30 जुलाई 2026
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स्नेहिल दीक्षित मेहरा का प्रणित मोरे विवाद पर बयान: 'कॉमेडी सब्जेक्टिव, लेकिन जिम्मेदारी से बचना गलत'

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स्नेहिल दीक्षित मेहरा का प्रणित मोरे विवाद पर बयान: 'कॉमेडी सब्जेक्टिव, लेकिन जिम्मेदारी से बचना गलत'

सारांश

प्रणित मोरे के '370 रुपए की बिरयानी' विवाद पर स्नेहिल दीक्षित मेहरा का सीधा जवाब — माइक हाथ में था तो जिम्मेदारी भी थी, और सोशल मीडिया पर अपलोड करने का फैसला उस जिम्मेदारी को और बड़ा बना देता है। कॉमेडी सब्जेक्टिव हो सकती है, लेकिन संवेदनशीलता वैकल्पिक नहीं।

मुख्य बातें

अभिनेता और कॉमिक कंटेंट क्रिएटर स्नेहिल दीक्षित मेहरा ने प्रणित मोरे के '370 रुपए की बिरयानी' वीडियो विवाद की निंदा की।
स्नेहिल के अनुसार, वीडियो को सोशल मीडिया पर अपलोड करने का निर्णय लेने से कंटेंट क्रिएटर की पूरी जिम्मेदारी तय हो जाती है।
उन्होंने माना कि कॉमेडी व्यक्तिपरक है और कलाकारों को अक्सर एहसास नहीं होता कि वे संवेदनशीलता की सीमा कब पार कर रहे हैं।
किसी प्रस्तुति पर अंतिम निर्णय दर्शकों और प्रभावित लोगों का होता है — यह स्नेहिल का स्पष्ट मत है।
यह विवाद भारतीय स्टैंड-अप कॉमेडी में नैतिक सीमाओं और डिजिटल जिम्मेदारी पर बहस को नई धार दे रहा है।

अभिनेता और कॉमिक कंटेंट क्रिएटर स्नेहिल दीक्षित मेहरा ने कॉमेडियन प्रणित मोरे के चर्चित '370 रुपए की बिरयानी' वीडियो विवाद पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। मुंबई में 13 जून को दिए एक बयान में उन्होंने स्पष्ट कहा कि प्रणित मोरे का आचरण पूरी तरह अनुचित था और उस वीडियो को सोशल मीडिया पर साझा करने की जिम्मेदारी सीधे उन्हीं पर है।

मुख्य बयान: जिम्मेदारी से मुँह नहीं मोड़ा जा सकता

स्नेहिल दीक्षित मेहरा ने कहा, 'प्रणित ने जो किया, वह पूरी तरह गलत था। उसी समय उन्हें न केवल अपनी बल्कि दर्शकों की महिला-विरोधी सोच पर भी सवाल उठाना चाहिए था, क्योंकि माइक उनके हाथ में था।' उन्होंने आगे कहा कि चूँकि यह एक बंद कमरे में रिकॉर्ड किया गया कार्यक्रम था, इसलिए विवाद वहीं समाप्त हो सकता था — लेकिन उस क्लिप को सोशल मीडिया प्रोफाइल पर अपलोड करने का निर्णय लेकर कंटेंट क्रिएटर ने स्वयं उसकी पूरी जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली।

कॉमेडी की सीमाएँ और कलाकार की भूमिका

स्नेहिल ने कॉमेडी की व्यक्तिपरक प्रकृति को स्वीकार करते हुए कहा कि हास्य एक बेहद बारीक कला है। उनके अनुसार, 'कॉमेडी ऐसी चीज़ है जो एक व्यक्ति को मज़ेदार लग सकती है, जबकि दूसरे को बिल्कुल भी पसंद न आए।' उन्होंने यह भी माना कि कई बार कलाकारों को स्वयं एहसास नहीं होता कि वे संवेदनशीलता की सीमा कब पार कर जाते हैं।

दर्शकों का निर्णय सर्वोपरि

स्नेहिल दीक्षित मेहरा ने ज़ोर देकर कहा कि किसी भी प्रस्तुति पर अंतिम फैसला उन लोगों का होता है जो उसे देखते और अनुभव करते हैं। उनके शब्दों में, 'आखिरकार, जो लोग उस कॉमेडी को सुनते हैं और उसका अनुभव करते हैं, वही बता सकते हैं कि वह वास्तव में कॉमेडी थी या फिर उसमें महिला-विरोधी सोच झलक रही थी।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब प्रणित मोरे का विवादित वीडियो सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना का केंद्र बना हुआ है।

विवाद की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि प्रणित मोरे का '370 रुपए की बिरयानी' वीडियो महिला-विरोधी टिप्पणियों के आरोपों के बाद से लगातार विवादों में है। यह विवाद इस बड़े सवाल को फिर से उठाता है कि भारतीय स्टैंड-अप कॉमेडी में सामग्री की नैतिक सीमा कहाँ तय होनी चाहिए और एक कंटेंट क्रिएटर की डिजिटल प्लेटफॉर्म पर क्या जिम्मेदारी होती है। स्नेहिल दीक्षित मेहरा जैसे अनुभवी कलाकारों की आवाज़ इस बहस को एक नई दिशा दे सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस बड़े सवाल को टालता है जो भारतीय स्टैंड-अप कॉमेडी के सामने है — क्या 'सब्जेक्टिव' की आड़ में महिला-विरोधी सामग्री को सामान्य बनाया जा रहा है? कलाकार जब यह कहते हैं कि 'दर्शक तय करेंगे', तो वे उस भीड़ की जिम्मेदारी को नज़रअंदाज़ करते हैं जो ऐसे कंटेंट पर हँसती है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाखों व्यूज़ के साथ आती है एल्गोरिदमिक ज़िम्मेदारी — जिसे 'क्लोज़्ड रूम' का तर्क ढक नहीं सकता। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक रही है वह यह है कि यह पहली बार नहीं है; भारतीय कॉमेडी इंडस्ट्री में यह बहस हर कुछ महीनों में लौटती है और हर बार बिना किसी संरचनात्मक बदलाव के शांत हो जाती है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रणित मोरे का '370 रुपए की बिरयानी' विवाद क्या है?
कॉमेडियन प्रणित मोरे का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिसमें महिला-विरोधी टिप्पणियों के आरोप लगे हैं। इस वीडियो को '370 रुपए की बिरयानी' के नाम से जाना जा रहा है और यह तीखी सार्वजनिक आलोचना का केंद्र बना हुआ है।
स्नेहिल दीक्षित मेहरा ने प्रणित मोरे के बारे में क्या कहा?
स्नेहिल दीक्षित मेहरा ने कहा कि प्रणित मोरे का आचरण पूरी तरह गलत था और उस वीडियो को सोशल मीडिया पर अपलोड करने का फैसला लेकर उन्होंने उसकी संपूर्ण जिम्मेदारी स्वयं पर ले ली। उनके अनुसार, माइक हाथ में होने पर कलाकार को महिला-विरोधी सोच पर सवाल उठाना चाहिए था।
क्या कॉमेडी में हर तरह की सामग्री स्वीकार्य है?
स्नेहिल दीक्षित मेहरा के अनुसार, कॉमेडी व्यक्तिपरक है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर सामग्री स्वीकार्य हो। कलाकार की जिम्मेदारी है कि वह संवेदनशीलता की सीमाओं का ध्यान रखे, खासकर जब वह सामग्री सार्वजनिक मंच पर साझा की जा रही हो।
इस विवाद में दर्शकों की क्या भूमिका है?
स्नेहिल दीक्षित मेहरा ने कहा कि किसी भी कॉमेडी प्रस्तुति पर अंतिम निर्णय दर्शकों और प्रभावित होने वाले लोगों का होता है। जो लोग उस कॉमेडी को सुनते और अनुभव करते हैं, वही तय कर सकते हैं कि वह वास्तव में कॉमेडी थी या महिला-विरोधी सोच।
यह विवाद भारतीय कॉमेडी इंडस्ट्री के लिए क्यों अहम है?
यह विवाद डिजिटल युग में कंटेंट क्रिएटर्स की जिम्मेदारी और स्टैंड-अप कॉमेडी में नैतिक सीमाओं पर बहस को फिर से केंद्र में ले आया है। भारत में सोशल मीडिया पर कॉमेडी कंटेंट की पहुँच करोड़ों लोगों तक है, इसलिए इस तरह के विवाद पूरे इंडस्ट्री को प्रभावित करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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