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वंदे मातरम विवाद पर मायावती का कड़ा संदेश: राजनीतिक दल बेरोज़गारी और बाढ़ पर दें ध्यान

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वंदे मातरम विवाद पर मायावती का कड़ा संदेश: राजनीतिक दल बेरोज़गारी और बाढ़ पर दें ध्यान

सारांश

वंदे मातरम गायन पर BJP-कांग्रेस की तीखी नोकझोंक के बीच BSP प्रमुख मायावती ने दोनों दलों को आईना दिखाया — प्रतीकात्मक राजनीति छोड़ो, बेरोज़गारी, युवाओं और बाढ़ जैसे असली मुद्दों पर ध्यान दो। यह बयान ऐसे वक्त आया है जब संसद में वंदे मातरम से जुड़ा कानून हाल ही में पास हुआ है।

मुख्य बातें

BSP प्रमुख मायावती ने 21 अगस्त को एक्स पर पोस्ट कर वंदे मातरम विवाद पर सभी दलों की राजनीति को अनुचित बताया।
उन्होंने केंद्र व राज्य सरकारों से बेरोज़गार युवाओं , छात्र-छात्राओं और बाढ़ पीड़ितों पर ध्यान देने की माँग की।
विवाद 15 अगस्त को शुरू हुआ जब BJP ने कांग्रेस मुख्यालय के वीडियो पर सोनिया गांधी पर वंदे मातरम रोकने का आरोप लगाया।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप खारिज करते हुए कहा — सोनिया गांधी का इशारा मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी मँगाने को लेकर था।
मायावती के अनुसार, संसद में वंदे मातरम को लेकर कानून बनाना और बदलना कोई नई बात नहीं — पार्टियाँ सत्ता परिवर्तन पर ऐसा करती रही हैं।

बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने शुक्रवार, 21 अगस्त को वंदे मातरम गायन को लेकर देशभर में छिड़ी राजनीतिक बहस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और सभी दलों से इस मुद्दे पर राजनीति बंद करने की अपील की। उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकारों तथा समस्त राजनीतिक पार्टियों से आग्रह किया कि वे बेरोज़गार युवाओं, 'जेन-जी' और 'जेन-अल्फा' पीढ़ी के छात्र-छात्राओं तथा देश के कई हिस्सों में बाढ़ से हो रही जान-माल की हानि जैसे ज़रूरी जनहित के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करें।

मायावती ने एक्स पर क्या कहा

मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर स्पष्ट किया कि वंदे मातरम को पूरा गाया जाए, शुरुआती दो छंद गाए जाएँ या बिल्कुल न गाया जाए — इस पर जो राजनीतिक घमासान चल रहा है, वह उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि हाल ही में संसद में वंदे मातरम गायन को लेकर जो कानून पास हुआ है, यह कोई पहली बार नहीं हो रहा। उनके अनुसार, सत्ता परिवर्तन के दौरान पार्टियाँ अपने राजनीतिक स्वार्थ के चलते या जनता का ध्यान अपनी कमियों से हटाने के लिए एक-दूसरे के बनाए कानूनों को बदलती रहती हैं।

मुख्य घटनाक्रम: विवाद की जड़

यह विवाद 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान उस समय शुरू हुआ जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस मुख्यालय के कार्यक्रम का एक वीडियो साझा करते हुए आरोप लगाया कि पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने वंदे मातरम गायन को बीच में रोकने की कोशिश की और राहुल गांधी असहज दिखे।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वंदे मातरम पूरा गाया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि सोनिया गांधी का इशारा गीत रोकने के लिए नहीं, बल्कि लंबे समय से खड़े कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी मँगाने को लेकर था।

जनहित के मुद्दों की अनदेखी पर चिंता

मायावती ने ज़ोर देकर कहा कि इस समय देश में बेरोज़गार युवाओं, स्कूली बच्चों और 'जेन-अल्फा' पीढ़ी की शिक्षा तथा भविष्य से जुड़े सवाल कहीं अधिक ज़रूरी हैं। उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में हो रही जान-माल की हानि को भी तत्काल ध्यान देने योग्य बताया। उनके अनुसार, यही वर्तमान में देश और जनहित में सबसे ज़रूरी माँग है।

राजनीतिक संदर्भ और व्यापक असर

गौरतलब है कि वंदे मातरम को लेकर यह पहली बार नहीं है जब देश में राजनीतिक विवाद उठा हो। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के प्रतीकात्मक मुद्दों को उठाकर पार्टियाँ अक्सर ज़मीनी समस्याओं से जनता का ध्यान भटकाती हैं। मायावती की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब संसद में हाल ही में वंदे मातरम गायन से संबंधित कानून पास हुआ है और BJP-कांग्रेस के बीच इस पर तीखी नोकझोंक जारी है।

आगे देखना होगा कि मायावती की इस अपील का राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श पर कितना असर पड़ता है और क्या अन्य दल भी जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता देने की दिशा में कदम उठाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह BSP की उस परंपरागत रणनीति का हिस्सा है जिसमें प्रतीकात्मक विवादों से दूरी बनाकर दलित-पिछड़े मतदाताओं को यह संदेश दिया जाता है कि उनकी पार्टी 'असली मुद्दों' की पार्टी है। हालाँकि, सवाल यह है कि BSP स्वयं संसद और विधानसभाओं में इन 'जनहित के मुद्दों' पर कितनी मुखर रही है — यह आँकड़े उतने उत्साहजनक नहीं हैं। वंदे मातरम विवाद निश्चित रूप से राजनीतिक ध्यान भटकाने का एक उपकरण बन गया है, लेकिन इस पर चुप्पी साधना भी एक राजनीतिक चुनाव है। मायावती की अपील तब और विश्वसनीय होती जब वे इन जनहित मुद्दों पर ठोस विधायी प्रस्ताव भी सामने रखतीं।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मायावती ने वंदे मातरम विवाद पर क्या कहा?
BSP प्रमुख मायावती ने 21 अगस्त को एक्स पर पोस्ट कर कहा कि वंदे मातरम गायन को लेकर देश में जो राजनीति चल रही है, वह उचित नहीं है। उन्होंने सभी दलों से बेरोज़गारी, छात्रों और बाढ़ पीड़ितों जैसे जनहित के मुद्दों पर ध्यान देने की अपील की।
वंदे मातरम विवाद कब और कैसे शुरू हुआ?
यह विवाद 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस मुख्यालय के समारोह के एक वीडियो से शुरू हुआ, जिसे BJP ने साझा करते हुए आरोप लगाया कि सोनिया गांधी ने वंदे मातरम रोकने की कोशिश की। कांग्रेस ने इस आरोप को खारिज किया।
कांग्रेस ने BJP के आरोपों का क्या जवाब दिया?
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि वंदे मातरम पूरा गाया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि सोनिया गांधी का इशारा गीत रोकने के लिए नहीं, बल्कि लंबे समय से खड़े कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी मँगाने को लेकर था।
मायावती ने किन जनहित मुद्दों पर ध्यान देने की माँग की?
मायावती ने बेरोज़गार युवाओं, 'जेन-जी' और 'जेन-अल्फा' पीढ़ी के छात्र-छात्राओं तथा देश के कई हिस्सों में बाढ़ से हो रही जान-माल की हानि को प्राथमिकता देने की अपील की। उनके अनुसार ये मुद्दे इस समय सबसे ज़रूरी हैं।
क्या वंदे मातरम गायन को लेकर संसद में कोई कानून बना है?
मायावती के अनुसार, हाल ही में संसद में वंदे मातरम गायन से संबंधित एक कानून पास किया गया है। उन्होंने कहा कि सत्ता परिवर्तन के दौरान पार्टियाँ अपने राजनीतिक स्वार्थ के अनुसार ऐसे कानूनों को बदलती रहती हैं, जो कोई नई बात नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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