25 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बाबा राम रहीम की बार-बार पैरोल पर प्रियंका चतुर्वेदी का हमला, महंगाई पर सरकार को कठघरे में खड़ा किया

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बाबा राम रहीम की बार-बार पैरोल पर प्रियंका चतुर्वेदी का हमला, महंगाई पर सरकार को कठघरे में खड़ा किया

सारांश

शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने एक साथ दो मोर्चे खोले — बाबा राम रहीम की बार-बार पैरोल को न्यायिक प्रक्रिया का मजाक बताया और महंगाई पर सरकार की 'उदासीनता' को आम जनता की पीड़ा से जोड़ा।

मुख्य बातें

प्रियंका चतुर्वेदी ने बाबा राम रहीम को बार-बार पैरोल दिए जाने को 'शर्मनाक' बताया और हरियाणा सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाया।
उन्होंने कहा कि आधे से ज्यादा समय जेल से बाहर रहना कोर्ट के आदेश और कानून-व्यवस्था का मजाक है।
महिला सशक्तीकरण को हिंदू विरोधी बताने को उन्होंने सनातन भावना के विरुद्ध करार दिया; कहा — पितृसत्ता सभी धर्मों में है।
प्याज और चीनी की बढ़ती कीमतों पर वित्त मंत्री के पुराने बयान का हवाला देते हुए सरकार की 'उदासीनता' पर हमला बोला।
उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से धर्म-जाति की बहस छोड़कर रोजगार, महंगाई और बुनियादी ढाँचे पर ध्यान देने का आग्रह किया।

शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने 25 अगस्त 2026 को बाबा राम रहीम को बार-बार पैरोल दिए जाने पर कड़ा सवाल उठाया और हरियाणा सरकार की चुप्पी को 'शर्मनाक' करार दिया। इसके साथ ही उन्होंने प्याज और चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा निशाना साधा।

राम रहीम की पैरोल पर सवाल

प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, 'बाबा राम रहीम को लगातार पैरोल मिलना शर्मनाक है। हरियाणा सरकार इस मामले पर चुप्पी क्यों साधे हुए है? यह किस तरह की सजा है, जिसमें आधे से ज्यादा समय वह जेल से बाहर रहते हैं।' उन्होंने आगे कहा कि अगर दोषियों से इतना प्रेम है तो सरकार उन्हें क्षमादान देकर जेल से निकाल दे — यह कोर्ट के आदेश और कानून-व्यवस्था का मजाक बन रहा है।

गौरतलब है कि राम रहीम को 2017 में बलात्कार के दो मामलों में दोषी ठहराया गया था और 20 साल की सजा सुनाई गई थी। तब से लेकर अब तक उन्हें कई बार पैरोल और फर्लो मिल चुके हैं, जिस पर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर राष्ट्रीय बहस तेज है।

महिला सशक्तीकरण पर बेबाक राय

राहुल गांधी की महिला अधिकारों पर की गई टिप्पणियों की आलोचना करने वालों को जवाब देते हुए प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि महिलाओं के सशक्तीकरण को हिंदू विरोधी बताना सनातन धर्म की भावना के विरुद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पितृसत्ता एक सामाजिक सोच है, जो सभी धर्मों और समाजों में मौजूद है।

उन्होंने यह भी कहा, 'यह समस्या सिर्फ भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नहीं है — हर राजनीतिक दल महिलाओं की बात करता है, लेकिन उनके वास्तविक उत्थान की घड़ी आने पर पीछे हट जाता है। यह मुद्दा धर्म या जाति का नहीं, बल्कि संवैधानिक समानता का है।' उन्होंने याद दिलाया कि संविधान निर्माण के समय महिलाओं की मतदान भागीदारी और समानता का अधिकार केंद्रीय विषय था।

महंगाई पर सरकार को घेरा

प्याज और चीनी की बढ़ती कीमतों पर प्रियंका चतुर्वेदी ने वित्त मंत्री के उस पुराने बयान का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि वे प्याज नहीं खातीं। चतुर्वेदी ने कहा, 'पूरी सरकार इसी सोच के साथ काम कर रही है। इसमें हैरानी नहीं होगी अगर वित्त मंत्री कहें कि उन्हें डायबिटीज है और वे चीनी नहीं खातीं, इसलिए उन्हें उसकी कीमत नहीं पता।'

उन्होंने जोर देकर कहा कि आम लोगों की आमदनी नहीं बढ़ रही, रोजगार के अवसर सिकुड़ रहे हैं और जीवन स्तर में कोई सुधार नहीं हो रहा — जबकि महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है। उनके अनुसार, राजनीतिक दलों को धर्म और जाति की बहस छोड़कर रोजगार, बुनियादी ढाँचे और जीवन की गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

आगे क्या

प्रियंका चतुर्वेदी की यह टिप्पणियाँ ऐसे समय में आई हैं जब हरियाणा में राजनीतिक माहौल गरम है और राम रहीम की पैरोल का मुद्दा न्यायपालिका की स्वायत्तता पर बहस को नई धार दे रहा है। महंगाई और रोजगार के मुद्दे पर विपक्ष का यह आक्रामक रुख आने वाले समय में सरकार के लिए दबाव बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा दिखता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन विपक्ष की आलोचना हर बार उसी दीवार से टकराती है — हरियाणा सरकार की चुप्पी और प्रशासनिक प्रक्रिया की आड़। असली सवाल यह है कि पैरोल देने की शर्तें और उनकी निगरानी का तंत्र कितना पारदर्शी है, जो अब तक सार्वजनिक नहीं हुआ। महंगाई पर चतुर्वेदी का हमला राजनीतिक रूप से धारदार है, लेकिन यह तथ्य भी उतना ही असुविधाजनक है कि विपक्षी शासित राज्यों में भी खाद्य मूल्य नियंत्रण का रिकॉर्ड मिला-जुला रहा है। महिला सशक्तीकरण पर उनकी बात सही दिशा में है, पर जब तक दल अपने स्वयं के टिकट वितरण में यह प्रतिबद्धता नहीं दिखाते, यह बहस चुनावी बयानबाजी से आगे नहीं जाती।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रियंका चतुर्वेदी ने बाबा राम रहीम की पैरोल पर क्या कहा?
प्रियंका चतुर्वेदी ने बाबा राम रहीम को बार-बार पैरोल मिलने को 'शर्मनाक' बताया और कहा कि जब दोषी अपनी सजा का आधे से ज्यादा समय जेल से बाहर बिताए, तो यह कोर्ट के आदेश और कानून-व्यवस्था का मजाक है। उन्होंने हरियाणा सरकार से जवाब माँगा।
बाबा राम रहीम को कितनी सजा मिली है और कितनी बार पैरोल मिली है?
बाबा राम रहीम को 2017 में बलात्कार के दो मामलों में दोषी ठहराया गया था और 20 साल की सजा सुनाई गई थी। तब से उन्हें कई बार पैरोल और फर्लो दी जा चुकी है, जिस पर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है।
प्रियंका चतुर्वेदी ने महंगाई पर सरकार को कैसे घेरा?
उन्होंने प्याज और चीनी की बढ़ती कीमतों का हवाला देते हुए कहा कि सरकार आम जनता की तकलीफ से बेखबर है। उन्होंने वित्त मंत्री के उस पुराने बयान का उल्लेख किया जिसमें उन्होंने कहा था कि वे प्याज नहीं खातीं, और इसे सरकार की उदासीनता का प्रतीक बताया।
महिला सशक्तीकरण पर प्रियंका चतुर्वेदी का क्या रुख है?
उन्होंने कहा कि महिलाओं के उत्थान को हिंदू विरोधी बताना सनातन धर्म की भावना के विरुद्ध है क्योंकि हिंदू धर्म में देवी को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि पितृसत्ता एक सामाजिक सोच है और यह समस्या सभी दलों और धर्मों में मौजूद है।
प्रियंका चतुर्वेदी किस पार्टी से हैं और यह बयान कब दिया?
प्रियंका चतुर्वेदी शिवसेना (यूबीटी) की नेता हैं। यह बयान उन्होंने 25 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान दिया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 दिन पहले
  2. 5 दिन पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 2 महीने पहले