प्रियंका चतुर्वेदी: महिला आरक्षण बिल से सभी राजनीतिक दलों को होगा लाभ
सारांश
Key Takeaways
- महिलाओं का आरक्षण: यह बिल महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को बढ़ावा देगा।
- समर्थन: बिल को लगभग सभी विपक्षी दलों का समर्थन प्राप्त है।
- सरकार की जिम्मेदारी: महिलाओं से किए गए वादों को निभाना सरकार और विपक्ष की जिम्मेदारी है।
- संसद के कार्य घंटे: कार्य घंटे बढ़ाने की आवश्यकता है ताकि सभी मुद्दों पर चर्चा हो सके।
- अंतरराष्ट्रीय स्थिति: पश्चिम एशिया में तनाव पर चिंता व्यक्त की गई है।
नई दिल्ली, 6 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। महिला आरक्षण बिल को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर से चर्चा गरमाई है। शिवसेना (यूबीटी) की प्रमुख प्रियंका चतुर्वेदी ने इस बिल का स्वागत करते हुए कहा कि महिलाओं से किए गए वादों को निभाना सरकार और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी है। उनका मानना है कि इस बिल से सभी राजनीतिक दलों को लाभ होगा।
प्रियंका चतुर्वेदी ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि इस बिल में पहले से कई महत्वपूर्ण कमियां हैं। उन्होंने यह भी बताया कि 2024 के चुनावों से पहले पास हुए महिला आरक्षण बिल में 2029 तक महिलाओं को आरक्षण देने का प्रावधान था, जिस पर आपत्ति उठाई गई थी। उनका मानना है कि इसे तत्काल लागू किया जाना चाहिए था और मौजूदा सीटों पर ही महिलाओं को आरक्षण मिलना चाहिए। अब जब सरकार इस पर संशोधन लाने की बात कर रही है, तो यह स्पष्ट है कि पहले पारित बिल में खामियां थीं और इसे लागू करने में देरी हो सकती है।
उन्होंने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि चाहे यह निर्णय चुनाव से पहले हो या बाद में, महिलाओं के साथ किए गए वादों को निभाना सरकार और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी है। उन्होंने याद दिलाया कि लोकसभा में इस बिल को एआईएमआईएम को छोड़कर लगभग सभी विपक्षी दलों ने समर्थन दिया था। यदि यह वादा पूरा नहीं किया जाता है, तो यह देश की महिलाओं के साथ संसद की वादाखिलाफी होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए और यह बिल जल्द से जल्द लागू होना चाहिए।
इस मुद्दे पर कुछ सांसदों द्वारा उठाई गई चिंताओं का भी उन्होंने उल्लेख किया। कुछ सांसदों का कहना है कि अगर संसद में महिलाओं की संख्या बढ़ती है, तो बोलने का समय सीमित हो जाएगा। इस पर प्रियंका चतुर्वेदी ने सहमति जताते हुए कहा कि यह एक व्यावहारिक समस्या है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी बिल पर चार घंटे की चर्चा होती है और उसमें 800 सांसद शामिल होते हैं, तो सभी को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिलेगा। इसलिए उन्होंने सुझाव दिया कि महिला आरक्षण बिल में संशोधन के साथ-साथ संसद के कामकाजी घंटों को भी बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि हर मुद्दे पर व्यापक और संतुलित चर्चा हो सके।
वहीं, विपक्षी दलों द्वारा लगाए जा रहे इस आरोप पर कि भाजपा 2029 के चुनाव को ध्यान में रखते हुए इस बिल को पेश कर रही है, प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि चुनाव का निर्णय जनता करती है, न कि कोई एक पार्टी। उन्होंने कहा कि यदि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलता है, तो इसका लाभ सभी राजनीतिक दलों की महिला कार्यकर्ताओं को मिलेगा और इससे देश में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी में महत्वपूर्ण वृद्धि होगी।
अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बात करते हुए उन्होंने पश्चिम एशिया में जारी तनाव पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत के विदेश मंत्री ने हाल ही में क्षेत्र के कई देशों के विदेश मंत्रियों से बातचीत की है और उम्मीद जताई कि इससे कोई सकारात्मक समाधान निकलेगा। उन्होंने कहा कि एक तरफ ईरान अपनी स्थिति पर कायम है तो दूसरी ओर अमेरिका भी अपने रुख पर अड़ा हुआ है। इस दौरान दोनों पक्षों द्वारा इस्तेमाल की जा रही भाषा को उन्होंने आपत्तिजनक बताया और कहा कि इससे स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो सकती है।