30 अगस्त 2026
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जीरो एफआईआर महिलाओं का अधिकार: NCW अध्यक्ष विजया रहाटकर ने एक्स पर दी अहम जानकारी

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जीरो एफआईआर महिलाओं का अधिकार: NCW अध्यक्ष विजया रहाटकर ने एक्स पर दी अहम जानकारी

सारांश

NCW अध्यक्ष विजया रहाटकर ने एक्स पर महिलाओं को याद दिलाया — जीरो एफआईआर सिर्फ कानूनी प्रावधान नहीं, यह उनका अधिकार है। महाराष्ट्र में 300 से अधिक महिला प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित करने के बाद यह संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है।

मुख्य बातें

NCW अध्यक्ष विजया रहाटकर ने 30 अगस्त को एक्स पर पोस्ट कर महिलाओं को जीरो एफआईआर के अधिकार के बारे में जागरूक किया।
घटना कहीं भी हुई हो, महिला किसी भी नज़दीकी पुलिस स्टेशन में संज्ञेय अपराध की शिकायत दर्ज करा सकती है; बाद में मामला संबंधित थाने को स्थानांतरित होता है।
एफआईआर दर्ज करने से इनकार पर लिखित शिकायत देकर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से संपर्क करने की सलाह दी गई।
छत्रपति संभाजीनगर में 'शी इज़ अ चेंज मेकर' कार्यशाला में 300 से अधिक महिला प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
महाराष्ट्र सरकार के सहयोग से राज्यभर में 12 प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे।

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने रविवार, 30 अगस्त को महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करते हुए स्पष्ट किया कि जीरो एफआईआर दर्ज कराना हर महिला का अधिकार है — चाहे अपराध देश में कहीं भी हुआ हो। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक विस्तृत पोस्ट के माध्यम से यह संदेश साझा किया और साथ में एक जानकारीपूर्ण पैम्फलेट भी संलग्न किया।

जीरो एफआईआर क्या है और यह कैसे काम करती है

रहाटकर ने अपनी पोस्ट में समझाया कि किसी भी संज्ञेय अपराध (कॉग्निजेबल ऑफेंस) के मामले में पीड़ित महिला अपने नज़दीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करा सकती है, भले ही घटना उस थाने के क्षेत्राधिकार में न हुई हो। एक बार जीरो एफआईआर दर्ज होने के बाद, मामले को संबंधित पुलिस स्टेशन में स्थानांतरित कर दिया जाता है।

उन्होंने यह भी बताया कि यदि कोई पुलिस अधिकारी एफआईआर दर्ज करने से इनकार करे, तो महिला को लिखित शिकायत देनी चाहिए और किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से संपर्क करना चाहिए। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे अपने अधिकारों के प्रति सचेत रहें और आवाज़ उठाने में संकोच न करें।

महाराष्ट्र में 'शी इज़ अ चेंज मेकर' कार्यशाला

यह पोस्ट उस दिन आई जब रहाटकर ने एक दिन पहले महाराष्ट्र में पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों की चुनी हुई महिला प्रतिनिधियों के लिए एक क्षमता-निर्माण कार्यशाला की अध्यक्षता की थी। यशवंतराव चव्हाण एकेडमी ऑफ डेवलपमेंट एडमिनिस्ट्रेशन (YASHADA) के सहयोग से एमजीएम मेडिकल कॉलेज, छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित इस कार्यक्रम का नाम 'शी इज़ अ चेंज मेकर' रखा गया।

छत्रपति संभाजीनगर, जालना और बीड जिलों की चुनी हुई महिला प्रतिनिधियों ने इस कार्यशाला में भाग लिया। इनमें सरपंच, जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य और नगर परिषदों व नगर निगमों की निर्वाचित महिलाएं शामिल थीं। कार्यशाला में 300 से अधिक महिला प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

पहल का उद्देश्य और विस्तार

रहाटकर ने बताया कि राष्ट्रीय महिला आयोग और महाराष्ट्र सरकार के संयुक्त प्रयास से पूरे राज्य में 12 प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे, जिनकी शुरुआत छत्रपति संभाजीनगर से हो चुकी है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य चुनी हुई महिला प्रतिनिधियों को उनके अधिकारों और जिम्मेदारियों से भलीभांति परिचित कराना, प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समन्वय बनाना और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर निगरानी रखने में सक्षम बनाना है।

आम जनता पर असर

जीरो एफआईआर के प्रावधान की जानकारी ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की महिलाओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहाँ अक्सर क्षेत्राधिकार की जटिलताओं के कारण शिकायत दर्ज कराने में देरी होती है। गौरतलब है कि यह अधिकार दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) के तहत पहले से उपलब्ध है, किंतु जागरूकता के अभाव में इसका लाभ सीमित रहा है। रहाटकर की यह पहल जमीनी स्तर पर महिला नेतृत्व और कानूनी साक्षरता दोनों को एक साथ सशक्त करने की दिशा में एक ठोस कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में अधिकांश महिलाएं इससे अनजान हैं। रहाटकर की सोशल मीडिया अपील और महाराष्ट्र में 12 प्रशिक्षण शिविरों की योजना सही दिशा में है, लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब थाना स्तर पर अनुपालन सुनिश्चित हो। यह भी विचारणीय है कि जागरूकता अभियान तभी सार्थक होते हैं जब पुलिस तंत्र में जवाबदेही का ढाँचा मज़बूत हो — वरना अधिकार कागज़ों तक सीमित रह जाते हैं।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जीरो एफआईआर क्या होती है और यह सामान्य एफआईआर से कैसे अलग है?
जीरो एफआईआर वह शिकायत है जो किसी भी पुलिस स्टेशन में दर्ज की जा सकती है, चाहे अपराध उस थाने के क्षेत्राधिकार में हुआ हो या नहीं। दर्ज होने के बाद इसे संबंधित थाने में स्थानांतरित कर दिया जाता है, जबकि सामान्य एफआईआर केवल उसी थाने में दर्ज होती है जहाँ अपराध हुआ हो।
अगर पुलिस जीरो एफआईआर दर्ज करने से मना करे तो क्या करें?
NCW अध्यक्ष विजया रहाटकर के अनुसार, ऐसी स्थिति में महिला को लिखित शिकायत देनी चाहिए और किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से संपर्क करना चाहिए। यह अधिकार कानूनी रूप से संरक्षित है और इसके लिए आवाज़ उठाने में संकोच नहीं करना चाहिए।
'शी इज़ अ चेंज मेकर' कार्यशाला का उद्देश्य क्या है?
यह राष्ट्रीय महिला आयोग की पहल है जिसका उद्देश्य चुनी हुई महिला प्रतिनिधियों को उनके अधिकारों, जिम्मेदारियों और प्रशासनिक कौशल से लैस करना है। महाराष्ट्र में इस पहल के तहत 12 प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे।
महाराष्ट्र में इस कार्यशाला में कौन-कौन शामिल हुए?
छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित पहले शिविर में छत्रपति संभाजीनगर, जालना और बीड जिलों की 300 से अधिक महिला प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें सरपंच, जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य और नगर निकायों की निर्वाचित महिलाएं शामिल थीं।
राष्ट्रीय महिला आयोग महाराष्ट्र में कुल कितने प्रशिक्षण शिविर आयोजित करेगा?
महाराष्ट्र सरकार के सहयोग से राष्ट्रीय महिला आयोग पूरे राज्य में कुल 12 प्रशिक्षण शिविर आयोजित करेगा। इस श्रृंखला की शुरुआत 30 अगस्त को छत्रपति संभाजीनगर से हुई।
राष्ट्र प्रेस
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