राजस्थान में साइबर फ्रॉड पर 'जीरो-टाइम-लैग' मिशन: मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने बैंकों को दिए सख्त निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान सरकार ने साइबर वित्तीय धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने के लिए 21 जुलाई 2026 को जयपुर स्थित सरकारी सचिवालय में स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी की एक विशेष साइबर समन्वय बैठक आयोजित की। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और प्रमुख बैंकों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक का केंद्रीय एजेंडा था — नागरिकों की साइबर शिकायत दर्ज होने और संदिग्ध खातों को फ्रीज करने के बीच के समय को लगभग शून्य करना।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने बैठक में स्पष्ट किया कि 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत मिलते ही बैंकों को तत्काल कार्रवाई करनी होगी। उन्होंने चिंता जताई कि फिलहाल दस में से केवल एक मामले में ही बैंक की समय पर दखल से धोखाधड़ी की राशि ब्लॉक हो पाती है — यह आँकड़ा प्रणाली की गंभीर खामी को उजागर करता है। उन्होंने बैंक अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे स्वयं 1930 साइबर कॉल सेंटर जाकर शिकायत निवारण की प्रक्रिया को समझें और पुलिस के साथ परिचालन तालमेल बेहतर करें।
डीजीपी की प्राथमिकताएँ
पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा ने जोर दिया कि साइबर सुरक्षा और 'म्यूल अकाउंट्स' को रोकने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की गाइडलाइंस को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। उन्होंने संदिग्ध खातों और चिह्नित हॉटस्पॉट बैंक शाखाओं के लिए एक केंद्रीकृत निगरानी प्रणाली स्थापित करने तथा जिला स्तर पर नियमित समन्वय बैठकें आयोजित करने की बात कही। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि राजस्थान पुलिस साइबर अपराध के प्रति राज्य सरकार की 'जीरो-टॉलरेंस' नीति को लागू करने और नागरिक जागरूकता अभियान चलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
बैंकों को विशेष निर्देश
मुख्य सचिव ने बताया कि सभी बैंकों के प्रतिनिधि बुधवार, 22 जुलाई 2026 को पुलिस मुख्यालय स्थित 1930 साइबर कॉल सेंटर का दौरा करेंगे, ताकि वे कॉल सेंटर की कार्यप्रणाली और शिकायत निवारण की चुनौतियों को प्रत्यक्ष रूप से समझ सकें। बैठक में यह भी तय किया गया कि बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी और नोडल प्रतिनिधि नियमित रूप से 1930 साइबर कंट्रोल रूम का दौरा करेंगे, जिससे खाता फ्रीज करने की प्रक्रिया और अधिक सुगम हो सके।
केवाईसी धोखाधड़ी और वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा
मुख्य सचिव ने रेखांकित किया कि साइबर अपराधी अक्सर केवाईसी (KYC) अपडेट के बहाने फर्जी कॉल, एसएमएस और भ्रामक लिंक के जरिए ग्राहकों को ठगते हैं। उन्होंने बैंकों को निर्देश दिया कि केवाईसी से जुड़ी जानकारी केवल सत्यापित और आधिकारिक चैनलों के माध्यम से ही साझा की जाए। वरिष्ठ नागरिकों की विशेष संवेदनशीलता को देखते हुए, बैंकों को शाखाओं में समर्पित सहायता काउंटर स्थापित करने और बुजुर्ग ग्राहकों को सुरक्षित डिजिटल बैंकिंग के तरीकों से परिचित कराने के लिए व्यक्तिगत जागरूकता पहल चलाने के निर्देश दिए गए।
आगे क्या होगा
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने विश्वास जताया कि बैंकों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की समन्वित एवं समयबद्ध कोशिश से साइबर वित्तीय अपराधों पर प्रभावी रोक लगेगी और राजस्थान डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में एक मॉडल राज्य के रूप में उभरेगा। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब देशभर में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं और राज्य सरकारों पर बैंकिंग तंत्र के साथ त्वरित समन्वय का दबाव बढ़ रहा है।