जीरो एफआईआर महिलाओं का अधिकार: NCW अध्यक्ष विजया रहाटकर ने एक्स पर दी अहम जानकारी
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने रविवार, 30 अगस्त को महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करते हुए स्पष्ट किया कि जीरो एफआईआर दर्ज कराना हर महिला का अधिकार है — चाहे अपराध देश में कहीं भी हुआ हो। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक विस्तृत पोस्ट के माध्यम से यह संदेश साझा किया और साथ में एक जानकारीपूर्ण पैम्फलेट भी संलग्न किया।
जीरो एफआईआर क्या है और यह कैसे काम करती है
रहाटकर ने अपनी पोस्ट में समझाया कि किसी भी संज्ञेय अपराध (कॉग्निजेबल ऑफेंस) के मामले में पीड़ित महिला अपने नज़दीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करा सकती है, भले ही घटना उस थाने के क्षेत्राधिकार में न हुई हो। एक बार जीरो एफआईआर दर्ज होने के बाद, मामले को संबंधित पुलिस स्टेशन में स्थानांतरित कर दिया जाता है।
उन्होंने यह भी बताया कि यदि कोई पुलिस अधिकारी एफआईआर दर्ज करने से इनकार करे, तो महिला को लिखित शिकायत देनी चाहिए और किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से संपर्क करना चाहिए। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे अपने अधिकारों के प्रति सचेत रहें और आवाज़ उठाने में संकोच न करें।
महाराष्ट्र में 'शी इज़ अ चेंज मेकर' कार्यशाला
यह पोस्ट उस दिन आई जब रहाटकर ने एक दिन पहले महाराष्ट्र में पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों की चुनी हुई महिला प्रतिनिधियों के लिए एक क्षमता-निर्माण कार्यशाला की अध्यक्षता की थी। यशवंतराव चव्हाण एकेडमी ऑफ डेवलपमेंट एडमिनिस्ट्रेशन (YASHADA) के सहयोग से एमजीएम मेडिकल कॉलेज, छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित इस कार्यक्रम का नाम 'शी इज़ अ चेंज मेकर' रखा गया।
छत्रपति संभाजीनगर, जालना और बीड जिलों की चुनी हुई महिला प्रतिनिधियों ने इस कार्यशाला में भाग लिया। इनमें सरपंच, जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य और नगर परिषदों व नगर निगमों की निर्वाचित महिलाएं शामिल थीं। कार्यशाला में 300 से अधिक महिला प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
पहल का उद्देश्य और विस्तार
रहाटकर ने बताया कि राष्ट्रीय महिला आयोग और महाराष्ट्र सरकार के संयुक्त प्रयास से पूरे राज्य में 12 प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे, जिनकी शुरुआत छत्रपति संभाजीनगर से हो चुकी है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य चुनी हुई महिला प्रतिनिधियों को उनके अधिकारों और जिम्मेदारियों से भलीभांति परिचित कराना, प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समन्वय बनाना और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर निगरानी रखने में सक्षम बनाना है।
आम जनता पर असर
जीरो एफआईआर के प्रावधान की जानकारी ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की महिलाओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहाँ अक्सर क्षेत्राधिकार की जटिलताओं के कारण शिकायत दर्ज कराने में देरी होती है। गौरतलब है कि यह अधिकार दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) के तहत पहले से उपलब्ध है, किंतु जागरूकता के अभाव में इसका लाभ सीमित रहा है। रहाटकर की यह पहल जमीनी स्तर पर महिला नेतृत्व और कानूनी साक्षरता दोनों को एक साथ सशक्त करने की दिशा में एक ठोस कदम है।