22 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

प्रियंका चतुर्वेदी का भाजपा पर आरोप: वंदे मातरम की आड़ में छुपाए जा रहे बेरोज़गारी और महंगाई के असली मुद्दे

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
प्रियंका चतुर्वेदी का भाजपा पर आरोप: वंदे मातरम की आड़ में छुपाए जा रहे बेरोज़गारी और महंगाई के असली मुद्दे

सारांश

शिवसेना (यूबीटी) की पूर्व सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भाजपा पर वंदे मातरम प्रस्ताव और जेनज़ी आउटरीच की आड़ में बेरोज़गारी, परीक्षा लीक और चीनी की बढ़ती कीमतों जैसे असली मुद्दों से ध्यान भटकाने का सीधा आरोप लगाया — और माँग की कि सरकार इथेनॉल नीति के प्रभावों पर जवाब दे।

मुख्य बातें

प्रियंका चतुर्वेदी (शिवसेना-यूबीटी) ने 22 अगस्त को भाजपा पर वंदे मातरम विवाद के ज़रिए असली मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया।
उनका कहना है कि भाजपा के प्रस्ताव में बेरोज़गारी, महंगाई, महिला सुरक्षा और परीक्षा लीक पर ठोस बात होनी चाहिए थी।
भाजपा की जेनज़ी आउटरीच टीम पर कहा — युवाओं से जुड़ने के लिए उनके असली मुद्दों पर बात ज़रूरी है, सोशल मीडिया अभियान पर्याप्त नहीं।
पुणे में राहुल गांधी के कार्यक्रम की भीड़ पर भाजपा के 'पैसे देकर बुलाने' वाले दावे को उन्होंने पुराने राजनीतिक पैटर्न से जोड़ा।
चीनी उत्पादन में कमी और ई-20 इथेनॉल नीति के चीनी कीमतों पर असर को लेकर सरकार से स्पष्ट जवाब माँगा।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की केंद्र सरकार पर टिप्पणी का समर्थन किया।

शिवसेना (यूबीटी) की पूर्व सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने 22 अगस्त को नई दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वंदे मातरम को लेकर पारित प्रस्ताव और इस तरह के राजनीतिक विवाद देश की जनता का ध्यान बेरोज़गारी, महंगाई और युवाओं के भविष्य जैसे असली मुद्दों से भटकाने का माध्यम बन रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की चीनी की बढ़ती कीमतों और इथेनॉल नीति पर केंद्र सरकार से जवाबदेही माँगने वाली टिप्पणी का भी समर्थन किया।

वंदे मातरम विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया

भाजपा की कार्यकारी बैठक में वंदे मातरम की सुरक्षा को लेकर पारित प्रस्ताव और कांग्रेस द्वारा केवल दो छंद गाने के फैसले की निंदा किए जाने पर चतुर्वेदी ने कहा कि यदि सत्ताधारी पार्टी कोई प्रस्ताव पारित करना ही चाहती थी, तो उसमें देश की अर्थव्यवस्था, बेरोज़गारी, महिला सुरक्षा, राजनीति में महिलाओं की भागीदारी और युवाओं की चुनौतियों पर ठोस बात होनी चाहिए थी।

उनका कहना था कि वंदे मातरम बनाम जन गण मन की बहस छेड़ने के बजाय सरकार को 'इंडिया फर्स्ट' की सोच के साथ देश को आगे ले जाने वाली नीतियाँ सामने रखनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर विवाद खड़ा करना जनता का ध्यान वास्तविक समस्याओं से हटाने की रणनीति है।

जेनज़ी आउटरीच और राहुल गांधी के पुणे कार्यक्रम पर सवाल

भाजपा द्वारा युवा पीढ़ी (Gen-Z) तक पहुँचने के लिए एक विशेष टीम गठित किए जाने पर चतुर्वेदी ने कहा कि युवाओं से जुड़ना सकारात्मक कदम है, लेकिन इसके लिए उनकी वास्तविक प्राथमिकताओं को समझना भी ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि युवाओं की सबसे बड़ी चिंताएँ रोज़गार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता हैं — केवल सोशल मीडिया अभियानों से यह खाई नहीं पाटी जा सकती।

उन्होंने यह भी कहा कि एक ओर भाजपा जेनज़ी आउटरीच की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर पुणे में राहुल गांधी के कार्यक्रम में उपस्थित भीड़ को लेकर यह दावा किया जा रहा है कि लोगों को पैसे देकर बुलाया गया। उन्होंने इसे उसी राजनीतिक पैटर्न से जोड़ा, जिसमें पहले भी किसान आंदोलनों और लोकतांत्रिक प्रदर्शनों में शामिल लोगों पर इसी तरह के आरोप लगाए गए थे।

परीक्षा लीक और युवाओं की चिंताएँ

चतुर्वेदी ने कहा कि देश के युवा प्रतियोगी परीक्षाओं में परीक्षा लीक और प्रणालीगत खामियों की वजह से अपने भविष्य को लेकर गहरी चिंता में हैं। उनके अनुसार, सरकार को परीक्षा प्रणाली को लीक-प्रूफ बनाने का स्पष्ट रोडमैप देना चाहिए और रोज़गार के अवसर बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में परीक्षा लीक की घटनाएँ सुर्खियों में रही हैं।

चीनी की कीमतें और इथेनॉल नीति पर घेराबंदी

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा चीनी की बढ़ती कीमतों और इथेनॉल नीति पर उठाए गए सवालों का समर्थन करते हुए चतुर्वेदी ने कहा कि इस वर्ष चीनी उत्पादन कम रहा और उत्पादन के एक हिस्से को इथेनॉल की ओर मोड़ा गया। उन्होंने सरकार की ई-20 नीति का उल्लेख करते हुए माँग की कि इससे जुड़े प्रभावों पर केंद्र सरकार देश को स्पष्ट जवाब दे।

उन्होंने सवाल किया कि जब आम जनता चीनी के लिए अधिक कीमत चुका रही है, तो सरकार को यह बताना चाहिए कि इसके पीछे क्या कारण हैं और इथेनॉल नीति का चीनी की उपलब्धता एवं कीमतों पर क्या प्रभाव पड़ा है। गौरतलब है कि आलोचकों का कहना है कि राजनीतिक विमर्श को इन ज़रूरी आर्थिक सवालों से दूर रखा जा रहा है।

आगे का राजनीतिक परिदृश्य

चतुर्वेदी की यह टिप्पणियाँ ऐसे समय में आई हैं जब विपक्षी दल भाजपा पर 'राष्ट्रवादी प्रतीकों' की आड़ में आर्थिक विफलताओं को छुपाने का आरोप लगाते रहे हैं। आने वाले हफ्तों में संसद सत्र और राज्यों के चुनावी कार्यक्रमों के मद्देनज़र यह राजनीतिक बहस और तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या सिर्फ आरोप की राजनीति तक सीमित है। चीनी कीमत और इथेनॉल नीति का मुद्दा तकनीकी है और इस पर गहरी सार्वजनिक बहस की दरकार है — लेकिन इसे भी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में उलझा दिया जा रहा है। जेनज़ी आउटरीच की आलोचना उचित है, पर यह भी देखना होगा कि विपक्ष युवाओं को क्या ठोस विकल्प दे रहा है।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रियंका चतुर्वेदी ने भाजपा पर क्या आरोप लगाए?
शिवसेना (यूबीटी) की पूर्व सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि भाजपा वंदे मातरम प्रस्ताव और जेनज़ी आउटरीच जैसे मुद्दों के ज़रिए बेरोज़गारी, महंगाई और परीक्षा लीक जैसी असली समस्याओं से जनता का ध्यान भटका रही है। उनका कहना है कि सरकार को इन वास्तविक चुनौतियों पर ठोस नीतियाँ सामने रखनी चाहिए।
भाजपा के वंदे मातरम प्रस्ताव पर विवाद क्यों है?
भाजपा की कार्यकारी बैठक में वंदे मातरम की सुरक्षा को लेकर एक प्रस्ताव पारित किया गया और कांग्रेस द्वारा केवल दो छंद गाने के फैसले की निंदा की गई। विपक्ष का कहना है कि यह बहस राष्ट्रीय प्रतीकों को राजनीतिक हथियार बनाने की कोशिश है, जबकि असली मुद्दे — बेरोज़गारी और महंगाई — अनदेखे रह जाते हैं।
चीनी की कीमतों और इथेनॉल नीति पर क्या सवाल उठाए गए?
प्रियंका चतुर्वेदी ने दावा किया कि इस वर्ष चीनी उत्पादन कम रहा और उत्पादन के एक हिस्से को इथेनॉल की ओर मोड़ा गया, जिससे आम जनता को अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। उन्होंने सरकार की ई-20 नीति के प्रभावों पर स्पष्ट जवाब माँगा और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की इस मुद्दे पर की गई टिप्पणी का समर्थन किया।
भाजपा की जेनज़ी आउटरीच टीम पर चतुर्वेदी ने क्या कहा?
चतुर्वेदी ने कहा कि युवाओं से जुड़ना अच्छी बात है, लेकिन इसके लिए रोज़गार, शिक्षा और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली जैसे उनके वास्तविक मुद्दों पर काम करना ज़रूरी है। उन्होंने तर्क दिया कि केवल सोशल मीडिया अभियानों से नई पीढ़ी को जोड़ना पर्याप्त नहीं होगा।
परीक्षा लीक पर चतुर्वेदी ने सरकार से क्या माँग की?
चतुर्वेदी ने माँग की कि सरकार परीक्षा प्रणाली को लीक-प्रूफ बनाने का स्पष्ट रोडमैप पेश करे। उनका कहना था कि देश के युवा प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार हो रहे लीक की वजह से अपने भविष्य को लेकर गहरी चिंता में हैं और सरकार को इस पर ठोस जवाबदेही दिखानी होगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 घंटे पहले
  2. कल
  3. 5 महीने पहले
  4. 8 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले