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असम में 'ई-जीरो एफआईआर' लॉन्च: ₹10 लाख से अधिक के साइबर फ्रॉड में अब स्वतः दर्ज होगी FIR

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असम में 'ई-जीरो एफआईआर' लॉन्च: ₹10 लाख से अधिक के साइबर फ्रॉड में अब स्वतः दर्ज होगी FIR

सारांश

असम ने 'ई-जीरो एफआईआर' प्रणाली शुरू कर साइबर धोखाधड़ी से लड़ाई में एक बड़ा कदम उठाया है — अब NCRP या 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज होते ही FIR स्वतः बनेगी। ₹10 लाख से अधिक के मामलों में क्षेत्राधिकार की बाधा खत्म होगी और ठगी की रकम वसूली के लिए पुलिस को गोल्डन आवर में कार्रवाई का मौका मिलेगा।

मुख्य बातें

असम ने 23 जून 2026 को ' ई-जीरो एफआईआर ' पहल लॉन्च की, जो देश की पहली ऐसी स्वचालित प्रणालियों में से एक है।
NCRP और 1930 साइबर हेल्पलाइन पर दर्ज साइबर वित्तीय अपराध की शिकायतें अब स्वतः FIR में परिवर्तित होंगी।
₹10 लाख से अधिक के साइबर धोखाधड़ी मामले स्वतः जीरो एफआईआर में बदलेंगे, जिससे तत्काल जाँच संभव होगी।
नई प्रणाली पंजीकरण को क्षेत्राधिकार-मुक्त बनाएगी — थाना क्षेत्र की सीमा अब बाधा नहीं बनेगी।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इसे PM मोदी के ' साइबर सुरक्षित भारत ' विज़न के अनुरूप बताया।

असम सरकार ने 23 जून 2026 को गुवाहाटी में 'ई-जीरो एफआईआर' पहल की आधिकारिक शुरुआत की, जिसके तहत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) और 1930 साइबर हेल्पलाइन पर दर्ज साइबर वित्तीय अपराध की शिकायतें स्वतः प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) में परिवर्तित हो जाएंगी। इस कदम के साथ असम देश के उन अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है जिन्होंने साइबर धोखाधड़ी के विरुद्ध स्वचालित पंजीकरण प्रणाली लागू की है।

मुख्यमंत्री की घोषणा और उद्देश्य

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस पहल की घोषणा करते हुए कहा कि इसका प्रमुख लक्ष्य साइबर धोखाधड़ी के मामलों में पुलिस की त्वरित कार्रवाई, शिकायतों का सहज पंजीकरण और ठगी गई रकम की शीघ्र वसूली सुनिश्चित करना है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए कहा कि NCRP या 1930 हेल्पलाइन पर दर्ज साइबर वित्तीय अपराध अब स्वतः एफआईआर में बदल जाएंगे।

सरमा ने यह भी स्पष्ट किया कि यह प्रणाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'साइबर सुरक्षित भारत' के विज़न के अनुरूप है और ऑनलाइन वित्तीय अपराधों के बढ़ते खतरे के प्रति राज्य की प्रतिक्रिया को सुदृढ़ करती है।

₹10 लाख से अधिक के मामलों में स्वतः जीरो एफआईआर

नई व्यवस्था के अंतर्गत ₹10 लाख से अधिक की राशि से जुड़े साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामले स्वतः ही जीरो एफआईआर में परिवर्तित हो जाएंगे। इससे शिकायत के प्रारंभिक पंजीकरण के स्थान की परवाह किए बिना जाँच और कार्रवाई तत्काल शुरू हो सकेगी। जीरो एफआईआर की विशेषता यह है कि पुलिस क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र की बाधा के बिना मामला दर्ज कर सकती है, जिसे बाद में उचित थाने को स्थानांतरित किया जाता है।

क्षेत्राधिकार की बाधा होगी समाप्त

मुख्यमंत्री सरमा के अनुसार, नई प्रणाली साइबर अपराध मामलों के पंजीकरण को क्षेत्राधिकार-मुक्त और परेशानी-मुक्त बनाएगी। अब तक पीड़ितों को प्रायः यह बाधा झेलनी पड़ती थी कि अपराध किस थाना क्षेत्र में हुआ — ऑनलाइन धोखाधड़ी में यह निर्धारण अत्यंत जटिल होता है। नई प्रणाली इस प्रक्रियात्मक देरी को समाप्त करती है।

धन वसूली में तेज़ी का लक्ष्य

यह प्रणाली विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि साइबर ठगी में अपराधी ठगी की रकम को कई खातों में तेज़ी से स्थानांतरित कर देते हैं, जिससे वसूली कठिन हो जाती है। स्वचालित एफआईआर दर्ज होने से पुलिस को गोल्डन आवर में कार्रवाई का अवसर मिलेगा — जब धन अभी भी ट्रेस करने योग्य होता है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में साइबर वित्तीय अपराधों में तेज़ वृद्धि दर्ज की गई है और पीड़ितों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

आगे क्या

गौरतलब है कि यह पहल केंद्र सरकार के साइबर सुरक्षा ढाँचे को राज्य स्तर पर क्रियान्वित करने का एक ठोस उदाहरण है। असम की इस पहल से अन्य राज्यों पर भी इसी तरह की प्रणाली अपनाने का दबाव बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रणाली की सफलता इसके तकनीकी क्रियान्वयन और पुलिस प्रशिक्षण पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में है। स्वचालित FIR पंजीकरण तभी प्रभावी होगा जब पुलिस तंत्र उस गति से जाँच करने में सक्षम हो जितनी तेज़ी से साइबर अपराधी धन स्थानांतरित करते हैं। यह भी ध्यान देने योग्य है कि ₹10 लाख की सीमा से नीचे के असंख्य छोटे मामले — जो संख्या में कहीं अधिक हैं — इस स्वतः-रूपांतरण से बाहर रहेंगे। राज्यों में साइबर पुलिस की क्षमता और तकनीकी बुनियादी ढाँचे में भारी असमानता को देखते हुए, इस मॉडल की नकल करना सभी राज्यों के लिए उतना सरल नहीं होगा जितना यह घोषणा सुनने में लगती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम की 'ई-जीरो एफआईआर' प्रणाली क्या है?
यह एक स्वचालित प्रणाली है जिसके तहत NCRP (राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल) या 1930 साइबर हेल्पलाइन पर दर्ज साइबर वित्तीय अपराध की शिकायतें सीधे FIR में परिवर्तित हो जाती हैं। इससे पीड़ित को अलग से थाने जाकर शिकायत दर्ज कराने की ज़रूरत नहीं होगी।
₹10 लाख से अधिक के मामलों में क्या विशेष प्रावधान है?
₹10 लाख से अधिक की राशि वाले साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामले स्वतः ही जीरो एफआईआर में परिवर्तित हो जाएंगे। इससे शिकायत कहीं भी दर्ज होने पर भी तत्काल जाँच शुरू हो सकेगी और ठगी की रकम वसूली की संभावना बढ़ेगी।
जीरो एफआईआर और सामान्य एफआईआर में क्या अंतर है?
जीरो एफआईआर में पुलिस क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र की बाधा के बिना मामला दर्ज कर सकती है, जिसे बाद में उचित थाने को स्थानांतरित किया जाता है। सामान्य एफआईआर केवल उसी थाने में दर्ज होती है जिसके क्षेत्र में अपराध हुआ हो, जो साइबर मामलों में निर्धारित करना कठिन होता है।
इस प्रणाली से साइबर पीड़ितों को क्या फायदा होगा?
पीड़ितों को अब थाना क्षेत्र और प्रक्रियात्मक बाधाओं के कारण होने वाली देरी से राहत मिलेगी। शिकायत दर्ज होते ही FIR बनेगी और पुलिस तत्काल कार्रवाई कर सकेगी, जिससे ठगी की रकम के कई खातों में स्थानांतरित होने से पहले ही उसे फ्रीज़ करने की संभावना बढ़ जाएगी।
क्या यह पहल पूरे भारत में लागू होगी?
फिलहाल यह पहल असम राज्य में लागू की गई है और इसे केंद्र सरकार के 'साइबर सुरक्षित भारत' विज़न के अनुरूप बताया गया है। अन्य राज्यों में इसके विस्तार की कोई आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है, हालाँकि यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी अनुकरणीय हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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