'महिला कोई वस्तु नहीं': '370 रुपए की बिरयानी' टिप्पणी पर शाइना एनसी का कड़ा प्रहार
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना नेता शाइना एनसी ने 13 जून 2026 को मुंबई में कॉमेडियन प्रणित मोरे के स्टैंड-अप शो में की गई '370 रुपए की बिरयानी' वाली विवादास्पद टिप्पणी की कड़ी निंदा की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी महिला को इस तरह वस्तु की तरह देखना समाज के लिए शर्मनाक है और ऐसी मानसिकता को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
मुख्य विवाद: क्या था प्रणित मोरे का बयान
कॉमेडियन प्रणित मोरे के एक शो के दौरान की गई टिप्पणी में महिलाओं को ₹370 खर्च कर 'हासिल' करने की भाषा का इस्तेमाल किया गया, जिसे व्यापक रूप से आपत्तिजनक माना गया। शाइना एनसी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'हम सभी स्टैंड-अप कॉमेडी सुनते हैं। कॉमेडियन का काम लोगों को हंसाना होता है, लेकिन उसे अपनी मर्यादा और दायरे में रहना चाहिए। प्रणित मोरे ने जो किया, वह बिल्कुल निंदनीय है। महिला कोई वस्तु नहीं है कि ₹370 खर्च करके उसे हासिल कर लिया जाए। ऐसी सोच बेहद घिनौनी है।'
महिला सशक्तिकरण और कानून की दरकार
शाइना एनसी ने आगे कहा कि यदि कोई महिला सशक्त और पेशेवर है, तो उसे वस्तु की दृष्टि से देखना और भी अधिक निंदनीय है। उन्होंने कहा, 'आपने किसी महिला को खरीदा नहीं है — यह समझना अत्यंत आवश्यक है।' उन्होंने महाराष्ट्र सरकार की कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि कानून का भय बनाए रखना ज़रूरी है।
डॉ. सेजल प्रकरण: मेडिकल समुदाय की आवाज़
शाइना एनसी ने डॉ. सेजल द्वारा किसी शव के निजी अंग को लेकर की गई टिप्पणी पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों के प्रति समाज में आदर और सम्मान का भाव होता है, इसलिए ऐसी टिप्पणी और भी आपत्तिजनक है। उन्होंने कहा, 'मैं खुश हूं कि उन्होंने माफी मांग ली है, लेकिन पूरे मेडिकल समुदाय ने जो आवाज़ उठाई, वह पूरी तरह जायज़ है — यह कोई मज़ाक का विषय नहीं है।'
गुटखा तस्करी, संजय राउत और टीसीएस पर भी बोलीं
एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे द्वारा महाराष्ट्र में गुटखा तस्करों के खिलाफ मकोका के तहत कार्रवाई के आदेश पर शाइना एनसी ने कहा कि मुंढे का उद्देश्य सही है और जागरूकता अभियान की आवश्यकता है। शिवसेना (उद्धव गुट) के नेता संजय राउत द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'अघोरी' कहे जाने पर उन्होंने कहा कि ऐसे बयानों से राउत की हताशा साफ दिखती है। टीसीएस मामले पर उन्होंने कहा कि टाटा समूह को कार्यस्थल पर सांप्रदायिक सौहार्द सुनिश्चित करना चाहिए और किसी भी प्रकार की कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा नहीं मिलना चाहिए।
शाइना एनसी की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब महिलाओं की गरिमा और कॉमेडी की सीमाओं को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ हो रही है — और यह सवाल उठ रहा है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में महिलाओं के अपमान को कब तक सहन किया जाएगा।