23 जुलाई 2026
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राजस्थान में साइबर फ्रॉड पर 'जीरो-टाइम-लैग' मिशन: मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने बैंकों को दिए सख्त निर्देश

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राजस्थान में साइबर फ्रॉड पर 'जीरो-टाइम-लैग' मिशन: मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने बैंकों को दिए सख्त निर्देश

सारांश

राजस्थान सरकार ने साइबर वित्तीय धोखाधड़ी पर 'जीरो-टाइम-लैग' रणनीति अपनाई है — अभी दस में से सिर्फ एक मामले में राशि समय पर ब्लॉक हो पाती है। मुख्य सचिव और डीजीपी ने बैंकों को 1930 हेल्पलाइन के साथ तत्काल समन्वय, केंद्रीकृत निगरानी और वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष काउंटर के निर्देश दिए।

मुख्य बातें

21 जुलाई 2026 को जयपुर सचिवालय में स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी की विशेष साइबर समन्वय बैठक हुई।
श्रीनिवास ने कहा कि अभी दस में से केवल एक मामले में बैंक की समय पर दखल से धोखाधड़ी की राशि ब्लॉक हो पाती है।
सभी बैंक प्रतिनिधि 22 जुलाई 2026 को पुलिस मुख्यालय स्थित 1930 साइबर कॉल सेंटर का दौरा करेंगे।
डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने RBI गाइडलाइंस के तहत म्यूल अकाउंट्स रोकने और केंद्रीकृत निगरानी प्रणाली स्थापित करने पर जोर दिया।
बैंकों को केवाईसी जानकारी केवल आधिकारिक चैनलों से देने और वरिष्ठ नागरिकों के लिए समर्पित सहायता काउंटर बनाने के निर्देश दिए गए।

राजस्थान सरकार ने साइबर वित्तीय धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने के लिए 21 जुलाई 2026 को जयपुर स्थित सरकारी सचिवालय में स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी की एक विशेष साइबर समन्वय बैठक आयोजित की। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और प्रमुख बैंकों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक का केंद्रीय एजेंडा था — नागरिकों की साइबर शिकायत दर्ज होने और संदिग्ध खातों को फ्रीज करने के बीच के समय को लगभग शून्य करना।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने बैठक में स्पष्ट किया कि 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत मिलते ही बैंकों को तत्काल कार्रवाई करनी होगी। उन्होंने चिंता जताई कि फिलहाल दस में से केवल एक मामले में ही बैंक की समय पर दखल से धोखाधड़ी की राशि ब्लॉक हो पाती है — यह आँकड़ा प्रणाली की गंभीर खामी को उजागर करता है। उन्होंने बैंक अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे स्वयं 1930 साइबर कॉल सेंटर जाकर शिकायत निवारण की प्रक्रिया को समझें और पुलिस के साथ परिचालन तालमेल बेहतर करें।

डीजीपी की प्राथमिकताएँ

पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा ने जोर दिया कि साइबर सुरक्षा और 'म्यूल अकाउंट्स' को रोकने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की गाइडलाइंस को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। उन्होंने संदिग्ध खातों और चिह्नित हॉटस्पॉट बैंक शाखाओं के लिए एक केंद्रीकृत निगरानी प्रणाली स्थापित करने तथा जिला स्तर पर नियमित समन्वय बैठकें आयोजित करने की बात कही। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि राजस्थान पुलिस साइबर अपराध के प्रति राज्य सरकार की 'जीरो-टॉलरेंस' नीति को लागू करने और नागरिक जागरूकता अभियान चलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

बैंकों को विशेष निर्देश

मुख्य सचिव ने बताया कि सभी बैंकों के प्रतिनिधि बुधवार, 22 जुलाई 2026 को पुलिस मुख्यालय स्थित 1930 साइबर कॉल सेंटर का दौरा करेंगे, ताकि वे कॉल सेंटर की कार्यप्रणाली और शिकायत निवारण की चुनौतियों को प्रत्यक्ष रूप से समझ सकें। बैठक में यह भी तय किया गया कि बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी और नोडल प्रतिनिधि नियमित रूप से 1930 साइबर कंट्रोल रूम का दौरा करेंगे, जिससे खाता फ्रीज करने की प्रक्रिया और अधिक सुगम हो सके।

केवाईसी धोखाधड़ी और वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा

मुख्य सचिव ने रेखांकित किया कि साइबर अपराधी अक्सर केवाईसी (KYC) अपडेट के बहाने फर्जी कॉल, एसएमएस और भ्रामक लिंक के जरिए ग्राहकों को ठगते हैं। उन्होंने बैंकों को निर्देश दिया कि केवाईसी से जुड़ी जानकारी केवल सत्यापित और आधिकारिक चैनलों के माध्यम से ही साझा की जाए। वरिष्ठ नागरिकों की विशेष संवेदनशीलता को देखते हुए, बैंकों को शाखाओं में समर्पित सहायता काउंटर स्थापित करने और बुजुर्ग ग्राहकों को सुरक्षित डिजिटल बैंकिंग के तरीकों से परिचित कराने के लिए व्यक्तिगत जागरूकता पहल चलाने के निर्देश दिए गए।

आगे क्या होगा

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने विश्वास जताया कि बैंकों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की समन्वित एवं समयबद्ध कोशिश से साइबर वित्तीय अपराधों पर प्रभावी रोक लगेगी और राजस्थान डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में एक मॉडल राज्य के रूप में उभरेगा। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब देशभर में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं और राज्य सरकारों पर बैंकिंग तंत्र के साथ त्वरित समन्वय का दबाव बढ़ रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक स्वीकारोक्ति है कि मौजूदा तंत्र विफल रहा है। असली परीक्षा यह है कि बुधवार के कॉल सेंटर दौरे और जिला-स्तरीय बैठकें कागज़ी निर्देशों से आगे बढ़कर मापने योग्य परिणाम दे पाती हैं या नहीं। म्यूल अकाउंट्स की समस्या केवल तकनीकी नहीं, बल्कि बैंकों की केवाईसी प्रक्रियाओं में संरचनात्मक ढील का नतीजा है — जिसे RBI गाइडलाइंस के बावजूद जमीन पर लागू नहीं किया जा सका। जब तक खाता फ्रीज करने की प्रतिक्रिया-गति को सार्वजनिक रूप से ट्रैक और जवाबदेह नहीं बनाया जाता, 'मॉडल राज्य' का लक्ष्य एक और घोषणा बनकर रह सकता है।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान में 1930 साइबर हेल्पलाइन कैसे काम करती है?
1930 साइबर हेल्पलाइन एक राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर है जिस पर नागरिक साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत तत्काल दर्ज करा सकते हैं। राजस्थान पुलिस मुख्यालय में स्थित इस कॉल सेंटर का लक्ष्य शिकायत मिलते ही संदिग्ध खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू करना है।
बैठक में बैंकों को क्या निर्देश दिए गए?
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने बैंकों को निर्देश दिया कि वे 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत मिलते ही तत्काल कार्रवाई करें, केवाईसी जानकारी केवल आधिकारिक चैनलों से दें, वरिष्ठ नागरिकों के लिए समर्पित काउंटर बनाएं और नियमित रूप से साइबर कंट्रोल रूम का दौरा करें।
म्यूल अकाउंट्स क्या होते हैं और इन्हें कैसे रोका जाएगा?
म्यूल अकाउंट्स वे बैंक खाते होते हैं जिनका उपयोग साइबर अपराधी धोखाधड़ी की राशि को एक खाते से दूसरे खाते में स्थानांतरित करने के लिए करते हैं। डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने RBI गाइडलाइंस के तहत संदिग्ध खातों और हॉटस्पॉट शाखाओं की केंद्रीकृत निगरानी प्रणाली स्थापित करने का निर्देश दिया।
वरिष्ठ नागरिकों को साइबर धोखाधड़ी से बचाने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे?
बैंकों को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी शाखाओं में बुजुर्ग ग्राहकों के लिए समर्पित सहायता काउंटर स्थापित करें और उन्हें सुरक्षित डिजिटल बैंकिंग के तरीकों से परिचित कराने के लिए व्यक्तिगत जागरूकता अभियान चलाएं।
राजस्थान को डिजिटल सुरक्षा में मॉडल राज्य बनाने की योजना क्या है?
मुख्य सचिव के अनुसार, बैंकों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वित व समयबद्ध कार्रवाई, केंद्रीकृत निगरानी प्रणाली, जिला-स्तरीय बैठकें और लगातार नागरिक जागरूकता अभियान मिलकर राजस्थान को साइबर वित्तीय अपराध नियंत्रण में देश का मॉडल राज्य बनाएंगे।
राष्ट्र प्रेस
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