईआर को आगे बढ़ाना, चार्जशीट दाखिल करना, गिरफ्तारी और मामलों का निपटारा — ये सभी कार्य संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की कानून प्रवर्तन एजेंसियाँ ही करती हैं।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामले देशभर में तेज़ी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ई-जीरो एफआईआर प्रणाली से पीड़ितों की शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया सरल हुई है, परंतु प्रणाली की वास्तविक परीक्षा मामलों के समाधान दर और वसूली की गई राशि के आँकड़ों से होगी। अधिक राज्यों द्वारा इस प्लेटफॉर्म को अपनाने के साथ आने वाले महीनों में यह तस्वीर और स्पष्ट होगी।