21 सितंबर 2026
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प्रणित मोरे की एफआईआर क्लब करने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, महाराष्ट्र व हरियाणा को भेजा नोटिस

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प्रणित मोरे की एफआईआर क्लब करने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, महाराष्ट्र व हरियाणा को भेजा नोटिस

सारांश

'₹370 बिरयानी' विवाद अब सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे तक पहुँच गया है। स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रणित मोरे ने अलग-अलग राज्यों में दर्ज एफआईआर को क्लब करने की माँग की है और कोर्ट ने केंद्र, महाराष्ट्र व हरियाणा को नोटिस भेज दिया है। यह मामला कॉमेडी और महिला सम्मान की सीमाओं पर एक बड़ा न्यायिक सवाल बन गया है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 21 सितंबर 2026 को स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रणित मोरे की एफआईआर क्लब याचिका पर केंद्र सरकार, महाराष्ट्र और हरियाणा सरकार को नोटिस जारी किया।
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी.
महाराष्ट्र साइबर पुलिस और गुरुग्राम पुलिस ने प्रणित मोरे व हिमांशु जांगड़ा के खिलाफ अलग-अलग एफआईआर दर्ज की थीं।
राष्ट्रीय महिला आयोग ने मामले में संज्ञान लेकर दोनों को तलब किया था और हरियाणा के पुलिस महानिदेशक से कार्रवाई माँगी थी।
प्रणित मोरे सार्वजनिक रूप से माफी मांग चुके हैं; हिमांशु जांगड़ा को अपनी नौकरी गँवानी पड़ी।
विवादित वीडियो एफआईआर दर्ज होने से पहले ही हटा दिया गया था और मोरे की पीआर टीम ने पोस्ट करने से पहले उनकी मंजूरी नहीं ली थी।

सर्वोच्च न्यायालय ने 21 सितंबर 2026 को स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रणित मोरे की उस याचिका पर केंद्र सरकार, महाराष्ट्र सरकार और हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है, जिसमें उन्होंने अलग-अलग राज्यों में दर्ज अपने खिलाफ की एफआईआर को एक साथ क्लब करने की माँग की है। यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुए '₹370 बिरयानी' विवाद से जुड़ा है, जिसने राष्ट्रव्यापी बहस छेड़ दी थी।

मामले की सुनवाई और कोर्ट की बेंच

इस याचिका की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने की। मोरे की ओर से पेश वकील ने न्यायालय को बताया कि अलग-अलग राज्यों में दर्ज एफआईआर में लगाए गए आरोप लगभग एक समान हैं, इसलिए इन मामलों को एकसाथ सुना जाना उचित होगा।

वकील ने यह भी बताया कि प्रणित मोरे सार्वजनिक रूप से माफी मांग चुके हैं और वे मामले में ट्रायल का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इसके अतिरिक्त, विवादित वीडियो क्लिप को एफआईआर दर्ज होने से पहले ही हटा दिया गया था। वकील ने यह भी स्पष्ट किया कि वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से पूर्व मोरे की पीआर टीम ने उनसे मंजूरी नहीं ली थी।

विवाद की पृष्ठभूमि और '₹370 बिरयानी' प्रकरण

इस पूरे विवाद की जड़ गुरुग्राम में हुए प्रणित मोरे के एक स्टैंड-अप कॉमेडी शो में है। उस शो के दौरान दर्शकों में मौजूद हिमांशु जांगड़ा नामक युवक ने अपनी एक डेट का अनुभव सुनाया और बताया कि उसने चिकन बिरयानी पर करीब ₹370 खर्च किए थे। इसके बाद उसने एक ऐसी टिप्पणी की जिसे महिलाओं के प्रति अत्यंत आपत्तिजनक माना गया।

वायरल क्लिप में हिमांशु ने यह संकेत दिया था कि डेट पर ₹370 खर्च करने के बाद उसे शारीरिक संबंध की उम्मीद थी, और जब लड़की ने उसे घर छोड़ने को कहा तब भी उसने खर्च 'वसूलने' जैसी बात कही। वायरल वीडियो में प्रणित मोरे हिमांशु की इस बात पर हँसते दिखाई दिए और उन्होंने इसे 'पीक गुरुग्राम कंटेंट' कहा। आलोचकों का कहना था कि मोरे को उस बातचीत पर रोक लगानी चाहिए थी, लेकिन इसके बजाय उन्होंने हँसकर उसे आगे बढ़ाया।

राष्ट्रीय महिला आयोग और पुलिस की कार्रवाई

विवाद के बढ़ने पर राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया। आयोग ने प्रणित मोरे और हिमांशु जांगड़ा दोनों को तलब किया और हरियाणा के पुलिस महानिदेशक से भी मामले में कार्रवाई करने को कहा। आयोग का स्पष्ट कहना था कि वायरल वीडियो में कही गई बातें महिला के विरुद्ध जबरदस्ती और सहमति जैसे गंभीर मुद्दों को हल्के में लेने वाली प्रतीत होती हैं। इसके बाद गुरुग्राम पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज की।

इसके अलावा, महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने भी प्रणित मोरे, हिमांशु जांगड़ा और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ अलग से एफआईआर दर्ज की। यानी एक ही विवाद से जुड़े मामले अलग-अलग राज्यों में एक साथ चलने लगे, जिसके चलते मोरे को सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

माफी और उसके बाद

विवाद बढ़ने के बाद प्रणित मोरे ने सोशल मीडिया पर सार्वजनिक माफी मांगी। उन्होंने एक वीडियो जारी करते हुए स्वीकार किया कि उस बातचीत के दौरान उन्हें हस्तक्षेप करना चाहिए था, लेकिन वे भीड़ की प्रतिक्रिया में बह गए। दूसरी ओर, हिमांशु जांगड़ा को इस विवाद के बाद अपनी नौकरी भी गँवानी पड़ी। अब सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद तीनों प्रतिवादियों — केंद्र, महाराष्ट्र और हरियाणा सरकार — की प्रतिक्रिया पर सबकी नजर टिकी है।

आगे क्या होगा

सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने नोटिस जारी कर तीनों पक्षों से जवाब माँगा है। यदि कोर्ट एफआईआर को क्लब करने की अनुमति देती है तो सभी मामलों की सुनवाई एक ही न्यायालय में होगी, जिससे मोरे को अलग-अलग राज्यों में पेश होने से राहत मिलेगी। यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, कॉमेडी की सीमाओं और महिला सम्मान के बीच संतुलन पर एक महत्वपूर्ण न्यायिक दृष्टांत भी स्थापित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या यह मामला भी महज प्रक्रियात्मक राहत तक सिमट कर रह जाएगा।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रणित मोरे ने सुप्रीम कोर्ट में क्या माँग की है?
स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रणित मोरे ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर माँग की है कि महाराष्ट्र और हरियाणा सहित अलग-अलग राज्यों में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को एक साथ क्लब किया जाए। उनके वकील का तर्क है कि सभी एफआईआर में आरोप लगभग एक जैसे हैं, इसलिए इन्हें एक ही अदालत में सुना जाना उचित है।
'₹370 बिरयानी' विवाद क्या है?
यह विवाद गुरुग्राम में हुए प्रणित मोरे के एक स्टैंड-अप कॉमेडी शो से शुरू हुआ, जहाँ दर्शक हिमांशु जांगड़ा ने डेट पर ₹370 बिरयानी खर्च करने का अनुभव सुनाया और महिला के प्रति अत्यंत आपत्तिजनक टिप्पणी की। वायरल वीडियो में प्रणित मोरे इस पर हँसते और इसे 'पीक गुरुग्राम कंटेंट' कहते दिखे, जिससे व्यापक विरोध हुआ।
सुप्रीम कोर्ट ने किसे और क्यों नोटिस भेजा है?
सर्वोच्च न्यायालय ने 21 सितंबर 2026 को केंद्र सरकार, महाराष्ट्र सरकार और हरियाणा सरकार को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस प्रणित मोरे की उस याचिका पर जारी किया गया है जिसमें उन्होंने एफआईआर क्लब करने की माँग की है, और अब तीनों सरकारों को अपना जवाब दाखिल करना होगा।
राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस मामले में क्या भूमिका निभाई?
राष्ट्रीय महिला आयोग ने विवादित वीडियो पर स्वतः संज्ञान लेते हुए प्रणित मोरे और हिमांशु जांगड़ा दोनों को तलब किया। आयोग ने हरियाणा के पुलिस महानिदेशक से कार्रवाई करने को भी कहा और स्पष्ट किया कि वीडियो में कही गई बातें महिला के विरुद्ध सहमति और जबरदस्ती जैसे गंभीर मुद्दों को हल्के में लेती हैं।
इस मामले में अब तक कौन-कौन सी कानूनी कार्रवाई हो चुकी है?
गुरुग्राम पुलिस और महाराष्ट्र साइबर पुलिस दोनों ने प्रणित मोरे, हिमांशु जांगड़ा और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं। इसके बाद मोरे ने सभी एफआईआर को क्लब करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जहाँ अब तीनों सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब माँगा गया है।
राष्ट्र प्रेस
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