केईएम अस्पताल की एमबीबीएस छात्रा सेजल पवार के विवादित बयान पर जांच समिति गठित, शव-सम्मान पर उठे सवाल
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई के प्रतिष्ठित केईएम अस्पताल की एमबीबीएस थर्ड-ईयर छात्रा सेजल पवार का एक कथित विवादित बयान 12 जून 2026 को सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लेते हुए दो सदस्यीय विशेष जांच समिति गठित कर दी है। यह बयान कॉमेडियन प्रणीत मोरे के एक लाइव शो के दौरान दिया गया था, जिसमें मेडिकल शिक्षा के लिए दान किए गए शवों के अंगों को लेकर कथित तौर पर अनुचित टिप्पणी की गई।
विवाद की जड़: क्या हुआ शो में
कॉमेडियन प्रणीत मोरे के लाइव शो में दर्शकों के बीच मौजूद सेजल पवार से मेडिकल कॉलेज की पढ़ाई और एनाटॉमी से जुड़े विषयों पर बातचीत हो रही थी। इसी दौरान वायरल वीडियो के अनुसार, सेजल पवार ने कथित तौर पर कहा कि वे और उनके कुछ साथी मेडिकल रिसर्च व डिसेक्शन के लिए दान किए गए पुरुषों के शवों के प्राइवेट पार्ट्स को देखते और उनका मज़ाक उड़ाते थे।
यह वीडियो तेज़ी से सोशल मीडिया पर फैल गया और चिकित्सा समुदाय, आम नागरिकों और शव-दान को बढ़ावा देने वाले संगठनों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आईं। गौरतलब है कि मेडिकल शिक्षा में शव-दान एक अत्यंत संवेदनशील और सम्मानजनक प्रक्रिया मानी जाती है, जिस पर एनाटॉमी शिक्षण की नींव टिकी होती है।
केईएम प्रशासन की प्रतिक्रिया
अस्पताल के डीन डॉ. हरीश पाठक ने इस मामले में तत्काल कार्रवाई का आश्वासन देते हुए कहा, 'सेजल पवार के स्टैंड-अप शो के दौरान दिए गए बयान के विवाद पर उचित कार्रवाई की जा रही है।' उन्होंने बताया कि दो सदस्यीय विशेष समिति बनाई गई है, जिसमें अंडरग्रेजुएट हॉस्टल की वार्डन एवं बायोकेमिस्ट्री विभाग की एचओडी डॉ. अनीता चालक और मेडिसिन विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर व सोशल मीडिया मैनेजमेंट से जुड़ी डॉ. श्रद्धा मोरे शामिल हैं।
डॉ. पाठक ने आगे कहा, 'मेडिकल प्रोफेशन में शवों को लेकर हमेशा सम्मान का भाव होता है और छात्रों को इसकी शपथ भी दिलाई जाती है। ऐसे में इस तरह की टिप्पणी चिकित्सा पेशे की गरिमा को ठेस पहुँचाती है।'
सेजल पवार की वर्तमान स्थिति
फ़िलहाल सेजल पवार को केईएम अस्पताल से निलंबित नहीं किया गया है। अस्पताल प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी अनुशासनात्मक कार्रवाई से पहले जांच समिति की रिपोर्ट का इंतज़ार किया जाएगा, ताकि पूरे मामले की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सके। प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि इस मामले में किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी।
चिकित्सा नैतिकता और शव-दान पर असर
यह प्रकरण ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में शव-दान को प्रोत्साहित करने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएँ शव-दान की प्रवृत्ति को हतोत्साहित कर सकती हैं, क्योंकि दानकर्ता परिवारों का विश्वास सीधे तौर पर प्रभावित होता है। मेडिकल काउंसिल के दिशानिर्देशों के अनुसार, छात्रों को एनाटॉमी प्रयोगशाला में प्रवेश से पहले शव के प्रति सम्मान की शपथ दिलाई जाती है।
आगे क्या होगा
गठित विशेष समिति वायरल वीडियो की समीक्षा करेगी और अपनी रिपोर्ट अस्पताल प्रशासन को सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर सेजल पवार के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा। यह मामला मेडिकल छात्रों के सोशल मीडिया व सार्वजनिक मंचों पर आचरण को लेकर व्यापक बहस छेड़ने वाला साबित हो सकता है।