राजस्थान पुलिस का ई-जीरो एफआईआर सिस्टम: लॉन्च के 18 घंटे में 7 शिकायतें दर्ज, 460 का आँकड़ा पार
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान पुलिस के नवस्थापित ई-जीरो एफआईआर सिस्टम ने साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में तत्काल असर दिखाया है — लॉन्च के पहले 18 घंटों के भीतर ही 7 ई-जीरो एफआईआर स्वतः दर्ज हो गईं। ₹1 लाख या उससे अधिक के साइबर फ्रॉड मामलों के लिए शुरू की गई यह प्रणाली पीड़ितों को बिना थाने की दौड़-धूप के तत्काल कानूनी सुरक्षा देती है। अब तक इस सिस्टम के तहत कुल 460 ई-जीरो एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं।
सिस्टम कैसे काम करता है
यह एकीकृत प्रणाली '1930' साइबर हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों को स्वचालित रूप से इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) और क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (CCTNS) से जोड़ती है। इससे शिकायत सीधे संबंधित पुलिस स्टेशन तक पहुँचती है और फौरन कार्रवाई शुरू हो जाती है।
अधिकारियों के अनुसार, नई प्रक्रिया अधिकार-क्षेत्र संबंधी देरी को समाप्त करती है क्योंकि शिकायत सीधे सही जाँच एजेंसी को भेज दी जाती है। इससे रिस्पॉन्स टाइम में उल्लेखनीय कमी आई है।
सीमा में बदलाव और विस्तार
साइबर क्राइम के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक वीके सिंह ने बताया कि राजस्थान के पुराने ई-एफआईआर सिस्टम में केवल ₹5 लाख या उससे अधिक के साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामले शामिल थे। अब यह सीमा घटाकर ₹1 लाख कर दी गई है, जिससे कहीं अधिक पीड़ितों को स्वतः कानूनी संरक्षण मिल सकेगा।
यह फैसला केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों के अनुरूप लिया गया है, जिसका उद्देश्य कानूनी कार्रवाई में तेजी, धोखाधड़ी की रकम की त्वरित फ्रीजिंग और साइबर अपराधियों की शीघ्र जाँच व गिरफ्तारी सुनिश्चित करना है।
पैसे वापसी की संभावना बढ़ी
यह सिस्टम पुलिस को संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज करने और धोखाधड़ी वाले लेनदेन का पता लगाने जैसे कदम तेजी से उठाने में सक्षम बनाता है। अधिकारियों ने कहा, "शिकायत जितनी जल्दी दर्ज कराई जाएगी, मनी ट्रेल को फ्रीज करने और धोखाधड़ी वाली रकम को वापस पाने की संभावना उतनी ही ज़्यादा होगी।"
पुलिस महानिदेशक के निर्देश
पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कुमार शर्मा के निर्देशन में शुरू की गई इस पहल के तहत उन्होंने सभी पुलिस अधीक्षकों (SP) और पुलिस कमिश्नरों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं और नई प्रक्रिया को तत्काल लागू करने का आदेश दिया है।
राजस्थान पुलिस ने साइबर फ्रॉड के पीड़ितों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध लेनदेन का पता चलते ही तुरंत '1930' साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करें। यह सिस्टम आगे चलकर साइबर अपराध के खिलाफ राजस्थान की कार्रवाई को और धार देने का काम करेगा।