प्रियंका चतुर्वेदी का भाजपा पर आरोप: वंदे मातरम की आड़ में छुपाए जा रहे बेरोज़गारी और महंगाई के असली मुद्दे
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) की पूर्व सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने 22 अगस्त को नई दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वंदे मातरम को लेकर पारित प्रस्ताव और इस तरह के राजनीतिक विवाद देश की जनता का ध्यान बेरोज़गारी, महंगाई और युवाओं के भविष्य जैसे असली मुद्दों से भटकाने का माध्यम बन रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की चीनी की बढ़ती कीमतों और इथेनॉल नीति पर केंद्र सरकार से जवाबदेही माँगने वाली टिप्पणी का भी समर्थन किया।
वंदे मातरम विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया
भाजपा की कार्यकारी बैठक में वंदे मातरम की सुरक्षा को लेकर पारित प्रस्ताव और कांग्रेस द्वारा केवल दो छंद गाने के फैसले की निंदा किए जाने पर चतुर्वेदी ने कहा कि यदि सत्ताधारी पार्टी कोई प्रस्ताव पारित करना ही चाहती थी, तो उसमें देश की अर्थव्यवस्था, बेरोज़गारी, महिला सुरक्षा, राजनीति में महिलाओं की भागीदारी और युवाओं की चुनौतियों पर ठोस बात होनी चाहिए थी।
उनका कहना था कि वंदे मातरम बनाम जन गण मन की बहस छेड़ने के बजाय सरकार को 'इंडिया फर्स्ट' की सोच के साथ देश को आगे ले जाने वाली नीतियाँ सामने रखनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर विवाद खड़ा करना जनता का ध्यान वास्तविक समस्याओं से हटाने की रणनीति है।
जेनज़ी आउटरीच और राहुल गांधी के पुणे कार्यक्रम पर सवाल
भाजपा द्वारा युवा पीढ़ी (Gen-Z) तक पहुँचने के लिए एक विशेष टीम गठित किए जाने पर चतुर्वेदी ने कहा कि युवाओं से जुड़ना सकारात्मक कदम है, लेकिन इसके लिए उनकी वास्तविक प्राथमिकताओं को समझना भी ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि युवाओं की सबसे बड़ी चिंताएँ रोज़गार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता हैं — केवल सोशल मीडिया अभियानों से यह खाई नहीं पाटी जा सकती।
उन्होंने यह भी कहा कि एक ओर भाजपा जेनज़ी आउटरीच की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर पुणे में राहुल गांधी के कार्यक्रम में उपस्थित भीड़ को लेकर यह दावा किया जा रहा है कि लोगों को पैसे देकर बुलाया गया। उन्होंने इसे उसी राजनीतिक पैटर्न से जोड़ा, जिसमें पहले भी किसान आंदोलनों और लोकतांत्रिक प्रदर्शनों में शामिल लोगों पर इसी तरह के आरोप लगाए गए थे।
परीक्षा लीक और युवाओं की चिंताएँ
चतुर्वेदी ने कहा कि देश के युवा प्रतियोगी परीक्षाओं में परीक्षा लीक और प्रणालीगत खामियों की वजह से अपने भविष्य को लेकर गहरी चिंता में हैं। उनके अनुसार, सरकार को परीक्षा प्रणाली को लीक-प्रूफ बनाने का स्पष्ट रोडमैप देना चाहिए और रोज़गार के अवसर बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में परीक्षा लीक की घटनाएँ सुर्खियों में रही हैं।
चीनी की कीमतें और इथेनॉल नीति पर घेराबंदी
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा चीनी की बढ़ती कीमतों और इथेनॉल नीति पर उठाए गए सवालों का समर्थन करते हुए चतुर्वेदी ने कहा कि इस वर्ष चीनी उत्पादन कम रहा और उत्पादन के एक हिस्से को इथेनॉल की ओर मोड़ा गया। उन्होंने सरकार की ई-20 नीति का उल्लेख करते हुए माँग की कि इससे जुड़े प्रभावों पर केंद्र सरकार देश को स्पष्ट जवाब दे।
उन्होंने सवाल किया कि जब आम जनता चीनी के लिए अधिक कीमत चुका रही है, तो सरकार को यह बताना चाहिए कि इसके पीछे क्या कारण हैं और इथेनॉल नीति का चीनी की उपलब्धता एवं कीमतों पर क्या प्रभाव पड़ा है। गौरतलब है कि आलोचकों का कहना है कि राजनीतिक विमर्श को इन ज़रूरी आर्थिक सवालों से दूर रखा जा रहा है।
आगे का राजनीतिक परिदृश्य
चतुर्वेदी की यह टिप्पणियाँ ऐसे समय में आई हैं जब विपक्षी दल भाजपा पर 'राष्ट्रवादी प्रतीकों' की आड़ में आर्थिक विफलताओं को छुपाने का आरोप लगाते रहे हैं। आने वाले हफ्तों में संसद सत्र और राज्यों के चुनावी कार्यक्रमों के मद्देनज़र यह राजनीतिक बहस और तेज़ होने की संभावना है।