सना मलिक के कुरान-कानून बयान पर शायना एनसी का तीखा जवाब: 'यह पाकिस्तान नहीं, नया भारत है'
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना नेता और प्रवक्ता शायना एनसी ने 25 जून 2026 को राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) की विधायक सना मलिक के उस विवादास्पद बयान पर कड़ा पलटवार किया, जिसमें मलिक ने ट्रिपल तलाक, बहुविवाह का समर्थन करते हुए भारत में कुरान-आधारित कानून लागू करने की मांग की थी। शायना एनसी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत में 'तालिबानी मानसिकता' के लिए कोई स्थान नहीं है।
शायना एनसी का सीधा सवाल
शायना एनसी ने कहा, 'सना मलिक, यह पाकिस्तान नहीं है, यह नया भारत है। यहां तालिबानी मानसिकता के लिए कोई जगह नहीं है। आपने महिलाओं के खिलाफ जो रुख अपनाया है, उसमें जेंडर इक्वालिटी कहां है? मैं पूछना चाहती हूं, अगर आपके पति चार महिलाओं से शादी करते हैं, तो क्या आपको यह मंजूर होगा?'
यह बयान ऐसे समय में आया है जब समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर राष्ट्रीय बहस एक बार फिर तेज हो रही है। शायना एनसी ने यूनिफॉर्म सिविल कोड का समर्थन करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य सभी को न्याय देना है, किसी का तुष्टिकरण नहीं।
UCC और ट्रिपल तलाक पर शायना का रुख
शायना एनसी ने कहा, 'जब हम समान नागरिक संहिता की बात करते हैं, तो हमारा एकमात्र लक्ष्य होता है — सभी को न्याय और किसी का तुष्टिकरण नहीं। चाहे हिंदू हों, मुस्लिम हों, सिख हों या ईसाई, सभी को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।' उन्होंने यह भी कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रिपल तलाक को समाप्त कर दिया है, तो मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और शरिया की दुहाई देना उचित नहीं है।
गौरतलब है कि ट्रिपल तलाक को 2019 में कानूनी रूप से अपराध घोषित किया गया था, जिसे सरकार ने मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया था। इस पृष्ठभूमि में सना मलिक का बयान विपक्षी खेमे में भी असहजता पैदा करने वाला माना जा रहा है।
NCERT पाठ्यपुस्तक और आपातकाल का अध्याय
इसी बातचीत में शायना एनसी ने एनसीईआरटी द्वारा कक्षा 9 की पाठ्यपुस्तक में 1975-77 के आपातकाल पर एक अध्याय शामिल किए जाने का स्वागत किया। उन्होंने कहा, 'आपातकाल भारत के इतिहास का एक काला अध्याय था। अभिव्यक्ति की आज़ादी, मौलिक अधिकारों, प्रेस सेंसरशिप, लोगों को जेल भेजने और नसबंदी अभियान जैसी चीज़ों के बारे में आज की युवा पीढ़ी को जानना बहुत ज़रूरी है।'
उन्होंने जेपी आंदोलन का भी उल्लेख करते हुए कहा कि हो सकता है आज की युवा पीढ़ी को इसके बारे में पता भी न हो। उनके अनुसार, भारत को एक विकसित लोकतंत्र बनाने के लिए जिन लोगों ने बलिदान और संघर्ष किया, उनकी गाथा नई पीढ़ी तक पहुंचनी चाहिए।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
सना मलिक राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) की विधायक हैं। उनका यह बयान महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस छेड़ गया है, जहाँ महायुति गठबंधन में शामिल शिवसेना (शिंदे गुट) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पहले से ही UCC को प्रमुख एजेंडा बना चुकी हैं। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान सामाजिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देते हैं।
आगे क्या
शायना एनसी के इस पलटवार के बाद सना मलिक की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। महाराष्ट्र की राजनीति में यह विवाद आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है, खासकर तब जब UCC पर केंद्र सरकार की नीति स्पष्ट होने की प्रतीक्षा है।