प्रणीत मोरे विवाद: CM फडणवीस बोले — स्टैंड-अप कॉमेडी में सामाजिक मर्यादा अनिवार्य, NCW ने 22 जून को तलब किया
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 12 जून को स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रणीत मोरे के विवादित शो पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक मौलिक अधिकार है, लेकिन इसका उपयोग सामाजिक संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए। इस बीच राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मोरे और सह-आरोपी हिमांशु जांगड़ा को 22 जून को आयोग के समक्ष उपस्थित होने का नोटिस जारी किया है।
मुख्यमंत्री फडणवीस की प्रतिक्रिया
फडणवीस ने कहा कि स्टैंड-अप कॉमेडी आज मनोरंजन का एक लोकप्रिय माध्यम बन चुकी है और उन्हें व्यक्तिगत रूप से भी ऐसे कार्यक्रम पसंद हैं। हालाँकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि जब अभिव्यक्ति की कोई शैली तय सीमाओं से आगे निकल जाती है, तो उसका असर समाज और आम लोगों पर पड़ सकता है। उनके अनुसार, कॉमेडियंस को यह समझना चाहिए कि उनके शब्द और प्रस्तुतियाँ समाज में किस तरह का संदेश देती हैं।
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि समाज, संस्कृति और लोगों की भावनाओं का सम्मान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ-साथ चलना चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब प्रणीत मोरे के शो के कुछ वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं और देशभर में तीखी बहस छिड़ी हुई है।
विवाद की पृष्ठभूमि
कॉमेडियन प्रणीत मोरे का स्टैंड-अप शो कथित तौर पर उन टिप्पणियों के कारण विवादों में घिरा, जिनमें महिलाओं, सहमति और मृत व्यक्तियों को लेकर आपत्तिजनक बातें कही गई बताई जाती हैं। शो से जुड़े वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर फैलने के बाद मामला तेज़ी से राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया। गौरतलब है कि यह ऐसे दौर में हुआ है जब स्टैंड-अप कॉमेडी की सीमाओं और जिम्मेदारी को लेकर सार्वजनिक बहस पहले से ही जारी है।
NCW की कार्रवाई
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने गुरुवार को इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया। आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने हरियाणा के पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर त्वरित और सख्त कार्रवाई की माँग की है। आयोग ने सात दिनों के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट माँगी है और यह भी जानना चाहा है कि भारतीय न्याय संहिता तथा अन्य संबंधित कानूनों के तहत एफआईआर दर्ज की गई है या नहीं। प्रणीत मोरे और हिमांशु जांगड़ा को 22 जून को आयोग के समक्ष उपस्थित होने का नोटिस जारी किया गया है।
महाराष्ट्र साइबर विभाग की जाँच
महाराष्ट्र साइबर विभाग ने भी इस मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, प्रणीत मोरे, हिमांशु जांगड़ा और डॉ. सेजल पवार समेत अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जाँच शुरू की गई है। मामले की जाँच भारतीय न्याय संहिता 2023 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत की जा रही है। संबंधित व्यक्तियों को पूछताछ के लिए समन भी जारी किए जा चुके हैं।
आगे क्या होगा
NCW की सुनवाई 22 जून को निर्धारित है, जबकि साइबर विभाग की जाँच समानांतर जारी है। यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, मंच की जिम्मेदारी और कानूनी सीमाओं के बीच की रेखा को लेकर एक व्यापक बहस की दिशा तय कर सकता है।