अखिलेश यादव का राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर हमला, न्यायालय से स्वतः संज्ञान की मांग
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 7 जून 2026 को राम मंदिर के चढ़ावे की कथित करोड़ों रुपये की रकम गायब होने के आरोपों को लेकर मंदिर ट्रस्ट और सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इस मामले को करोड़ों रामभक्तों की आस्था से जुड़ा बताते हुए पारदर्शी जांच और न्यायालय के स्वतः संज्ञान की मांग की। सरकार की चुप्पी को उन्होंने 'संदिग्ध' करार दिया।
एक्स पर क्या लिखा अखिलेश ने
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि 'समस्त विश्व में भगवान राम के उपासकों के लिए ये एक बेहद संवेदनशील समाचार है कि राम मंदिर के चढ़ावे की करोड़ों की रकम गायब पायी गई है।' उन्होंने इसे मंदिर ट्रस्ट के लिए 'अत्यंत शर्मनाक स्थिति' बताया और कहा कि कोई भी सफ़ाई देने के लिए सामने नहीं आना चाहता। उन्होंने जोड़ा कि इसका सीधा संबंध वैश्विक स्तर पर समस्त सनातनी समाज की प्रभु राम में गहरी आस्था से जुड़ा है।
सरकार और ट्रस्ट पर जवाबदेही की मांग
अखिलेश यादव ने कहा कि यदि चढ़ावे की रकम में अनियमितता के आरोप सामने आए हैं तो संबंधित पक्षों को जनता के सामने जवाब देना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि सरकार की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है और इस मामले में न्यायालय को स्वतः संज्ञान लेना चाहिए। गौरतलब है कि मंदिर ट्रस्ट या सरकार की ओर से इन आरोपों पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
महंगाई पर भी सरकार को घेरा
सपा प्रमुख ने इसी क्रम में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार की नीतियों पर हमला बोलते हुए कहा कि घरेलू गैस सिलेंडर के दाम में ₹29 की ताज़ा वृद्धि के साथ पिछले तीन महीनों में यह ₹89 महंगा हो चुका है। उन्होंने दावा किया कि व्यावसायिक गैस सिलेंडर की कीमतों में ₹1,000 से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। यादव ने कहा कि डीजल और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों का असर परिवहन से लेकर खाद्य वस्तुओं तक हर क्षेत्र पर पड़ रहा है।
आम जनता पर असर
अखिलेश यादव के अनुसार बढ़ती महंगाई ने आम लोगों का घरेलू बजट बिगाड़ दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार बिजली दरों में वृद्धि और स्मार्ट मीटर के जरिए उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है, जबकि केंद्र सरकार पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम बढ़ाकर जनता की जेब पर डाका डाल रही है। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी चरम पर है, व्यापार प्रभावित है और खेती की लागत लगातार बढ़ रही है।
आगे क्या होगा
अखिलेश यादव की यह मांग ऐसे समय में आई है जब राम मंदिर से जुड़े वित्तीय प्रबंधन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। न्यायालय इस मामले में संज्ञान लेता है या नहीं, यह देखना होगा। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार विपक्ष इस मुद्दे को आस्था और पारदर्शिता दोनों के कोण से आगामी दिनों में और तेज़ कर सकता है।