5 नवंबर 2026
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मुंबई में ईडी की कार्रवाई: PMLA के तहत ₹4 करोड़ की संपत्ति जब्त, D-कंपनी कनेक्शन उजागर

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मुंबई में ईडी की कार्रवाई: PMLA के तहत ₹4 करोड़ की संपत्ति जब्त, D-कंपनी कनेक्शन उजागर

सारांश

मुंबई में ईडी ने PMLA के तहत ₹4 करोड़ की संपत्ति जब्त की — मामले में D-कंपनी और दाऊद इब्राहिम के नाम पर धमकी देकर 'लंबत बिल्डिंग' हड़पने और फिर उसे सलीम फ्रूट की पत्नी के नाम करने का आरोप है।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मुंबई जोनल कार्यालय ने 5 नवंबर 2026 को PMLA, 2002 के तहत ₹4 करोड़ की संपत्तियाँ अस्थायी रूप से जब्त कीं।
जब्त संपत्तियों में 'लंबत बिल्डिंग' (अचल संपत्ति) और आरोपियों के बैंक बैलेंस शामिल हैं।
आरोप है कि D-कंपनी , दाऊद इब्राहिम और सलीम इकबाल कुरैशी उर्फ सलीम फ्रूट के नाम पर धमकी देकर असली मालिकों की 50% हिस्सेदारी जबरन हड़पी गई।
मुख्य आरोपी असलम अब्दुल रहमान पटनी पर संपत्ति को शाजिया सलीम इकबाल कुरैशी (सलीम फ्रूट की पत्नी) के नाम हस्तांतरित कर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है।
जाँच की शुरुआत दादर पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर और मुंबई क्राइम ब्रांच के एंटी-एक्सटॉर्शन सेल की जाँच के आधार पर हुई।
ईडी की ओर से आगे की जाँच जारी है और अतिरिक्त कार्रवाई की संभावना बनी हुई है।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मुंबई जोनल कार्यालय ने 5 नवंबर 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग के एक गंभीर मामले में लगभग ₹4 करोड़ की चल और अचल संपत्तियों को 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002' के प्रावधानों के तहत अस्थायी रूप से जब्त किया। यह कार्रवाई असलम अब्दुल रहमान पटनी और अन्य आरोपियों के विरुद्ध की गई है, जिसमें कथित तौर पर D-कंपनी और दाऊद इब्राहिम के नाम का इस्तेमाल कर संपत्ति हड़पने का षड्यंत्र सामने आया है।

मामले का मूल आधार

ईडी ने अपने आधिकारिक बयान में बताया कि जाँच की शुरुआत दादर पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के आधार पर हुई, जिसकी विस्तृत पड़ताल मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच के एंटी-एक्सटॉर्शन सेल ने की। यह एफआईआर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, विश्वासघात, जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल जैसे संगीन आरोपों से संबंधित है।

गौरतलब है कि इस मामले में एजेंसी की जाँच ने संगठित धमकी, जबरन संपत्ति हस्तांतरण और कथित तौर पर अपराध से अर्जित धन को वैध रूप देने की एक सुनियोजित श्रृंखला का खुलासा किया है।

कैसे हड़पी गई 'लंबत बिल्डिंग'

जाँच के अनुसार, शब्बीर अहमद हसन करोलिया और यूसुफ अहमद हसन करोलिया सहित अन्य आरोपियों ने कथित तौर पर खुद को असली मालिक बताकर और 'डीड ऑफ कन्वेयंस' समेत कई जाली दस्तावेज तैयार करके 'लंबत बिल्डिंग' नामक अचल संपत्ति को अवैध रूप से अपने नाम कर लिया।

इसके बाद असलम अब्दुल रहमान पटनी ने कथित तौर पर यास्मीन मोहम्मद अहमद और स्वर्गीय शेरजादा जंगरेज खान की इस बिल्डिंग में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी को जबरन हड़प लिया। आरोप है कि उन्हें D-कंपनी, दाऊद इब्राहिम और छोटा शकील के बहनोई सलीम इकबाल कुरैशी उर्फ सलीम फ्रूट के नाम पर धमकाया गया। असली मालिकों को बिना किसी भुगतान के उनकी हिस्सेदारी से बेदखल कर दिया गया।

संपत्ति का हस्तांतरण और मनी लॉन्ड्रिंग का पहलू

जाँच से संकेत मिलता है कि असलम पटनी ने बाद में यह संपत्ति सलीम फ्रूट की पत्नी शाजिया सलीम इकबाल कुरैशी के नाम हस्तांतरित कर दी। ईडी के अनुसार, इन लेन-देनों को इस तरह संरचित किया गया ताकि जबरन वसूली और भय दिखाकर हासिल की गई संपत्ति को एक वैध हस्तांतरण का स्वरूप दिया जा सके — यही PMLA के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का आधार बनता है।

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्रीय एजेंसियाँ संगठित अपराध नेटवर्कों से जुड़ी संपत्ति जब्ती के मामलों में तेज़ी से कार्रवाई कर रही हैं।

क्या जब्त किया गया

ईडी ने लंबत बिल्डिंग — जो वर्तमान में शाजिया सलीम इकबाल कुरैशी के नाम दर्ज है — के साथ-साथ असलम अब्दुल रहमान पटनी और अन्य आरोपियों के बैंक बैलेंस को भी अस्थायी रूप से संलग्न किया है। जब्त संपत्तियों का कुल अनुमानित मूल्य लगभग ₹4 करोड़ बताया गया है।

आगे क्या होगा

ईडी ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में आगे की जाँच जारी है। PMLA के तहत अस्थायी जब्ती के बाद एजेंसी को निर्धारित समय-सीमा के भीतर सक्षम प्राधिकरण के समक्ष अपना पक्ष रखना होगा। आरोपियों पर अतिरिक्त कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन D-कंपनी के नाम का उल्लेख और सलीम फ्रूट जैसे कथित गैंगस्टर से जुड़े नामों की उपस्थिति यह संकेत देती है कि ईडी की नज़र केवल इस एक लेन-देन पर नहीं, बल्कि संभवतः एक बड़े नेटवर्क पर है। असली प्रश्न यह है कि क्या यह कार्रवाई अंतिम चार्जशीट और दोषसिद्धि तक पहुँचेगी — क्योंकि अतीत में ऐसे हाई-प्रोफाइल PMLA मामले अदालतों में तकनीकी आधारों पर लंबे खिंचते रहे हैं।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने मुंबई में किसके खिलाफ और क्यों कार्रवाई की?
ईडी ने असलम अब्दुल रहमान पटनी और अन्य आरोपियों के विरुद्ध PMLA, 2002 के तहत कार्रवाई की, क्योंकि जाँच में सामने आया कि D-कंपनी और दाऊद इब्राहिम के नाम पर धमकी देकर एक संपत्ति जबरन हड़पी गई और बाद में उसे मनी लॉन्ड्रिंग के तरीके से अन्य व्यक्तियों को हस्तांतरित किया गया।
'लंबत बिल्डिंग' मामले में क्या हुआ था?
जाँच के अनुसार, यास्मीन मोहम्मद अहमद और स्वर्गीय शेरजादा जंगरेज खान की 'लंबत बिल्डिंग' में 50% हिस्सेदारी को कथित तौर पर D-कंपनी, दाऊद इब्राहिम और सलीम फ्रूट के नाम पर धमकाकर बिना किसी भुगतान के हड़पा गया। बाद में यह संपत्ति सलीम फ्रूट की पत्नी शाजिया सलीम इकबाल कुरैशी के नाम हस्तांतरित कर दी गई।
PMLA के तहत अस्थायी जब्ती का क्या मतलब है?
PMLA, 2002 के तहत ED किसी भी संपत्ति को अस्थायी रूप से जब्त (Provisional Attachment) कर सकती है यदि उसे मनी लॉन्ड्रिंग से अर्जित माना जाए। इसके बाद एजेंसी को निर्धारित समय में एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी के समक्ष अपना पक्ष रखना होता है, जो जब्ती को स्थायी रखने या हटाने का निर्णय करती है।
इस मामले में सलीम फ्रूट कौन हैं?
सलीम इकबाल कुरैशी उर्फ सलीम फ्रूट को जाँच एजेंसियाँ कथित तौर पर छोटा शकील का बहनोई और D-कंपनी नेटवर्क से जुड़ा बताती हैं। इस मामले में उनकी पत्नी शाजिया सलीम इकबाल कुरैशी के नाम पर जब्त 'लंबत बिल्डिंग' दर्ज थी।
इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जाएंगे?
ईडी ने स्पष्ट किया है कि आगे की जाँच जारी है। PMLA प्रक्रिया के अनुसार, अस्थायी जब्ती के बाद एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी की स्वीकृति ली जाएगी। संभावित रूप से और आरोपियों को इस मामले में जोड़ा जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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