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'370 बिरयानी' विवाद: प्रियंका चतुर्वेदी बोलीं — 'सस्ती लोकप्रियता के लिए समाज का माइंडसेट खराब करना गलत'

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'370 बिरयानी' विवाद: प्रियंका चतुर्वेदी बोलीं — 'सस्ती लोकप्रियता के लिए समाज का माइंडसेट खराब करना गलत'

सारांश

'370 बिरयानी' विवाद ने एक बार फिर स्टैंडअप कॉमेडी की सीमाओं पर बहस छेड़ दी है। शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने साफ कहा — सस्ती लोकप्रियता के लिए समाज का माइंडसेट बिगाड़ना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी से पलायन है।

मुख्य बातें

शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने 13 जून 2026 को ' 370 बिरयानी ' विवाद पर प्रतिक्रिया दी।
कमीडियन प्रणीत मोरे की कॉमेडी शो में की गई टिप्पणी इस विवाद की जड़ में है।
चतुर्वेदी ने कहा — अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ सामाजिक संवेदनशीलता और जिम्मेदारी भी जरूरी है।
उन्होंने रणवीर इलाहाबादिया और समय रैना विवादों का भी हवाला दिया, जिन पर उन्होंने पहले भी बोला था।
मुंबई में TCS कर्मचारी की आत्महत्या पर भी चतुर्वेदी ने कंपनी से श्रम कानूनों और POSH नियमों के पालन पर जवाब माँगा।

शिवसेना (यूबीटी) की वरिष्ठ नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने 13 जून 2026 को स्टैंडअप कमीडियन प्रणीत मोरे के कॉमेडी शो में की गई विवादित टिप्पणी — जिसे '370 बिरयानी' विवाद के नाम से जाना जा रहा है — पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ सामाजिक संवेदनशीलता और जिम्मेदारी भी अनिवार्य रूप से जुड़ी होनी चाहिए।

विवाद की पृष्ठभूमि

स्टैंडअप कमीडियन प्रणीत मोरे द्वारा एक कॉमेडी शो के दौरान की गई एक टिप्पणी ने '370 बिरयानी' विवाद को जन्म दिया, जो तेज़ी से सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में फैल गया। यह ऐसे समय में आया है जब स्टैंडअप कॉमेडी की सीमाओं और सामाजिक जिम्मेदारी पर राष्ट्रीय बहस पहले से ही जारी है — रणवीर इलाहाबादिया और समय रैना से जुड़े विवादों के बाद से यह चर्चा और तेज़ हो गई है।

प्रियंका चतुर्वेदी का बयान

चतुर्वेदी ने कहा, 'जब रणवीर इलाहाबादिया और समय रैना से जुड़े मुद्दे उठे थे, तो मैंने उन पर भी बात की थी। मैंने कहा था कि कमीडियन को कुछ सीमाओं का ध्यान रखते हुए कॉमेडी पर ध्यान देना चाहिए। कई स्टैंड-अप कमीडियन स्वीकार्य सीमाओं के भीतर रहकर सफलतापूर्वक परफॉर्म करते हैं।'

उन्होंने आगे कहा, 'प्रणीत मोरे दर्शकों को समझते हैं, जानते हैं कि उनके जोक्स क्या हैं, और जानते हैं कि सवाल कैसे पूछें ताकि दर्शक और देखने वाले उसमें उलझ जाएं। कमीडियन को यह बताना जरूरी है कि समाज के दायरे में रहकर जो करेंगे, वह सबसे बेहतर होगा। लेकिन अगर सस्ती लोकप्रियता के जरिए पैसा कमाना चाहते हैं, तो वह समाज का माइंडसेट खराब करने का काम कर रहे हैं।'

टीसीएस कर्मचारी आत्महत्या पर कॉर्पोरेट जवाबदेही का सवाल

इसी बातचीत में चतुर्वेदी ने मुंबई में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के एक कर्मचारी की आत्महत्या के मामले पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सबसे पहला सवाल TCS से पूछा जाना चाहिए — 'जब कंपनी वैश्विक स्तर पर भारी मुनाफा कमाती है और भारत में हजारों लोगों को रोजगार देती है, तब वह बुनियादी श्रम कानूनों और कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम से जुड़े नियमों का पूरी तरह पालन क्यों नहीं कर रही है?'

उन्होंने माँग की कि जिन कंपनियों में श्रम कानूनों और नियमों का पालन नहीं हो रहा है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

व्यापक संदर्भ: कॉमेडी और जिम्मेदारी की बहस

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी स्टैंडअप कमीडियन की सामग्री ने राजनीतिक प्रतिक्रिया को आमंत्रित किया हो। आलोचकों का कहना है कि कला की स्वतंत्रता और सामाजिक उत्तरदायित्व के बीच की रेखा अक्सर धुंधली हो जाती है, और यही विवाद उस बहस को फिर से केंद्र में ले आया है। यह मामला आगे किस दिशा में जाता है, यह इस पर निर्भर करेगा कि संबंधित पक्ष सार्वजनिक रूप से क्या रुख अपनाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

कानूनी या नैतिक ढाँचा है? प्रियंका चतुर्वेदी की प्रतिक्रिया राजनीतिक रूप से सुरक्षित है, लेकिन 'सामाजिक दायरे' की परिभाषा कौन तय करेगा — यह सवाल अनुत्तरित रहता है। जब तक यह रेखा कानून नहीं, बल्कि राजनीतिक दबाव से खिंचती है, तब तक यह बहस हर नए विवाद के साथ वापस लौटती रहेगी।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'370 बिरयानी' विवाद क्या है?
यह विवाद स्टैंडअप कमीडियन प्रणीत मोरे द्वारा एक कॉमेडी शो के दौरान की गई एक टिप्पणी से उपजा है, जिसे सामाजिक रूप से आपत्तिजनक माना गया। इस टिप्पणी को '370 बिरयानी' नाम से जाना जा रहा है और यह सोशल मीडिया व राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है।
प्रियंका चतुर्वेदी ने इस मामले पर क्या कहा?
शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि सस्ती लोकप्रियता के लिए समाज का माइंडसेट खराब करना उचित नहीं है और कमीडियन को सामाजिक दायरे में रहकर काम करना चाहिए।
क्या प्रियंका चतुर्वेदी पहले भी कॉमेडियनों पर बोल चुकी हैं?
हाँ, चतुर्वेदी ने रणवीर इलाहाबादिया और समय रैना से जुड़े पिछले विवादों पर भी बात की थी। उन्होंने तब भी कहा था कि कमीडियन को स्वीकार्य सीमाओं के भीतर रहकर परफॉर्म करना चाहिए।
TCS कर्मचारी आत्महत्या मामले पर प्रियंका चतुर्वेदी ने क्या सवाल उठाए?
चतुर्वेदी ने TCS से पूछा कि वैश्विक स्तर पर भारी मुनाफा कमाने के बावजूद कंपनी बुनियादी श्रम कानूनों और कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकथाम (POSH) नियमों का पूरी तरह पालन क्यों नहीं कर रही। उन्होंने ऐसी कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की।
भारत में स्टैंडअप कॉमेडी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बहस क्यों बढ़ रही है?
रणवीर इलाहाबादिया, समय रैना और अब प्रणीत मोरे जैसे विवादों की श्रृंखला ने यह सवाल उठाया है कि कॉमेडी की सीमाएँ कहाँ खत्म होती हैं। आलोचकों का कहना है कि सामग्री की जिम्मेदारी केवल कानूनी नहीं, बल्कि नैतिक भी होनी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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