प्रियंका चतुर्वेदी का बयान: भाजपा की नीति केवल अपने हित साधने की है
सारांश
Key Takeaways
- सर्वदलीय बैठक में जनता की समस्याओं पर चर्चा नहीं हुई।
- प्रियंका चतुर्वेदी ने भाजपा की नीति पर गंभीर सवाल उठाए।
- महिला आरक्षण बिल पर कोई चर्चा नहीं की गई।
- यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर राजनीतिक प्रेरणा का संदेह।
- सरकार की जवाबदेही पर ध्यान भटकाने की कोशिश।
नई दिल्ली, २५ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के बीच भारत सरकार ने सर्वदलीय बैठक का आयोजन किया। इस बैठक पर शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इस बैठक को बुलाने में काफी देर हो चुकी है। अब इस बैठक के माध्यम से सरकार वास्तव में क्या प्राप्त करना चाहती है?
प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि जब से पश्चिम एशिया में यह संकट उत्पन्न हुआ है, तब से यह मांग उठ रही थी कि इस पर सदन में चर्चा की जाए, जबकि सदन का सत्र चल रहा था। उन्होंने यह भी सुझाव दिया था कि वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए एक सर्वदलीय बैठक का आयोजन किया जाना चाहिए। लेकिन, सरकार ने पहले इस पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया। अब, तीन सप्ताह बाद, वे इस बैठक का आयोजन कर रहे हैं। सवाल यह है कि वे इस बैठक से क्या हासिल करना चाहते हैं?
उन्होंने यह भी कहा कि सदन में पेट्रोलियम मंत्री और विदेश मंत्री के बाद पीएम मोदी ने भी अपनी बात रखी। लेकिन जब स्पष्टीकरण देने की बात आई, तो किसी ने भी स्पष्टता नहीं दी। अब तीसरे सप्ताह में सर्वदलीय बैठक बुलाकर सरकार क्या हासिल करना चाहती है। हमें सदन में इस पर चर्चा क्यों नहीं करने दी जाती? विपक्ष को इसमें भाग लेने का मौका क्यों नहीं दिया जाता?
उन्होंने यह भी कहा कि सदन में जनता की समस्याओं को उठाने की आवश्यकता है। जनता हमें चुनाव में चुनती है ताकि हम उनके मुद्दों को सदन में उठाएं और समाधान निकालें। जब भी सरकार से जवाबदेही की बात आती है, तब वह ध्यान भटकाने का कार्य करती है।
गुजरात में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने पर प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि जो कुछ पहले उत्तराखंड में हुआ, वही अब गुजरात में हो रहा है। जब हम कई पक्षों के साथ यूनिफॉर्म सिविल कोड पर चर्चा करने की बात करते हैं, तो ऐसा लगता है कि लिए गए निर्णय राजनीतिक प्रेरणा से प्रभावित हैं। इनका उद्देश्य जनता को लाभ पहुंचाना नहीं है।
उन्होंने महिला आरक्षण बिल को लेकर भी सवाल उठाए, कहती हैं कि इस बिल को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है। यह साफ दिखाता है कि भाजपा की नीति केवल अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने और वोट हासिल करने की है।