ताशकंद में PM मोदी ने लाल बहादुर शास्त्री की प्रतिमा पर अर्पित किए पुष्प, उज्बेकिस्तान ने दिया सर्वोच्च सम्मान
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 अगस्त 2026 को ताशकंद स्थित पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की। यह स्मारक उज्बेकिस्तान की राजधानी के केंद्र में स्थित है, और इसके निकट की सड़क को 'शास्त्री स्ट्रीट' के नाम से जाना जाता है। यह श्रद्धांजलि 29-30 अगस्त 2026 की मोदी की उज्बेकिस्तान राजकीय यात्रा के अंतिम दिन अर्पित की गई।
शास्त्री स्मारक का ऐतिहासिक महत्व
पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का निधन 11 जनवरी 1966 को ताशकंद में हुआ था — ऐतिहासिक 'ताशकंद समझौते' पर हस्ताक्षर के ठीक अगले दिन। उनकी स्मृति में 1976 में एक कांस्य प्रतिमा (बस्ट) और स्मारक का अनावरण किया गया, जिसे प्रसिद्ध उज्बेक मूर्तिकार याकोव शापिरो ने तराशा था। विदेश मंत्रालय ने एक्स पोस्ट के माध्यम से जानकारी साझा करते हुए लिखा: 'शास्त्री जी का जीवन सादगी, साहस और देश के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक है। उनका कालजयी नारा 'जय जवान, जय किसान' आज भी पीढ़ियों को प्रेरित करता है।'
उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च राज्य सम्मान
रविवार को उज्बेकिस्तान सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी को देश के सर्वोच्च राज्य सम्मान 'ओली दाराजली दोस्तलिक' ऑर्डर से नवाज़ा। इससे पहले शनिवार को ताशकंद हवाई अड्डे पर उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने मोदी का भव्य स्वागत किया था। ताशकंद में लाल बहादुर शास्त्री सेंटर फॉर इंडियन कल्चर भी संचालित होता है, जो दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक सेतु का कार्य करता है।
द्विपक्षीय बैठक: व्यापार से रक्षा तक
मोदी और राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के बीच ताशकंद में द्विपक्षीय वार्ता हुई, जिसमें व्यापार, निवेश, रक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी, ऊर्जा और शिक्षा जैसे क्षेत्रों पर विस्तृत चर्चा हुई। दोनों देशों ने 2030 तक सालाना द्विपक्षीय व्यापार को 5 अरब डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य निर्धारित किया — जबकि फिलहाल यह आँकड़ा 1 अरब डॉलर से कुछ अधिक है। बैठक में यूरेनियम आपूर्ति पर भी चर्चा हुई, जो ऊर्जा सुरक्षा के नज़रिए से भारत के लिए महत्वपूर्ण है।
रक्षा सहयोग और आतंकवाद पर सहमति
बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि दोनों देश रक्षा क्षेत्र में सीधा सहयोग करेंगे, संयुक्त रूप से हथियारों का उत्पादन करेंगे और नई तकनीक विकसित करेंगे। दोनों पक्षों ने आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद को साझा खतरा मानते हुए इनके विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति जारी रखने पर सहमति जताई। गौरतलब है कि भारत और उज्बेकिस्तान के संबंधों की नींव साझी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत में निहित है।
आगे की यात्रा: SCO शिखर सम्मेलन
उज्बेकिस्तान यात्रा के समापन के बाद प्रधानमंत्री मोदी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक रवाना होंगे। यह यात्रा मध्य एशिया में भारत की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता की स्पष्ट झलक है।