स्नेहिल दीक्षित मेहरा का प्रणित मोरे विवाद पर बयान: 'कॉमेडी सब्जेक्टिव, लेकिन जिम्मेदारी से बचना गलत'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता और कॉमिक कंटेंट क्रिएटर स्नेहिल दीक्षित मेहरा ने कॉमेडियन प्रणित मोरे के चर्चित '370 रुपए की बिरयानी' वीडियो विवाद पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। मुंबई में 13 जून को दिए एक बयान में उन्होंने स्पष्ट कहा कि प्रणित मोरे का आचरण पूरी तरह अनुचित था और उस वीडियो को सोशल मीडिया पर साझा करने की जिम्मेदारी सीधे उन्हीं पर है।
मुख्य बयान: जिम्मेदारी से मुँह नहीं मोड़ा जा सकता
स्नेहिल दीक्षित मेहरा ने कहा, 'प्रणित ने जो किया, वह पूरी तरह गलत था। उसी समय उन्हें न केवल अपनी बल्कि दर्शकों की महिला-विरोधी सोच पर भी सवाल उठाना चाहिए था, क्योंकि माइक उनके हाथ में था।' उन्होंने आगे कहा कि चूँकि यह एक बंद कमरे में रिकॉर्ड किया गया कार्यक्रम था, इसलिए विवाद वहीं समाप्त हो सकता था — लेकिन उस क्लिप को सोशल मीडिया प्रोफाइल पर अपलोड करने का निर्णय लेकर कंटेंट क्रिएटर ने स्वयं उसकी पूरी जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली।
कॉमेडी की सीमाएँ और कलाकार की भूमिका
स्नेहिल ने कॉमेडी की व्यक्तिपरक प्रकृति को स्वीकार करते हुए कहा कि हास्य एक बेहद बारीक कला है। उनके अनुसार, 'कॉमेडी ऐसी चीज़ है जो एक व्यक्ति को मज़ेदार लग सकती है, जबकि दूसरे को बिल्कुल भी पसंद न आए।' उन्होंने यह भी माना कि कई बार कलाकारों को स्वयं एहसास नहीं होता कि वे संवेदनशीलता की सीमा कब पार कर जाते हैं।
दर्शकों का निर्णय सर्वोपरि
स्नेहिल दीक्षित मेहरा ने ज़ोर देकर कहा कि किसी भी प्रस्तुति पर अंतिम फैसला उन लोगों का होता है जो उसे देखते और अनुभव करते हैं। उनके शब्दों में, 'आखिरकार, जो लोग उस कॉमेडी को सुनते हैं और उसका अनुभव करते हैं, वही बता सकते हैं कि वह वास्तव में कॉमेडी थी या फिर उसमें महिला-विरोधी सोच झलक रही थी।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब प्रणित मोरे का विवादित वीडियो सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना का केंद्र बना हुआ है।
विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि प्रणित मोरे का '370 रुपए की बिरयानी' वीडियो महिला-विरोधी टिप्पणियों के आरोपों के बाद से लगातार विवादों में है। यह विवाद इस बड़े सवाल को फिर से उठाता है कि भारतीय स्टैंड-अप कॉमेडी में सामग्री की नैतिक सीमा कहाँ तय होनी चाहिए और एक कंटेंट क्रिएटर की डिजिटल प्लेटफॉर्म पर क्या जिम्मेदारी होती है। स्नेहिल दीक्षित मेहरा जैसे अनुभवी कलाकारों की आवाज़ इस बहस को एक नई दिशा दे सकती है।