केईएम की MBBS छात्रा सेजल पवार को 15 दिन की फोर्स लीव, शव-अंगों पर विवादित टिप्पणी पर जांच
सारांश
मुख्य बातें
केईएम अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज, मुंबई की थर्ड-ईयर MBBS छात्रा सेजल पवार को 13 जून 2026 को 15 दिन की फोर्स लीव पर भेज दिया गया है। कॉमेडियन प्रणित मोरे के एक लाइव स्टैंड-अप शो में दिए गए उनके कथित बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लेते हुए यह कार्रवाई की। साथ ही पाँच सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है, जिसे 7 दिनों में अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी।
मामले की पृष्ठभूमि
विवाद की शुरुआत कॉमेडियन प्रणित मोरे के एक लाइव शो से हुई, जिसमें दर्शकों के बीच बैठीं सेजल पवार से मेडिकल पढ़ाई और एनाटॉमी से जुड़े विषयों पर बातचीत की गई। इसी दौरान उन्होंने कथित तौर पर ऐसी टिप्पणी की जो विवादास्पद साबित हुई। वायरल वीडियो में सेजल पवार को यह कहते सुना जा सकता है कि वे और उनके कुछ साथी मेडिकल रिसर्च व डिसेक्शन के लिए दान किए गए पुरुषों के शवों के प्राइवेट पार्ट्स को देखकर उनका मजाक उड़ाते थे।
यह टिप्पणी चिकित्सा शिक्षा में शव-दान की गरिमा और नैतिकता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। गौरतलब है कि शव-दान एक अत्यंत संवेदनशील और सम्मानजनक प्रक्रिया है, जिसके बिना मेडिकल छात्रों की व्यावहारिक शिक्षा संभव नहीं।
प्रशासन की कार्रवाई
प्रारंभिक जांच में यह स्थापित हो गया कि वायरल वीडियो में दिखाई देने वाली व्यक्ति सेजल पवार ही हैं। अस्पताल प्रशासन ने माना कि उनके द्वारा कही गई बातें संस्थान की नैतिक आचार-संहिता के अनुरूप नहीं हैं। इसके बाद संस्थान ने उन्हें तत्काल 15 दिन की फोर्स लीव पर भेजने का निर्णय लिया और उन्हें उनके परिवार के हवाले कर दिया गया।
इस अवधि के दौरान सेजल पवार को केईएम अस्पताल परिसर, मेडिकल कॉलेज और हॉस्टल — तीनों में प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। वे कॉलेज की किसी भी शैक्षणिक या अन्य गतिविधि में भाग नहीं ले सकेंगी।
डीन की प्रतिक्रिया
अस्पताल के डीन हरीश पाठक ने कहा कि स्टैंड-अप शो के दौरान दिए गए बयान के विवाद पर उचित कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाँच सदस्यीय जांच समिति अगले 7 दिनों में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
आम जनता और चिकित्सा समुदाय पर असर
इस घटना ने चिकित्सा समुदाय और शव-दाताओं के परिजनों में गहरी पीड़ा और आक्रोश उत्पन्न किया है। आलोचकों का कहना है कि मेडिकल छात्रों में नैतिकता और संवेदनशीलता की शिक्षा को पाठ्यक्रम में और अधिक प्रभावी ढंग से शामिल किया जाना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब भारत में शव-दान को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
आगे क्या होगा
जांच समिति की रिपोर्ट के बाद संस्थान सेजल पवार के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई का निर्णय लेगा। यह मामला मेडिकल काउंसिल के संज्ञान में भी आ सकता है। फिलहाल 15 दिन की फोर्स लीव की अवधि पूरी होने तक उनकी शैक्षणिक स्थिति निलंबित मानी जाएगी।