एनसीडब्ल्यू सख्त: गुरुग्राम स्टैंड-अप कॉमेडी शो में महिला अपमान पर प्रणीत मोरे और हिमांशु जांगड़ा को नोटिस
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने 11 जून 2025 को हरियाणा के गुरुग्राम में आयोजित एक स्टैंड-अप कॉमेडी शो में महिला की गरिमा से जुड़े कथित आपत्तिजनक व्यवहार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने वायरल वीडियो और मीडिया रिपोर्टों के आधार पर हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को तत्काल एवं समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
कथित तौर पर शो के दौरान एक महिला के प्रति बिना सहमति से जुड़े आपत्तिजनक व्यवहार को मंच पर मनोरंजन के रूप में प्रस्तुत किया गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हुआ, जिसके बाद व्यापक सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने आई। यह ऐसे समय में आया है जब सार्वजनिक मंचों पर महिलाओं की गरिमा और सहमति को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ हो रही है।
एनसीडब्ल्यू ने स्पष्ट किया कि किसी भी ऐसे व्यवहार को सामान्य बनाना या उसका महिमामंडन करना — जो महिलाओं की सहमति, गरिमा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्रभावित करता हो — समाज पर गंभीर रूप से गलत प्रभाव डालता है।
एनसीडब्ल्यू की कार्रवाई और निर्देश
एनसीडब्ल्यू अध्यक्ष विजया रहाटकर ने हरियाणा के डीजीपी को पत्र लिखकर इस मामले में तुरंत, सख्त और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। आयोग ने सात दिनों के भीतर विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) तलब की है।
एटीआर में यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि क्या इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और अन्य संबंधित कानूनों के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। इसके अलावा आयोग ने यह भी जानना चाहा है कि आयोजकों, कलाकारों और वेन्यू प्रबंधन की इस घटना में क्या भूमिका रही तथा वायरल वीडियो की जाँच किस स्तर पर पहुँची है।
प्रणीत मोरे और हिमांशु जांगड़ा को नोटिस
आयोग ने इस मामले में प्रणीत मोरे और हिमांशु जांगड़ा को औपचारिक नोटिस जारी किया है। दोनों को 22 जून को शाम 4 बजे एनसीडब्ल्यू के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए तलब किया गया है।
भविष्य की रोकथाम पर निर्देश
एनसीडब्ल्यू ने राज्य पुलिस को यह भी बताने के निर्देश दिए हैं कि भविष्य में सार्वजनिक कार्यक्रमों और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर महिलाओं के विरुद्ध किसी भी प्रकार के अपमानजनक, हिंसक या आपत्तिजनक सामग्री को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। आयोग ने दोहराया कि सहमति के मुद्दे पर किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है और महिलाओं के विरुद्ध किसी भी जबरदस्ती या अपमान को मनोरंजन के रूप में प्रस्तुत करना कानून और संविधान के विरुद्ध है।
आगे की राह
एनसीडब्ल्यू ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले पर निरंतर नज़र बनाए रखेगा और संबंधित अधिकारियों से शीघ्र तथा उचित कार्रवाई की अपेक्षा करता है। गौरतलब है कि यह पहला मामला नहीं है जब आयोग ने मनोरंजन उद्योग में महिलाओं की गरिमा से जुड़े मुद्दों पर स्वतः संज्ञान लिया हो — यह प्रवृत्ति दर्शाती है कि सार्वजनिक मंचों पर जवाबदेही की माँग बढ़ रही है।