बाबा राम रहीम की बार-बार पैरोल पर प्रियंका चतुर्वेदी का हमला, महंगाई पर सरकार को कठघरे में खड़ा किया
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने 25 अगस्त 2026 को बाबा राम रहीम को बार-बार पैरोल दिए जाने पर कड़ा सवाल उठाया और हरियाणा सरकार की चुप्पी को 'शर्मनाक' करार दिया। इसके साथ ही उन्होंने प्याज और चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा निशाना साधा।
राम रहीम की पैरोल पर सवाल
प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, 'बाबा राम रहीम को लगातार पैरोल मिलना शर्मनाक है। हरियाणा सरकार इस मामले पर चुप्पी क्यों साधे हुए है? यह किस तरह की सजा है, जिसमें आधे से ज्यादा समय वह जेल से बाहर रहते हैं।' उन्होंने आगे कहा कि अगर दोषियों से इतना प्रेम है तो सरकार उन्हें क्षमादान देकर जेल से निकाल दे — यह कोर्ट के आदेश और कानून-व्यवस्था का मजाक बन रहा है।
गौरतलब है कि राम रहीम को 2017 में बलात्कार के दो मामलों में दोषी ठहराया गया था और 20 साल की सजा सुनाई गई थी। तब से लेकर अब तक उन्हें कई बार पैरोल और फर्लो मिल चुके हैं, जिस पर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर राष्ट्रीय बहस तेज है।
महिला सशक्तीकरण पर बेबाक राय
राहुल गांधी की महिला अधिकारों पर की गई टिप्पणियों की आलोचना करने वालों को जवाब देते हुए प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि महिलाओं के सशक्तीकरण को हिंदू विरोधी बताना सनातन धर्म की भावना के विरुद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पितृसत्ता एक सामाजिक सोच है, जो सभी धर्मों और समाजों में मौजूद है।
उन्होंने यह भी कहा, 'यह समस्या सिर्फ भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नहीं है — हर राजनीतिक दल महिलाओं की बात करता है, लेकिन उनके वास्तविक उत्थान की घड़ी आने पर पीछे हट जाता है। यह मुद्दा धर्म या जाति का नहीं, बल्कि संवैधानिक समानता का है।' उन्होंने याद दिलाया कि संविधान निर्माण के समय महिलाओं की मतदान भागीदारी और समानता का अधिकार केंद्रीय विषय था।
महंगाई पर सरकार को घेरा
प्याज और चीनी की बढ़ती कीमतों पर प्रियंका चतुर्वेदी ने वित्त मंत्री के उस पुराने बयान का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि वे प्याज नहीं खातीं। चतुर्वेदी ने कहा, 'पूरी सरकार इसी सोच के साथ काम कर रही है। इसमें हैरानी नहीं होगी अगर वित्त मंत्री कहें कि उन्हें डायबिटीज है और वे चीनी नहीं खातीं, इसलिए उन्हें उसकी कीमत नहीं पता।'
उन्होंने जोर देकर कहा कि आम लोगों की आमदनी नहीं बढ़ रही, रोजगार के अवसर सिकुड़ रहे हैं और जीवन स्तर में कोई सुधार नहीं हो रहा — जबकि महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है। उनके अनुसार, राजनीतिक दलों को धर्म और जाति की बहस छोड़कर रोजगार, बुनियादी ढाँचे और जीवन की गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
आगे क्या
प्रियंका चतुर्वेदी की यह टिप्पणियाँ ऐसे समय में आई हैं जब हरियाणा में राजनीतिक माहौल गरम है और राम रहीम की पैरोल का मुद्दा न्यायपालिका की स्वायत्तता पर बहस को नई धार दे रहा है। महंगाई और रोजगार के मुद्दे पर विपक्ष का यह आक्रामक रुख आने वाले समय में सरकार के लिए दबाव बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा दिखता है।