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राजस्थान पुलिस का बड़ा फैसला: ₹1 लाख से अधिक के साइबर फ्रॉड पर अब स्वतः दर्ज होगी ई-जीरो एफआईआर

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राजस्थान पुलिस का बड़ा फैसला: ₹1 लाख से अधिक के साइबर फ्रॉड पर अब स्वतः दर्ज होगी ई-जीरो एफआईआर

सारांश

राजस्थान पुलिस ने ₹1 लाख से अधिक के साइबर फ्रॉड पर स्वतः ई-जीरो एफआईआर दर्ज करने की व्यवस्था लागू कर दी है — पहले यह सीमा ₹5 लाख थी। I4C पोर्टल, 1930 हेल्पलाइन और CCTNS के एकीकरण से अब पुलिस पीड़ित के हस्ताक्षर का इंतज़ार किए बिना तुरंत बैंक खाते फ्रीज कर सकेगी।

मुख्य बातें

राजस्थान पुलिस ने 23 जुलाई 2026 से ₹1 लाख या उससे अधिक के साइबर फ्रॉड में स्वचालित ई-जीरो एफआईआर दर्ज करने की व्यवस्था लागू की।
पहले यह सुविधा केवल ₹5 लाख या उससे अधिक के मामलों में उपलब्ध थी; अब सीमा घटाकर ₹1 लाख की गई।
I4C पोर्टल , 1930 साइबर हेल्पलाइन और CCTNS को एकीकृत किया गया — शिकायत दर्ज होते ही एफआईआर स्वतः बनेगी।
एफआईआर दर्ज होने के 72 घंटे के भीतर शिकायतकर्ता को पुलिस स्टेशन जाकर प्रिंटेड प्रति पर हस्ताक्षर करने होंगे।
यह आदेश DGP राजीव कुमार शर्मा ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों के अनुपालन में जारी किया।

राजस्थान पुलिस ने 23 जुलाई 2026 से ₹1 लाख या उससे अधिक के साइबर वित्तीय धोखाधड़ी मामलों में स्वचालित ई-जीरो एफआईआर दर्ज करने की नई व्यवस्था पूरे राज्य में लागू कर दी है। डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DGP) राजीव कुमार शर्मा के आदेश पर लागू यह प्रणाली साइबर पीड़ितों को तत्काल कानूनी सुरक्षा देने और ठगी गई राशि को जल्द से जल्द फ्रीज करने के उद्देश्य से शुरू की गई है। यह कदम केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों के अनुपालन में उठाया गया है।

नई व्यवस्था में क्या बदला

इससे पहले राजस्थान में ई-एफआईआर की सुविधा केवल ₹5 लाख या उससे अधिक के साइबर फ्रॉड मामलों पर लागू थी। अतिरिक्त महानिदेशक (साइबर क्राइम) वीके सिंह के अनुसार, अब यह सीमा घटाकर ₹1 लाख कर दी गई है, जिससे अधिक संख्या में पीड़ितों को तत्काल कानूनी राहत मिल सकेगी।

DGP ने राज्य के सभी पुलिस अधीक्षकों (SP) और पुलिस कमिश्नरों को विस्तृत दिशानिर्देश जारी करते हुए इस प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से लागू करने का निर्देश दिया है।

तकनीकी एकीकरण: तीन प्रणालियाँ एक साथ

नई व्यवस्था के तहत राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (I4C), 1930 साइबर हेल्पलाइन और क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (CCTNS) को आपस में जोड़ दिया गया है।

जैसे ही पोर्टल या हेल्पलाइन के माध्यम से ₹1 लाख या उससे अधिक की साइबर धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज होती है, संबंधित राज्य के साइबर पुलिस स्टेशन में स्वतः एक ई-जीरो एफआईआर तैयार हो जाएगी। अब पुलिस अधिकारी कानूनी कार्रवाई शुरू करने के लिए शिकायतकर्ता के भौतिक हस्ताक्षर की प्रतीक्षा नहीं करेंगे।

एफआईआर दर्ज होते ही क्या होगी कार्रवाई

ई-जीरो एफआईआर दर्ज होने के तुरंत बाद पुलिस अधिकारी निम्नलिखित कदम उठाएंगे:

संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज करना, धोखाधड़ी वाले लेनदेन को रोकना, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), इंटरनेट प्रोटोकॉल डिटेल रिकॉर्ड (IPDR), CCTV फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्य एकत्र करना। इन कदमों का मुख्य उद्देश्य साइबर अपराधियों को चुराई गई राशि निकालने या स्थानांतरित करने से रोकना और जाँच को गति देना है।

पीड़ितों के लिए ज़रूरी प्रक्रिया

नई व्यवस्था के तहत शिकायतकर्ता को ई-जीरो एफआईआर दर्ज होने के 72 घंटे के भीतर संबंधित पुलिस स्टेशन जाकर एफआईआर की प्रिंटेड प्रति पर हस्ताक्षर करने होंगे। यदि शिकायतकर्ता निर्धारित समय में नहीं पहुँचता, तो उसे नोटिस भेजा जाएगा। हालाँकि, पुलिस इस दौरान प्रारंभिक जाँच और आवश्यक कानूनी कार्रवाई बिना किसी रुकावट के जारी रखेगी।

राजस्थान पुलिस ने पीड़ितों से अपील की है कि साइबर धोखाधड़ी होने पर तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराएँ, ताकि ठगी गई राशि वापस मिलने की संभावना अधिकतम हो सके। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में साइबर वित्तीय अपराधों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है और पीड़ितों को त्वरित राहत दिलाने की माँग लगातार उठती रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की गति की होगी — क्योंकि साइबर ठग आमतौर पर मिनटों में रकम कई खातों में बाँट देते हैं। 72 घंटे की हस्ताक्षर-समय-सीमा व्यावहारिक है, परंतु ग्रामीण और दूरदराज़ के पीड़ितों के लिए पुलिस स्टेशन तक पहुँचना अपने आप में एक बाधा बन सकती है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि I4C, हेल्पलाइन और CCTNS का एकीकरण तकनीकी रूप से महत्वाकांक्षी है — इसकी सफलता राज्य के साइबर पुलिस स्टेशनों की वास्तविक क्षमता और बैंकों के साथ समन्वय की रफ़्तार पर निर्भर करेगी।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान में ई-जीरो एफआईआर क्या है और यह कैसे काम करती है?
ई-जीरो एफआईआर एक स्वचालित प्रणाली है जिसमें ₹1 लाख या उससे अधिक की साइबर धोखाधड़ी की शिकायत I4C पोर्टल या 1930 हेल्पलाइन पर दर्ज होते ही संबंधित साइबर पुलिस स्टेशन में बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के एफआईआर दर्ज हो जाती है। इससे पीड़ित के हस्ताक्षर का इंतज़ार किए बिना तुरंत कानूनी कार्रवाई शुरू हो सकती है।
पहले और अब की ई-एफआईआर व्यवस्था में क्या अंतर है?
पहले राजस्थान में ई-एफआईआर की सुविधा केवल ₹5 लाख या उससे अधिक के साइबर फ्रॉड मामलों में उपलब्ध थी। अब यह सीमा घटाकर ₹1 लाख कर दी गई है, जिससे अधिक संख्या में पीड़ित तत्काल कानूनी सुरक्षा के दायरे में आ सकेंगे।
साइबर फ्रॉड होने पर पीड़ित को क्या करना चाहिए?
पीड़ित को तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करना चाहिए या राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (I4C) पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। ई-जीरो एफआईआर दर्ज होने के 72 घंटे के भीतर संबंधित पुलिस स्टेशन जाकर प्रिंटेड एफआईआर पर हस्ताक्षर करना भी अनिवार्य है।
ई-जीरो एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस क्या कदम उठाती है?
एफआईआर दर्ज होते ही पुलिस संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज करती है, धोखाधड़ी वाले लेनदेन रोकती है और CDR, IPDR, CCTV फुटेज जैसे डिजिटल साक्ष्य एकत्र करती है। इसका उद्देश्य अपराधियों को चुराई गई राशि निकालने से पहले रोकना और जाँच को तेज़ करना है।
यह नई व्यवस्था किसके आदेश पर और कब से लागू हुई?
यह व्यवस्था DGP राजीव कुमार शर्मा के आदेश पर केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों के अनुपालन में 23 जुलाई 2026 से पूरे राजस्थान में लागू हुई। सभी SP और पुलिस कमिश्नरों को विस्तृत दिशानिर्देश जारी कर तत्काल क्रियान्वयन का निर्देश दिया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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