5 नवंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कर्नाटक CM शिवकुमार की बहुराष्ट्रीय कंपनियों से अपील: भर्ती में कन्नड़िगाओं को दें प्राथमिकता

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कर्नाटक CM शिवकुमार की बहुराष्ट्रीय कंपनियों से अपील: भर्ती में कन्नड़िगाओं को दें प्राथमिकता

सारांश

कर्नाटक CM शिवकुमार ने बेंगलुरु की बहुराष्ट्रीय कंपनियों से कन्नड़िगाओं को भर्ती में प्राथमिकता देने की अपील की। पृष्ठभूमि में KRV का 300 से अधिक IT कंपनियों का सर्वे और मोहनदास पई का विरोध है — जो बेंगलुरु की वैश्विक पहचान और स्थानीय रोज़गार की माँग के बीच तनाव को उजागर करता है।

मुख्य बातें

CM डीके शिवकुमार ने 5 नवंबर 2026 को बेंगलुरु में बहुराष्ट्रीय कंपनियों से कन्नड़िगाओं को भर्ती में प्राथमिकता देने की अपील की।
कर्नाटक रक्षणा वेदिके (KRV) ने 1 नवंबर (कन्नड़ राज्योत्सव) से एक महीने का अभियान शुरू किया; अब तक 300 IT-BT कंपनियों का दौरा।
KRV के आँकड़ों के अनुसार अधिकांश कंपनियों में कन्नड़िगा कर्मचारियों की हिस्सेदारी महज 7–25% ; केवल कुछ में 40% तक।
उद्योग जगत के नाम मोहनदास पई ने अभियान का विरोध किया; PLFS के अनुसार कर्नाटक में युवा बेरोज़गारी 10.3% ।
राज्य में 67,000+ IT कंपनियाँ , 23,000 स्टार्टअप , 56 यूनिकॉर्न और 27 लाख+ तकनीकी पेशेवर हैं।
KRV दिसंबर 2026 में एकत्र आँकड़े CM शिवकुमार को सौंपेगी।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को बेंगलुरु में सक्रिय बहुराष्ट्रीय कंपनियों से आग्रह किया कि वे भर्ती प्रक्रिया में स्थानीय कन्नड़िगा युवाओं को प्राथमिकता दें और स्थानीय उद्योगों के साथ साझेदारी बढ़ाएँ। यह अपील ऐसे समय की गई जब कर्नाटक रक्षणा वेदिके (KRV) द्वारा आईटी कंपनियों में कन्नड़ भाषी कर्मचारियों की हिस्सेदारी को लेकर एक महीने का अभियान चल रहा है।

मुख्यमंत्री ने क्या कहा

मुख्यमंत्री शिवकुमार एक स्वीडिश फर्नीचर कंपनी के बेंगलुरु स्टोर के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे — उन्होंने खुद स्वीकार किया कि यह पहली बार था जब वे किसी स्टोर के उद्घाटन में उपस्थित हुए। उन्होंने कहा, 'कर्नाटक के छोटे उद्योग अच्छी गुणवत्ता वाला फर्नीचर तैयार कर सकते हैं। उनका उपयोग करें और उन्हें प्रोत्साहित करें। इसके ज़रिए कर्नाटक को प्राथमिकता दें और संगठन में अधिक कन्नड़िगाओं को रोज़गार दें।'

उन्होंने आगे कहा, 'हम वैश्विक निवेशकों को कर्नाटक आने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं और यहाँ कई अवसर पैदा किए हैं। स्वीडन के भारत और कर्नाटक के साथ अच्छे संबंध हैं। स्थानीय कन्नड़ युवाओं को अधिक रोज़गार दें। हमारे युवा प्रतिभाशाली, संस्कारी हैं और ग्राहकों को आकर्षित करने की क्षमता रखते हैं।'

KRV अभियान की पृष्ठभूमि

कर्नाटक रक्षणा वेदिके (KRV) ने 1 नवंबर को कन्नड़ राज्योत्सव के अवसर पर यह अभियान शुरू किया था। संगठन के राज्य अध्यक्ष टीए नारायण गौड़ा के नेतृत्व में बेंगलुरु की 100 से अधिक आईटी कंपनियों और टेक्नोलॉजी पार्कों का दौरा किया जा रहा है।

संगठन के कार्यकर्ता इन कंपनियों को ज्ञापन सौंपकर कुल कर्मचारियों की संख्या, कन्नड़िगा कर्मचारियों का प्रतिशत, भर्ती मानदंड, पिछले तीन वर्षों की भर्ती प्रवृत्ति और स्थानीय इंटर्नशिप कार्यक्रमों की जानकारी माँग रहे हैं। संगठन का दावा है कि अब तक करीब 300 आईटी-बीटी कंपनियों का दौरा कर आँकड़े जुटाए जा चुके हैं। 10-10 सदस्यों की 10 टीमें प्रतिदिन लगभग 10 कंपनियों का दौरा कर रही हैं।

गौरतलब है कि इस अभियान की पृष्ठभूमि में सोशल मीडिया पर सामने आए वे वीडियो और आरोप हैं, जिनमें कहा गया कि निजी कंपनियों में भर्ती के दौरान कन्नड़ भाषी उम्मीदवारों के साथ भेदभाव किया जा रहा है।

आँकड़े और दावे

नारायण गौड़ा ने दावा किया कि अब तक जुटाए गए आँकड़ों के अनुसार कई कंपनियों में कन्नड़िगा कर्मचारियों की हिस्सेदारी केवल 7 से 8 प्रतिशत या 20 से 25 प्रतिशत तक है, जबकि सिर्फ तीन या चार कंपनियों में यह आँकड़ा लगभग 40 प्रतिशत तक पहुँचता है। उन्होंने कहा कि यह जानकारी दिसंबर में मुख्यमंत्री शिवकुमार को सौंपी जाएगी और संगठन 27 वर्षों से इस मुद्दे के लिए संघर्ष कर रहा है।

आलोचना और विरोधी स्वर

इस अभियान पर उद्योग जगत के जाने-माने नाम मोहनदास पई ने आपत्ति जताई है। उन्होंने कर्नाटक के कारोबारी माहौल और बेंगलुरु की वैश्विक तकनीकी केंद्र के रूप में पहचान को बचाने की अपील करते हुए इस तरह की राजनीति का विरोध किया। आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) के आँकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि कर्नाटक में बेरोज़गारी दर 2.3 प्रतिशत और युवाओं में बेरोज़गारी 10.3 प्रतिशत है।

पई ने यह भी रेखांकित किया कि राज्य में 67,000 से अधिक आईटी कंपनियाँ, 23,000 स्टार्टअप, 56 यूनिकॉर्न और 27 लाख से अधिक तकनीकी पेशेवर हैं — और यह प्रगति पिछले 35 वर्षों के सामूहिक प्रयासों का नतीजा है।

इस पर पलटवार करते हुए नारायण गौड़ा ने पई पर आंदोलन को कमज़ोर करने की कोशिश का आरोप लगाया और कहा, 'मोहनदास पई कन्नड़िगाओं को उकसा रहे हैं और उनका मज़ाक उड़ा रहे हैं। यदि कोई इस आंदोलन को रोकने की कोशिश करेगा तो उसे वेदिके के विरोध का सामना करना पड़ेगा।'

आगे क्या होगा

KRV द्वारा जुटाए गए आँकड़े दिसंबर 2026 में मुख्यमंत्री को सौंपे जाने हैं, जिसके बाद सरकारी स्तर पर भर्ती नीति को लेकर कदम उठाए जाने की संभावना है। यह अभियान कर्नाटक में एक व्यापक बहस को जन्म दे रहा है — एक ओर स्थानीय रोज़गार की माँग है, तो दूसरी ओर बेंगलुरु के वैश्विक निवेश गंतव्य की साख बनाए रखने की चुनौती।

संपादकीय दृष्टिकोण

न खुलकर विरोध। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या 'अपील' से वास्तव में भर्ती नीतियाँ बदलती हैं, या यह महज एक सांकेतिक बयानबाज़ी है? बेंगलुरु का आईटी इकोसिस्टम — 67,000 कंपनियाँ, 56 यूनिकॉर्न — वैश्विक प्रतिभा पर टिका है; कोई भी बाध्यकारी स्थानीयकरण नीति निवेशकों को सशंकित कर सकती है। दूसरी ओर, यदि IT क्षेत्र में स्थानीय प्रतिनिधित्व वाकई 7-8% पर है, तो यह राज्य की शैक्षिक और कौशल विकास नीतियों पर भी उतना ही बड़ा सवाल है जितना कि कंपनियों पर।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CM शिवकुमार ने बहुराष्ट्रीय कंपनियों से क्या अपील की है?
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने बेंगलुरु में काम कर रही बहुराष्ट्रीय कंपनियों से आग्रह किया कि वे भर्ती में कन्नड़िगाओं को प्राथमिकता दें और स्थानीय उद्योगों के साथ व्यावसायिक साझेदारी बढ़ाएँ। उन्होंने यह बात एक स्वीडिश फर्नीचर कंपनी के बेंगलुरु स्टोर उद्घाटन पर कही।
कर्नाटक रक्षणा वेदिके का अभियान क्या है?
KRV ने 1 नवंबर 2026 को कन्नड़ राज्योत्सव पर एक महीने का अभियान शुरू किया, जिसके तहत बेंगलुरु की 100 से अधिक IT कंपनियों का दौरा कर कन्नड़िगा कर्मचारियों की संख्या और भर्ती मानदंडों की जानकारी माँगी जा रही है। अब तक करीब 300 IT-BT कंपनियों का सर्वे किया जा चुका है।
IT कंपनियों में कन्नड़िगा कर्मचारियों का प्रतिशत कितना है?
KRV के दावे के अनुसार अधिकांश कंपनियों में कन्नड़िगा कर्मचारियों की हिस्सेदारी केवल 7 से 25 प्रतिशत के बीच है, और सिर्फ तीन-चार कंपनियों में यह लगभग 40 प्रतिशत तक है। ये आँकड़े अभी संगठन के स्वयं के सर्वे पर आधारित हैं और सरकारी रूप से सत्यापित नहीं हैं।
मोहनदास पई ने इस अभियान का विरोध क्यों किया?
उद्योग जगत के जानेमाने नाम मोहनदास पई ने बेंगलुरु के वैश्विक तकनीकी केंद्र की पहचान और कारोबारी माहौल को नुकसान पहुँचाने की आशंका जताते हुए इस अभियान का विरोध किया। उन्होंने PLFS आँकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि कर्नाटक में बेरोज़गारी दर 2.3% है और समाधान गुणवत्तापूर्ण रोज़गार सृजन में है, न कि नफरत फैलाने वाली राजनीति में।
KRV अभियान के आँकड़े कब सौंपे जाएँगे और आगे क्या होगा?
KRV द्वारा जुटाई गई जानकारी दिसंबर 2026 में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को सौंपी जाएगी। इसके बाद सरकार IT कंपनियों में स्थानीय भर्ती को लेकर नीतिगत कदम उठा सकती है, हालाँकि अभी कोई बाध्यकारी नीति की घोषणा नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 दिन पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 3 महीने पहले