कर्नाटक CM शिवकुमार की बहुराष्ट्रीय कंपनियों से अपील: भर्ती में कन्नड़िगाओं को दें प्राथमिकता
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को बेंगलुरु में सक्रिय बहुराष्ट्रीय कंपनियों से आग्रह किया कि वे भर्ती प्रक्रिया में स्थानीय कन्नड़िगा युवाओं को प्राथमिकता दें और स्थानीय उद्योगों के साथ साझेदारी बढ़ाएँ। यह अपील ऐसे समय की गई जब कर्नाटक रक्षणा वेदिके (KRV) द्वारा आईटी कंपनियों में कन्नड़ भाषी कर्मचारियों की हिस्सेदारी को लेकर एक महीने का अभियान चल रहा है।
मुख्यमंत्री ने क्या कहा
मुख्यमंत्री शिवकुमार एक स्वीडिश फर्नीचर कंपनी के बेंगलुरु स्टोर के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे — उन्होंने खुद स्वीकार किया कि यह पहली बार था जब वे किसी स्टोर के उद्घाटन में उपस्थित हुए। उन्होंने कहा, 'कर्नाटक के छोटे उद्योग अच्छी गुणवत्ता वाला फर्नीचर तैयार कर सकते हैं। उनका उपयोग करें और उन्हें प्रोत्साहित करें। इसके ज़रिए कर्नाटक को प्राथमिकता दें और संगठन में अधिक कन्नड़िगाओं को रोज़गार दें।'
उन्होंने आगे कहा, 'हम वैश्विक निवेशकों को कर्नाटक आने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं और यहाँ कई अवसर पैदा किए हैं। स्वीडन के भारत और कर्नाटक के साथ अच्छे संबंध हैं। स्थानीय कन्नड़ युवाओं को अधिक रोज़गार दें। हमारे युवा प्रतिभाशाली, संस्कारी हैं और ग्राहकों को आकर्षित करने की क्षमता रखते हैं।'
KRV अभियान की पृष्ठभूमि
कर्नाटक रक्षणा वेदिके (KRV) ने 1 नवंबर को कन्नड़ राज्योत्सव के अवसर पर यह अभियान शुरू किया था। संगठन के राज्य अध्यक्ष टीए नारायण गौड़ा के नेतृत्व में बेंगलुरु की 100 से अधिक आईटी कंपनियों और टेक्नोलॉजी पार्कों का दौरा किया जा रहा है।
संगठन के कार्यकर्ता इन कंपनियों को ज्ञापन सौंपकर कुल कर्मचारियों की संख्या, कन्नड़िगा कर्मचारियों का प्रतिशत, भर्ती मानदंड, पिछले तीन वर्षों की भर्ती प्रवृत्ति और स्थानीय इंटर्नशिप कार्यक्रमों की जानकारी माँग रहे हैं। संगठन का दावा है कि अब तक करीब 300 आईटी-बीटी कंपनियों का दौरा कर आँकड़े जुटाए जा चुके हैं। 10-10 सदस्यों की 10 टीमें प्रतिदिन लगभग 10 कंपनियों का दौरा कर रही हैं।
गौरतलब है कि इस अभियान की पृष्ठभूमि में सोशल मीडिया पर सामने आए वे वीडियो और आरोप हैं, जिनमें कहा गया कि निजी कंपनियों में भर्ती के दौरान कन्नड़ भाषी उम्मीदवारों के साथ भेदभाव किया जा रहा है।
आँकड़े और दावे
नारायण गौड़ा ने दावा किया कि अब तक जुटाए गए आँकड़ों के अनुसार कई कंपनियों में कन्नड़िगा कर्मचारियों की हिस्सेदारी केवल 7 से 8 प्रतिशत या 20 से 25 प्रतिशत तक है, जबकि सिर्फ तीन या चार कंपनियों में यह आँकड़ा लगभग 40 प्रतिशत तक पहुँचता है। उन्होंने कहा कि यह जानकारी दिसंबर में मुख्यमंत्री शिवकुमार को सौंपी जाएगी और संगठन 27 वर्षों से इस मुद्दे के लिए संघर्ष कर रहा है।
आलोचना और विरोधी स्वर
इस अभियान पर उद्योग जगत के जाने-माने नाम मोहनदास पई ने आपत्ति जताई है। उन्होंने कर्नाटक के कारोबारी माहौल और बेंगलुरु की वैश्विक तकनीकी केंद्र के रूप में पहचान को बचाने की अपील करते हुए इस तरह की राजनीति का विरोध किया। आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) के आँकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि कर्नाटक में बेरोज़गारी दर 2.3 प्रतिशत और युवाओं में बेरोज़गारी 10.3 प्रतिशत है।
पई ने यह भी रेखांकित किया कि राज्य में 67,000 से अधिक आईटी कंपनियाँ, 23,000 स्टार्टअप, 56 यूनिकॉर्न और 27 लाख से अधिक तकनीकी पेशेवर हैं — और यह प्रगति पिछले 35 वर्षों के सामूहिक प्रयासों का नतीजा है।
इस पर पलटवार करते हुए नारायण गौड़ा ने पई पर आंदोलन को कमज़ोर करने की कोशिश का आरोप लगाया और कहा, 'मोहनदास पई कन्नड़िगाओं को उकसा रहे हैं और उनका मज़ाक उड़ा रहे हैं। यदि कोई इस आंदोलन को रोकने की कोशिश करेगा तो उसे वेदिके के विरोध का सामना करना पड़ेगा।'
आगे क्या होगा
KRV द्वारा जुटाए गए आँकड़े दिसंबर 2026 में मुख्यमंत्री को सौंपे जाने हैं, जिसके बाद सरकारी स्तर पर भर्ती नीति को लेकर कदम उठाए जाने की संभावना है। यह अभियान कर्नाटक में एक व्यापक बहस को जन्म दे रहा है — एक ओर स्थानीय रोज़गार की माँग है, तो दूसरी ओर बेंगलुरु के वैश्विक निवेश गंतव्य की साख बनाए रखने की चुनौती।